{"_id":"68bc68def89c7daa2f05f7d4","slug":"accepted-exile-to-establish-religion-ambedkar-nagar-news-c-91-1-brp1007-141539-2025-09-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ambedkar Nagar News: धर्म स्थापना के लिए स्वीकार किया वनवास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ambedkar Nagar News: धर्म स्थापना के लिए स्वीकार किया वनवास
Sat, 06 Sep 2025 10:31 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Sat, 06 Sep 2025 10:31 PM IST
विज्ञापन
आलापुर (अंबेडकरनगर)। शांति विहार कॉलोनी में चल रही राम कथा में कथा व्यास श्रीनिवास दास वेदांती महाराज ने कैकेयी के कोप भवन प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। कहा कि धर्म स्थापना के लिए राम ने वनवास स्वीकार किया। कथा व्यास पीठ का पूजन पूर्व विधानसभा प्रत्याशी व वरिष्ठ भाजपा नेत्री प्रेमलता द्वारा किया गया।
वेदांती महाराज ने रामायण के उस प्रसिद्ध प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया जब मंथरा के बहकावे में आकर रानी कैकेयी कोप भवन चली जाती हैं। उन्होंने बताया कि मंथरा ने कैकेयी को यह भय दिखाया कि राम के राजगद्दी पर बैठने से उसका महत्व समाप्त हो जाएगा और कौशल्या राजमाता बन जाएंगी। इसी डर और भ्रम में कैकेयी ने राजा दशरथ से अपने पूर्व में प्राप्त दो वरदान मांग लिए। पहला वरदान भरत का राज्याभिषेक और दूसरा वरदान राम को 14 वर्षों का वनवास मांगा।
उन्होंने कहा कि राम ने अपनी लीलाओं की पूर्ति और धर्म स्थापना के लिए योगमाया का प्रयोग करते हुए इस कठोर निर्णय को सहजता से स्वीकार किया और पिता की आज्ञा को सर्वोपरि माना।
विज्ञापन
राजा दशरथ बार-बार उन्हें समझाते हैं, लेकिन कैकेयी अपने वचनों पर दृढ़ रहती हैं। यह प्रसंग रामायण का अत्यंत मार्मिक क्षण है, जिसे सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
विज्ञापन
वेदांती महाराज ने रामायण के उस प्रसिद्ध प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया जब मंथरा के बहकावे में आकर रानी कैकेयी कोप भवन चली जाती हैं। उन्होंने बताया कि मंथरा ने कैकेयी को यह भय दिखाया कि राम के राजगद्दी पर बैठने से उसका महत्व समाप्त हो जाएगा और कौशल्या राजमाता बन जाएंगी। इसी डर और भ्रम में कैकेयी ने राजा दशरथ से अपने पूर्व में प्राप्त दो वरदान मांग लिए। पहला वरदान भरत का राज्याभिषेक और दूसरा वरदान राम को 14 वर्षों का वनवास मांगा।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि राम ने अपनी लीलाओं की पूर्ति और धर्म स्थापना के लिए योगमाया का प्रयोग करते हुए इस कठोर निर्णय को सहजता से स्वीकार किया और पिता की आज्ञा को सर्वोपरि माना।
विज्ञापन
राजा दशरथ बार-बार उन्हें समझाते हैं, लेकिन कैकेयी अपने वचनों पर दृढ़ रहती हैं। यह प्रसंग रामायण का अत्यंत मार्मिक क्षण है, जिसे सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।