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फरार माफिया अजय दबोचा गया
अमर उजाला ब्यूरो/ अंबेडकरनगर
Updated Wed, 02 Sep 2015 11:19 PM IST
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जनपद पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए जाल बिछा रखा था। विभिन्न एजेंसियों को भी इसमें लगाया गया था। बुधवार को एसटीएफ ने उसे लखनऊ के हजरतगंज से गिरफ्तार कर लिया। लखनऊ में ही मौजूद जनपद पुलिस उसे लेकर देररात तक अंबेडकरनगर पहुंच रही है।
मालूम हो कि लगभग छह माह पूर्व अकबरपुर से महरुआ होकर बनने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण कार्य रंगदारी के लिए ठप पड़ गया था। महरुआ थाना क्षेत्र के लोकनाथपुर निवासी माफिया अजय सिंह सिपाही पर आरोप था कि उसके गुर्गों ने निर्माण में लगे अधिकारियों व कर्मचारियों की रंगदारी के लिए पिटाई की जिसके बाद वे सब काम छोड़कर भाग खड़े हुए।
मामले में अज्ञात के विरुद्घ केस दर्ज होने के बाद पुलिस ने विवेचना में अजय सिपाही के अलावा उसके भाई विजय प्रताप सिंह व भीटी थाना क्षेत्र के रेवली निवासी अभिषेक सिंह को मुल्जिम बनाया था। पुलिस की यह कार्रवाई गति पकड़ती इसी बीच कुछ प्रभावशाली जनप्रतिनिधियों ने इसमें टांग अड़ा दी।
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इससे पुलिस की कार्रवाई कुछ सुस्त पड़ी, लेकिन टांडा में अवैध बालू खनन से लेकर मेडिकल कालेज के ठेकों तक में दखल बढ़ने लगा तो जनपद पुलिस ने फिर से शिकंजा कसना शुरू कर दिया।
एक पखवारे पूर्व सूचना मिली कि अजय अपने गांव में मौजूद है तो भारी पुलिस बल ने छापेमारी की। पहले से ही सूचना मिल जाने के कारण वह मौके से फरार हो गया।
इसके बाद पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए लखनऊ, इलाहाबाद, फैजाबाद व सुल्तानपुर के अलावा मुंबई तक अपना जाल बिछाया। कई दिनों की लम्बी घेराबंदी व सुरागरसी के बीच अन्तत: माफिया को गिरफ्तार करने की सफलता पुलिस को मिल ही गई।
इस काम में लगाई गई एसटीएफ लखनऊ की टीम ने बुधवार को उसे हजरतगंज इलाके में धर दबोचा। गिरफ्तारी के बाद अंबेडकरनगर पुलिस उसे लेकर जनपद के लिए रवाना हो गई है। एसपी पंकज ने माफिया अजय सिपाही की गिरफ्तारी होने की पुष्टि की है। बताया कि उसे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में अंबेडकरनगर लाया जा रहा है।
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मालूम हो कि लगभग छह माह पूर्व अकबरपुर से महरुआ होकर बनने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण कार्य रंगदारी के लिए ठप पड़ गया था। महरुआ थाना क्षेत्र के लोकनाथपुर निवासी माफिया अजय सिंह सिपाही पर आरोप था कि उसके गुर्गों ने निर्माण में लगे अधिकारियों व कर्मचारियों की रंगदारी के लिए पिटाई की जिसके बाद वे सब काम छोड़कर भाग खड़े हुए।
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मामले में अज्ञात के विरुद्घ केस दर्ज होने के बाद पुलिस ने विवेचना में अजय सिपाही के अलावा उसके भाई विजय प्रताप सिंह व भीटी थाना क्षेत्र के रेवली निवासी अभिषेक सिंह को मुल्जिम बनाया था। पुलिस की यह कार्रवाई गति पकड़ती इसी बीच कुछ प्रभावशाली जनप्रतिनिधियों ने इसमें टांग अड़ा दी।
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इससे पुलिस की कार्रवाई कुछ सुस्त पड़ी, लेकिन टांडा में अवैध बालू खनन से लेकर मेडिकल कालेज के ठेकों तक में दखल बढ़ने लगा तो जनपद पुलिस ने फिर से शिकंजा कसना शुरू कर दिया।
एक पखवारे पूर्व सूचना मिली कि अजय अपने गांव में मौजूद है तो भारी पुलिस बल ने छापेमारी की। पहले से ही सूचना मिल जाने के कारण वह मौके से फरार हो गया।
इसके बाद पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए लखनऊ, इलाहाबाद, फैजाबाद व सुल्तानपुर के अलावा मुंबई तक अपना जाल बिछाया। कई दिनों की लम्बी घेराबंदी व सुरागरसी के बीच अन्तत: माफिया को गिरफ्तार करने की सफलता पुलिस को मिल ही गई।
इस काम में लगाई गई एसटीएफ लखनऊ की टीम ने बुधवार को उसे हजरतगंज इलाके में धर दबोचा। गिरफ्तारी के बाद अंबेडकरनगर पुलिस उसे लेकर जनपद के लिए रवाना हो गई है। एसपी पंकज ने माफिया अजय सिपाही की गिरफ्तारी होने की पुष्टि की है। बताया कि उसे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में अंबेडकरनगर लाया जा रहा है।