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जच्चा व बच्चा की बेहतर देखभाल करें आशा
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अंबेडकरनगर। गर्भवती की बेहतर देखभाल की जिम्मेदारी आशा बहुओं पर भी है। उन्हें चाहिए कि वे गांव-गांव, घर-घर जाकर सर्वे कर गर्भवती का चिह्नांकन करें। साथ ही उनके बेहतर इलाज की जिम्मेदारी भी पूरी ईमानदारी के साथ निभाएं। ये बातें बुधवार को स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी एनसीराम ने अकबरपुर नगर के मीरानपुर में स्थित संयुक्त सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चल रहे आशा बहुओं के विशेष प्रशिक्षण में कहीं।
आशा बहुओं से आह्वान किया कि वे गांव-गांव, घर-घर जाकर सर्वे करें। गर्भवती की पहचान करें। इसके बाद उन्हें निकटवर्ती सरकारी अस्पताल में ले जाकर उनका पंजीकरण कराएं। कार्ड बनवाकर समय-समय पर न सिर्फ स्वास्थ्य जांच कराएं, बल्कि टीके भी लगवाएं। जांच में खून की कमी मिले तो उन्हें आवश्यकतानुसार आयरन की गोली दें।
प्रशिक्षक शाहिद कमर व अमरजीत ने कहा कि बेहतर देखभाल के आधार पर ही जच्चा-बच्चा दोनों को स्वस्थ रखा जा सकता है। कहा कि प्रसव से एक महीने पहले व एक महीने बाद तक जच्चा-बच्चा दोनों की देखभाल करनी होगी। महिलाओं को जागरूक करना होगा ताकि कम से कम 6 माह तक वे बच्चों को अपना दूध पिलाएं। कहा कि बच्चे का वजन भी समय-समय पर कराते रहें। उनके वजन में कमी आए तो तत्काल बालरोग विशेषज्ञ को दिखाएं। वजन में कमी कुपोषण का लक्षण है।
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आशा बहुओं से आह्वान किया कि वे गांव-गांव, घर-घर जाकर सर्वे करें। गर्भवती की पहचान करें। इसके बाद उन्हें निकटवर्ती सरकारी अस्पताल में ले जाकर उनका पंजीकरण कराएं। कार्ड बनवाकर समय-समय पर न सिर्फ स्वास्थ्य जांच कराएं, बल्कि टीके भी लगवाएं। जांच में खून की कमी मिले तो उन्हें आवश्यकतानुसार आयरन की गोली दें।
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प्रशिक्षक शाहिद कमर व अमरजीत ने कहा कि बेहतर देखभाल के आधार पर ही जच्चा-बच्चा दोनों को स्वस्थ रखा जा सकता है। कहा कि प्रसव से एक महीने पहले व एक महीने बाद तक जच्चा-बच्चा दोनों की देखभाल करनी होगी। महिलाओं को जागरूक करना होगा ताकि कम से कम 6 माह तक वे बच्चों को अपना दूध पिलाएं। कहा कि बच्चे का वजन भी समय-समय पर कराते रहें। उनके वजन में कमी आए तो तत्काल बालरोग विशेषज्ञ को दिखाएं। वजन में कमी कुपोषण का लक्षण है।
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