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तीन दोस्तों ने मिलकर बनाया हिंद शेयर ऐप, हो रही सराहना
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जलालपुर। कहते हैं कि अगर कुछ करने की तमन्ना और हौसला हो तो कोई चीज मुश्किल नहीं होती है। बस उसके लिए सतत प्रयास और मेहनत की जरूरत है। सकारात्मक सोच के साथ किया जाने वाला प्रयास एक दिन रंग जरूर लाता है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है, टांडा के तीन होनहार युवकों ने। भारत सरकार द्वारा चीनी ऐप बैन होने के बाद फोटो आदि ट्रांसफर करने के लिए आ रही दिक्कतों से निजात पाने के लिए लॉकडाउन में घर बैठे तीन दोस्तों ने हिंद शेयर एप बनाने का दावा किया है। प्ले स्टोर पर यह ऐप अपलोड भी हो चुका है। युवाओं के इस सराहनीय प्रयास की हर तरफ प्रशंसा भी हो रही है।
टांडा नगर के डीएवी साइंस एकेडमी से इंटरमीडिएट की परीक्षा पास करने वाले नगर निवासी आतिफनूर खान, माज खान व उबेद अहमद ने अपनी हुनर का प्रदर्शन किया है। सरकार द्वारा चीनी ऍप पर बैन लगाने के बाद टांडा नगर निवासी तीन युवकों ने शेयरइट ऍप के स्थान पर हिंद शेयर ऍप बनाने का दावा किया है। इससे फाइल, फोटो व वीडियो आदि को एक दूसरे के पास ट्रांसफर किया जा सकता है। अमर उजाला से खास बातचीत में आतिफनूर ने बताया कि शेयरइट एप बंद होने से हो रही मुश्किलों के बीच उन्होंने अपने दोस्तों के साथ इस ऍप को बनाने की तैयारी की।
बताया कि वह लोग कम्प्यूटर साइंस के छात्र रहे। इससे उन लोगों को इस ऍप को बनाने में ज्यादा मुश्किल नही हुई। ऐप तैयार होने के बाद उन लोगों ने ईमेल के जरिए प्ले स्टोर से संपर्क किया। इसके बाद लगभग 2 हजार रुपए खर्च कर गूगल एकाउंट प्राप्त किया। बीते 10 जुलाई को प्ले स्टोर को अपना ऐप भेजा। करीब एक सप्ताह के परीक्षण के बाद 17 जुलाई को प्ले स्टोर पर ऐप उपलब्ध हो गया। अच्छे फीडबैक भी प्राप्त हो रहे हैं। तीनों होनहारों की इस सफलता पर स्थानीय नागरिकों ने खुशी का इजहार किया है। भविष्य में तकनीक के क्षेत्र में बेहतर योगदान की भी उम्मीद जतायी।
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टांडा नगर के डीएवी साइंस एकेडमी से इंटरमीडिएट की परीक्षा पास करने वाले नगर निवासी आतिफनूर खान, माज खान व उबेद अहमद ने अपनी हुनर का प्रदर्शन किया है। सरकार द्वारा चीनी ऍप पर बैन लगाने के बाद टांडा नगर निवासी तीन युवकों ने शेयरइट ऍप के स्थान पर हिंद शेयर ऍप बनाने का दावा किया है। इससे फाइल, फोटो व वीडियो आदि को एक दूसरे के पास ट्रांसफर किया जा सकता है। अमर उजाला से खास बातचीत में आतिफनूर ने बताया कि शेयरइट एप बंद होने से हो रही मुश्किलों के बीच उन्होंने अपने दोस्तों के साथ इस ऍप को बनाने की तैयारी की।
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बताया कि वह लोग कम्प्यूटर साइंस के छात्र रहे। इससे उन लोगों को इस ऍप को बनाने में ज्यादा मुश्किल नही हुई। ऐप तैयार होने के बाद उन लोगों ने ईमेल के जरिए प्ले स्टोर से संपर्क किया। इसके बाद लगभग 2 हजार रुपए खर्च कर गूगल एकाउंट प्राप्त किया। बीते 10 जुलाई को प्ले स्टोर को अपना ऐप भेजा। करीब एक सप्ताह के परीक्षण के बाद 17 जुलाई को प्ले स्टोर पर ऐप उपलब्ध हो गया। अच्छे फीडबैक भी प्राप्त हो रहे हैं। तीनों होनहारों की इस सफलता पर स्थानीय नागरिकों ने खुशी का इजहार किया है। भविष्य में तकनीक के क्षेत्र में बेहतर योगदान की भी उम्मीद जतायी।
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