{"_id":"5ce8392cbdec220781489837","slug":"155872291012-ambedkar-nagar-news174","type":"story","status":"publish","title_hn":"जलालपुर व टांडा के मतदाता बने रितेश की जीत के नायक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जलालपुर व टांडा के मतदाता बने रितेश की जीत के नायक
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अंबेडकरनगर। सामान्य संसदीय सीट अंबेडकरनगर में बसपा का परचम लहराने में टांडा व जलालपुर विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं की अहम भूमिका रही। दोनों विधानसभा क्षेत्रों में गठबंधन प्रत्याशी रितेश पांडेय ने 40-40 हजार से अधिक मतों के अंतर से भाजपा प्रत्याशी मुकुट बिहारी वर्मा से बढ़त बनाई। वहीं, अकबरपुर में करीब 12 हजार तो कटेहरी में पांच हजार के मामूली अंतर से गठबंधन आगे रहा।
पाचवीं सीट गोसाईगंज पर भाजपा प्रत्याशी ने जरूर करीब 11 हजार मतों के अंतर से बसपा प्रत्याशी को पीछे छोड़ने की सफलता पाई। ऐसे में संसदीय सीट के पांच में से चार विधानसभा क्षेत्र में बढ़त बनाकर लोकसभा सीट पर रितेश ने कब्जा जमाया।
लोकसभा चुनाव का परिणाम गुरुवार को घोषित हुआ तो उसमें गठबंधन के बसपा प्रत्याशी जलालपुर विधायक रितेश पांडेय को सांसद चुन लिया गया। बसपा के गढ़ के तौर पर पहचानी जाने वाली इस संसदीय सीट पर परिसीमन से पहले बसपा प्रमुख मायावती भी तीन बार निर्वाचित हो चुकी हैं। परिसीमन के बाद एक बार रितेश के पिता राकेश पाण्डेय भी सांसद बने थे। इस बार बाजी रितेश ने मारी।
विज्ञापन
उनकी धमाकेदार जीत का बड़ा आधार उनके विधायिकी वाले जलालपुर क्षेत्र और टांडा विधानसभा क्षेत्र बने। जलालपुर में बसपा प्रत्याशी की जीत का अंतर जहां लगभग 41 हजार रहा, वहीं टांडा ने सर्वाधिक लगभग 47 हजार मतों की बढ़त रही। जलालपुर में भारी अंतर के पीछेे जहां विधायक के तौर पर रितेश के लगातार क्षेत्र में बने रहने व समस्याओं का संज्ञान लेने आदि की को आधार माना गया, वहीं टांडा में अल्पसंख्यक वर्ग के मतदाताओं की एकजुटता ने जीत का फासला बढ़ा दिया।
अकबरपुर विधानसभा क्षेत्र में अंतिम पांच राउंड के पहले तक चले कांटे के मुकाबले के बाद अंतत: रितेश को लगभग 12 हजार मतों के अंतर से बढ़त मिली वहीं कटेहरी में सबसे कम लगभग पांच हजार मतों के अंतर से रितेश ने भाजपा प्रत्याशी को पछाड़ा। कटेहरी से सटे विधानसभा क्षेत्र गोसाईगंज में बसपा प्रत्याशी रितेश पाण्डेय को भाजपा प्रत्याशी मुकुट बिहारी वर्मा से लगभग 11 हजार मतों के अंतर से पीछे रहे।
कटेहरी व गोसाईगंज दोनों को सवर्ण बाहुल क्षेत्रों के तौर पर जाना जाता है। ऐसे में इन दोनों क्षेत्रों में बसपा प्रत्याशी के कमजोर प्रदर्शन के पीछे राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यहां सवर्ण मतदाताओं ने सजातीय प्रत्याशी के बजाए भाजपा प्रत्याशी को वोट देने में ज्यादा रुचि दिखाई।
विज्ञापन
पाचवीं सीट गोसाईगंज पर भाजपा प्रत्याशी ने जरूर करीब 11 हजार मतों के अंतर से बसपा प्रत्याशी को पीछे छोड़ने की सफलता पाई। ऐसे में संसदीय सीट के पांच में से चार विधानसभा क्षेत्र में बढ़त बनाकर लोकसभा सीट पर रितेश ने कब्जा जमाया।
विज्ञापन
लोकसभा चुनाव का परिणाम गुरुवार को घोषित हुआ तो उसमें गठबंधन के बसपा प्रत्याशी जलालपुर विधायक रितेश पांडेय को सांसद चुन लिया गया। बसपा के गढ़ के तौर पर पहचानी जाने वाली इस संसदीय सीट पर परिसीमन से पहले बसपा प्रमुख मायावती भी तीन बार निर्वाचित हो चुकी हैं। परिसीमन के बाद एक बार रितेश के पिता राकेश पाण्डेय भी सांसद बने थे। इस बार बाजी रितेश ने मारी।
विज्ञापन
उनकी धमाकेदार जीत का बड़ा आधार उनके विधायिकी वाले जलालपुर क्षेत्र और टांडा विधानसभा क्षेत्र बने। जलालपुर में बसपा प्रत्याशी की जीत का अंतर जहां लगभग 41 हजार रहा, वहीं टांडा ने सर्वाधिक लगभग 47 हजार मतों की बढ़त रही। जलालपुर में भारी अंतर के पीछेे जहां विधायक के तौर पर रितेश के लगातार क्षेत्र में बने रहने व समस्याओं का संज्ञान लेने आदि की को आधार माना गया, वहीं टांडा में अल्पसंख्यक वर्ग के मतदाताओं की एकजुटता ने जीत का फासला बढ़ा दिया।
अकबरपुर विधानसभा क्षेत्र में अंतिम पांच राउंड के पहले तक चले कांटे के मुकाबले के बाद अंतत: रितेश को लगभग 12 हजार मतों के अंतर से बढ़त मिली वहीं कटेहरी में सबसे कम लगभग पांच हजार मतों के अंतर से रितेश ने भाजपा प्रत्याशी को पछाड़ा। कटेहरी से सटे विधानसभा क्षेत्र गोसाईगंज में बसपा प्रत्याशी रितेश पाण्डेय को भाजपा प्रत्याशी मुकुट बिहारी वर्मा से लगभग 11 हजार मतों के अंतर से पीछे रहे।
कटेहरी व गोसाईगंज दोनों को सवर्ण बाहुल क्षेत्रों के तौर पर जाना जाता है। ऐसे में इन दोनों क्षेत्रों में बसपा प्रत्याशी के कमजोर प्रदर्शन के पीछे राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यहां सवर्ण मतदाताओं ने सजातीय प्रत्याशी के बजाए भाजपा प्रत्याशी को वोट देने में ज्यादा रुचि दिखाई।