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बदहाली का दंश झेल रहा आधी आबादी के लिए बना एएनएम सेंटर भवन
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जहांगीरगंज (अंबेडकरनगर)। विकास खंड जहांगीरगंज की न्याय पंचायत ऐनवां की करीब पांच हजार महिलाओं को सुचारु चिकित्सा सुविधा देने के लिए आदमपुर गांव में बना एएनएम सेंटर बदहाली का शिकार हो गया है। करीब एक दशक पहले बना सेंटर उपेक्षा के चलते जर्जर हो गया है।
10 लाख से अधिक की लागत से बने इस भवन का लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में न सिर्फ संबंधित क्षेत्र की महिलाओं, युवतियों को उपचार के लिए दूर के अस्पतालों का चक्कर काटना पड़ता है, बल्कि सरकार द्वारा खर्च किए गए लाखों रुपये भी बर्बाद हो गए हैं। स्वास्थ्य महकमा सुध लेने की जरूरत नहीं समझ रहा। नतीजा यह है कि भवन अब खंडहर में तब्दील होकर रह गया।
ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को बेहतर चिकित्सा सुविधा का लाभ दिलाने की मंशा से सरकार ने ऐनवां न्याय पंचायत के आदमपुर में एएनएम सेंटर की स्थापना की। इस सेंटर पर एक एएनएम व सहायिका की तैनाती की गई। सेंटर पर आवासीय सुविधा दी गई, जिससे महिलाओं को 24 घंटे चिकित्सा सेवा का लाभ मिल सके।
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लाखों रुपये खर्च कर सेंटर भवन का निर्माण हो गया और एएनएम की तैनाती भी हो गई। इस केंद्र से ऐनवां, आदमपुर, चरहिया, नसीरपुर, मूसेपुर सहित दो ग्राम पंचायत के कुल 12 गांवों की पांच हजार महिलाओं को इसका लाभ दिया जाना शुरू हुआ। इस केंद्र के निर्माण से ग्रामीणों में खुशी का माहौल था। खासकर महिलाओं में उम्मीद जगी कि अब प्राथमिक चिकित्सा व प्रसव आदि के लिए उन्हें दूर अस्पतालों का चक्कर नहीं काटना पड़ेगा। साथ ही चिकित्सीय परामर्श आदि में भी दिक्कत नहीं होगी।
शुरुआती दौर से ही इसके सुचारु संचालन की योजना नहीं बन पायी। ऐसे में यह सेंटर विभाग व कर्मचारियों की मनमानी का शिकार हो गया। देखरेख के अभाव में सेंटर भवन इतना जर्जर हो चुका है, कि इसमें चिकित्सा व्यवस्था चल पाना असंभव है। खिड़की, दरवाजे, हैंडपंप आदि सब गायब हैं। विद्युत व्यवस्था भी यहां अब तक नहीं पहुंच सकी है।
महिला सिंगारी देवी, निशा व माया देवी का कहना है कि सरकार सिर्फ धन खर्च करके बिल्डिंग तैयार कर देती है, परंतु उसका लाभ दिलाने की तरफ ध्यान नहीं देती। मौजूदा समय में गांव की महिलाओं को दूर के अस्पतालों का चक्कर लगाना पड़ता है। सबसे ज्यादा मुश्किल प्रसव पीड़ित महिलाओं को होती है।
ग्रामीण संजय यादव, मनीराम व योगेश भी स्वास्थ्य विभाग के इस उपेक्षात्मक रवैये को लेकर आहत दिखे। कहा कि न तो भवन का कोई रखरखाव और न ही एएनएम की कोई सुध ली जाती है। वह महीने में कभी-कभार दिखाई पड़ती हैं। स्वास्थ्य विभाग को इस पर गंभीर होने की जरूरत है। एएनएम सुमित्रा देवी का कहना है कि भवन जर्जर हो चुका है। ऐसे में वहां चिकित्सा सेवा दे पाना संभव नहीं है। विभाग को अवगत कराया जा चुका है।
वर्जन
उच्चाधिकारियों को भेजी गई रिपोर्ट
आदमपुर में बना एएनएम सेंटर भवन जर्जर हो चुका है। इसकी रिपोर्ट विभागीय अधिकारियों को भेजी गई है। फिलहाल एएनएम को नियमित अपने क्षेत्र में भ्रमण करने व महिलाओं को बेहतर उपचार देने के निर्देश दिए हैं। इसका पालन भी कराया जाता है।
- डॉ. उदयचंद्र यादव, अधीक्षक सीएचसी जहांगीरगंज
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10 लाख से अधिक की लागत से बने इस भवन का लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में न सिर्फ संबंधित क्षेत्र की महिलाओं, युवतियों को उपचार के लिए दूर के अस्पतालों का चक्कर काटना पड़ता है, बल्कि सरकार द्वारा खर्च किए गए लाखों रुपये भी बर्बाद हो गए हैं। स्वास्थ्य महकमा सुध लेने की जरूरत नहीं समझ रहा। नतीजा यह है कि भवन अब खंडहर में तब्दील होकर रह गया।
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ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को बेहतर चिकित्सा सुविधा का लाभ दिलाने की मंशा से सरकार ने ऐनवां न्याय पंचायत के आदमपुर में एएनएम सेंटर की स्थापना की। इस सेंटर पर एक एएनएम व सहायिका की तैनाती की गई। सेंटर पर आवासीय सुविधा दी गई, जिससे महिलाओं को 24 घंटे चिकित्सा सेवा का लाभ मिल सके।
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लाखों रुपये खर्च कर सेंटर भवन का निर्माण हो गया और एएनएम की तैनाती भी हो गई। इस केंद्र से ऐनवां, आदमपुर, चरहिया, नसीरपुर, मूसेपुर सहित दो ग्राम पंचायत के कुल 12 गांवों की पांच हजार महिलाओं को इसका लाभ दिया जाना शुरू हुआ। इस केंद्र के निर्माण से ग्रामीणों में खुशी का माहौल था। खासकर महिलाओं में उम्मीद जगी कि अब प्राथमिक चिकित्सा व प्रसव आदि के लिए उन्हें दूर अस्पतालों का चक्कर नहीं काटना पड़ेगा। साथ ही चिकित्सीय परामर्श आदि में भी दिक्कत नहीं होगी।
शुरुआती दौर से ही इसके सुचारु संचालन की योजना नहीं बन पायी। ऐसे में यह सेंटर विभाग व कर्मचारियों की मनमानी का शिकार हो गया। देखरेख के अभाव में सेंटर भवन इतना जर्जर हो चुका है, कि इसमें चिकित्सा व्यवस्था चल पाना असंभव है। खिड़की, दरवाजे, हैंडपंप आदि सब गायब हैं। विद्युत व्यवस्था भी यहां अब तक नहीं पहुंच सकी है।
महिला सिंगारी देवी, निशा व माया देवी का कहना है कि सरकार सिर्फ धन खर्च करके बिल्डिंग तैयार कर देती है, परंतु उसका लाभ दिलाने की तरफ ध्यान नहीं देती। मौजूदा समय में गांव की महिलाओं को दूर के अस्पतालों का चक्कर लगाना पड़ता है। सबसे ज्यादा मुश्किल प्रसव पीड़ित महिलाओं को होती है।
ग्रामीण संजय यादव, मनीराम व योगेश भी स्वास्थ्य विभाग के इस उपेक्षात्मक रवैये को लेकर आहत दिखे। कहा कि न तो भवन का कोई रखरखाव और न ही एएनएम की कोई सुध ली जाती है। वह महीने में कभी-कभार दिखाई पड़ती हैं। स्वास्थ्य विभाग को इस पर गंभीर होने की जरूरत है। एएनएम सुमित्रा देवी का कहना है कि भवन जर्जर हो चुका है। ऐसे में वहां चिकित्सा सेवा दे पाना संभव नहीं है। विभाग को अवगत कराया जा चुका है।
वर्जन
उच्चाधिकारियों को भेजी गई रिपोर्ट
आदमपुर में बना एएनएम सेंटर भवन जर्जर हो चुका है। इसकी रिपोर्ट विभागीय अधिकारियों को भेजी गई है। फिलहाल एएनएम को नियमित अपने क्षेत्र में भ्रमण करने व महिलाओं को बेहतर उपचार देने के निर्देश दिए हैं। इसका पालन भी कराया जाता है।
- डॉ. उदयचंद्र यादव, अधीक्षक सीएचसी जहांगीरगंज