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7,753 पात्रों ने नहीं खुलवाया खाता
AmbedkarNagar
Updated Mon, 12 Nov 2012 12:00 PM IST
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अंबेडकरनगर। जिले में जननी सुरक्षा योजना का लाभ पूरी तरह महिलाओं को नहीं मिल पा रहा है। सरकारी रिकार्ड में पात्रों को भुगतान तो दर्शाया जा रहा है, लेकिन हकीकत इससे परे है। ऐसा इसलिए क्योंकि पूर्व में सभी पात्रों को एकाउंट पेई चेक काटने के साथ ही विभाग ने भुगतान पूरा करने की औपचारिकता निभा दी। जमीनी हकीकत हालांकि यह थी कि सिर्फ इस भुगतान के लिए जिले के 7,753 पात्र बैंकों में खाता खुलवाने को तैयार नहीं हुए। अब ऐसे सभी लाभार्थियों को बियरर चेक दिए जाने का निर्णय लिया गया है। इससे 7 हजार 753 लाभार्थियों का लंबित पड़ा भुगतान जल्द हो जाने की उम्मीद प्रबल हो गई है।
मातृ व शिशु मृत्यु की दर को कम करने के लिए शासन द्वारा जननी सुरक्षा योजना चलाई गई। इसमें प्रसूता को संस्थागत प्रसव के प्रति प्रेरित करने के लिए सहायता राशि दिए जाने का प्रस्ताव है। योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को 1400 व शहरी क्षेत्र की महिलाओं को 1 हजार रुपये दिए जाते है। साथ ही उन आशा बहुओं को भी 600 रुपये की धनराशि दी जाती है, जो सुरक्षित प्रसव के लिए महिलाओं को निकतटम पीएचसी व सीएचसी तक ले जाती हैं। सिर्फ इतना ही नहीं प्रसव के बाद 48 घंटे तक एक तरफ जहां उनका नि:शुल्क इलाज होता है, वहीं भोजन की भी व्यवस्था होती है। योजना के तहत मातृ व शिशु को चिकित्सालय के नि:शुल्क वाहन द्वारा उन्हें उनके घर तक पहुंचाया जाता है।
हालांकि शासन द्वारा चलाई जा रही यह योजन विभागीय अधिकारियों की लापरवाही व मनमानी की भेंट चढ़ती जा रही है। पात्रों को सुचारु तरीके से योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। विभागीय अधिकारियों की लापरवाही का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि विगत दिनों शासन को जो रिपोर्ट भेजी गई, उसमें कहा गया कि अब तक कुल 7 हजार 753 लाभार्थियों को योजना का लाभ दिया जाना और उन्हें पूरा भुगतान कर दिया जाना दिखाया गया। हालांकि विभाग द्वारा भेजी गई रिपोर्ट बीते 3 नवंबर को फैजाबाद में अपर निदेशक की समीक्षा बैठक के दौरान पूरी तरह गलत साबित हुई। अपर निदेशक स्वास्थ्य ने बैठक के दौरान कहा कि पूर्व में भेजी गई प्रपत्र 18 की जननी सुरक्षा योजना समीक्षा करने पर पाया गया कि अंबेडकरनगर की प्रगति रिपोर्ट गलत है एवं 7 हजार 753 लाभार्थियों का भुगतान लंबित है। इसके क्रम में निर्देशित किया जाता है कि संशोधित रिपोर्ट प्रेषित करें तथा 15 दिन के अंदर सभी का भुगतान किया जाए। ऐसी इसलिए हुआ क्योंकि पूर्व में यहां योजना के पात्रों को जिला प्रशासन ने बियरर चेक न देने का निर्देश दिया था। सभी पात्रों के नाम एकाउंट पेई चेक काट दिए गए। महज डेढ़ हजार रुपये के लिए 500 से 1000 रुपये तक जमा कर खाता खुलवाने की जहमत अधिकांश पात्रों ने नहीं उठाई। नतीजतन विभाग चेक काटकर भले ही भुगतान दर्शाता रहा, लेकिन पात्रों को इसका लाभ नहीं मिल पाया। अब फिर से बियरर चेक दिए जाने का निर्णय लिए जाने से पात्रों की बाछें खिल गई हैं।
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मातृ व शिशु मृत्यु की दर को कम करने के लिए शासन द्वारा जननी सुरक्षा योजना चलाई गई। इसमें प्रसूता को संस्थागत प्रसव के प्रति प्रेरित करने के लिए सहायता राशि दिए जाने का प्रस्ताव है। योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को 1400 व शहरी क्षेत्र की महिलाओं को 1 हजार रुपये दिए जाते है। साथ ही उन आशा बहुओं को भी 600 रुपये की धनराशि दी जाती है, जो सुरक्षित प्रसव के लिए महिलाओं को निकतटम पीएचसी व सीएचसी तक ले जाती हैं। सिर्फ इतना ही नहीं प्रसव के बाद 48 घंटे तक एक तरफ जहां उनका नि:शुल्क इलाज होता है, वहीं भोजन की भी व्यवस्था होती है। योजना के तहत मातृ व शिशु को चिकित्सालय के नि:शुल्क वाहन द्वारा उन्हें उनके घर तक पहुंचाया जाता है।
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हालांकि शासन द्वारा चलाई जा रही यह योजन विभागीय अधिकारियों की लापरवाही व मनमानी की भेंट चढ़ती जा रही है। पात्रों को सुचारु तरीके से योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। विभागीय अधिकारियों की लापरवाही का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि विगत दिनों शासन को जो रिपोर्ट भेजी गई, उसमें कहा गया कि अब तक कुल 7 हजार 753 लाभार्थियों को योजना का लाभ दिया जाना और उन्हें पूरा भुगतान कर दिया जाना दिखाया गया। हालांकि विभाग द्वारा भेजी गई रिपोर्ट बीते 3 नवंबर को फैजाबाद में अपर निदेशक की समीक्षा बैठक के दौरान पूरी तरह गलत साबित हुई। अपर निदेशक स्वास्थ्य ने बैठक के दौरान कहा कि पूर्व में भेजी गई प्रपत्र 18 की जननी सुरक्षा योजना समीक्षा करने पर पाया गया कि अंबेडकरनगर की प्रगति रिपोर्ट गलत है एवं 7 हजार 753 लाभार्थियों का भुगतान लंबित है। इसके क्रम में निर्देशित किया जाता है कि संशोधित रिपोर्ट प्रेषित करें तथा 15 दिन के अंदर सभी का भुगतान किया जाए। ऐसी इसलिए हुआ क्योंकि पूर्व में यहां योजना के पात्रों को जिला प्रशासन ने बियरर चेक न देने का निर्देश दिया था। सभी पात्रों के नाम एकाउंट पेई चेक काट दिए गए। महज डेढ़ हजार रुपये के लिए 500 से 1000 रुपये तक जमा कर खाता खुलवाने की जहमत अधिकांश पात्रों ने नहीं उठाई। नतीजतन विभाग चेक काटकर भले ही भुगतान दर्शाता रहा, लेकिन पात्रों को इसका लाभ नहीं मिल पाया। अब फिर से बियरर चेक दिए जाने का निर्णय लिए जाने से पात्रों की बाछें खिल गई हैं।
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