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मानक को दरकिनार कर जिले में जगह जगह स्थापित हैं मोबाइल टॉवर
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मानक को दरकिनार कर आबादी में संचालित हो रहे टॉवर
अंबेडकरनगर। नियम कानून को ताक पर रखकर जिले के विभिन्न क्षेत्रों में जगह जगह मोबाइल टॉवर की स्थापना कर दी गई है। जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में विभिन्न दूरसंचार कंपनियों के 35 टॉवर स्थापित हैं। इसके सापेक्ष 15 से अधिक टॉवर ऐसे हैं जो घनी आबादी में स्थापित हैं। नियम कानून को दरकिनार कर लगाए गए ऐसे टॉवर से निकलने वाली जहरीली विकिरण आमजन के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही हैं। इसकी शिकायत कई बार जिम्मेदार अधिकारियों से की गई, लेकिन इसे लेकर जिम्मेदार लोगों पर किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई।
जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में जगह जगह विभिन्न दूरसंचार कंपनियों के 35 टॉवर स्थापित हैं। इनमें से ज्यादातर टॉवरों को मानक की अनदेखी कर लगाया गया है। न सिर्फ घनी आबादी के बीच, बल्कि आवासीय भवनों की छत पर भी नियम कानून को दरकिनार कर लगा दिए गए हैं। जिला मुख्यालय पर ही फैजाबाद रोड, नई सड़क, बस स्टेशन क्षेत्र, पॉश कॉलोनियों में से एक इंद्रलोक कॉलोनी आदि क्षेत्रों में भी घनी आबादी व आवासीय भवनों पर ऐसे टॉवर लगा दिए गए हैं। मानक को दरकिनार कर लगाए गए ऐसे टॉवर से निकलने वाली जहरीली विकरणों का आमजनजीवन के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
बताते चलें कि ऐसे टॉवरों की स्थापना के लिए संबंधित कंपनियों के लखनऊ स्थित कार्यालय से लाइसेंस दिया जाता है, जबकि पर्यावरण एनओसी प्रमाणपत्र अयोध्या से दिया जाता है। बताया जाता है कि टॉवर लगाने वाले फर्जी दस्तावेज दिखाकर लाइसेंस ले लेते हैं। मानक की अनदेखी कर स्थापित किए गए ऐसे टॉवरों को हटाए जाने की शिकायत कई बार जिम्मेदार अधिकारियों से की गई, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका। नतीजा यह है कि इसका खामियाजा आमजन को भुगतना पड़ रहा है।
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शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
सम्मनपुर के संदीप वर्मा नाराजगी जताते हुए कहा कि जिले में जितने भी टॉवर लगे हैं, उनमें से ज्यादातर मानक की अनदेखी कर लगाए गए हैं। इसकी शिकायत कई बार जिम्मेदार अधिकारियों से की गई, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। कुर्कीबाजार के मनीष कमार व कोड़रा के रामअवतार ने कहा कि घनी आबादी में ही टॉवर की स्थापना कर दी गई है। इससे निकलने वाली जहरीली विकरण आमजन के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही हैं। इसके बावजूद इसे हटवाने को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। कृष्णानगर कॉलोनी निवासी आकाश वर्मा ने कहा कि जिला मुख्यालय पर ही ज्यादातर टॉवर मानक की अनदेखी कर लगाए गए हैं। इन्हें हटाए जाने की मांग समय समय पर की जाती है, लेकिन गंभीरता नहीं दिखाई जा रही।
यह हैं मानक
-घनी आबादी के बीच न हो
-सरकारी व आवासीय भवनों की छत पर न लगाया गया हो
-राष्ट्रीय राजमार्ग से 20 मीटर दूर हो
-अन्य मार्गों से 10 मीटर की दूरी पर हो
-ऐतिहासिक व पूजा स्थलों की छत पर न हो
यह है नुकसान
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. हैदर मेहदी ने बताया कि टॉवर से निकलने वाली जहरीली विकिरण से त्वचा संबंधित रोग होता है। त्वचा कैंसर की भी संभावना अधिक होती है। विकिरण से मानसिक बीमारियां होती हैं। इससे चिड़चिड़ापन बढ़ता है। नींद नहीं पूरी होती।
मानकों का रखा जाता है ध्यान
टॉवरों को मानक के अनुरूप लगाया गया है। यदि किसी प्रकार की शिकायत सामने आती है, तो उसकी जांच कराई जाती है। मानक के विपरीत पाए जाने पर उसे हटवाया भी जाता है। -गिरिजेश त्यागी, एडीएम
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अंबेडकरनगर। नियम कानून को ताक पर रखकर जिले के विभिन्न क्षेत्रों में जगह जगह मोबाइल टॉवर की स्थापना कर दी गई है। जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में विभिन्न दूरसंचार कंपनियों के 35 टॉवर स्थापित हैं। इसके सापेक्ष 15 से अधिक टॉवर ऐसे हैं जो घनी आबादी में स्थापित हैं। नियम कानून को दरकिनार कर लगाए गए ऐसे टॉवर से निकलने वाली जहरीली विकिरण आमजन के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही हैं। इसकी शिकायत कई बार जिम्मेदार अधिकारियों से की गई, लेकिन इसे लेकर जिम्मेदार लोगों पर किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई।
जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में जगह जगह विभिन्न दूरसंचार कंपनियों के 35 टॉवर स्थापित हैं। इनमें से ज्यादातर टॉवरों को मानक की अनदेखी कर लगाया गया है। न सिर्फ घनी आबादी के बीच, बल्कि आवासीय भवनों की छत पर भी नियम कानून को दरकिनार कर लगा दिए गए हैं। जिला मुख्यालय पर ही फैजाबाद रोड, नई सड़क, बस स्टेशन क्षेत्र, पॉश कॉलोनियों में से एक इंद्रलोक कॉलोनी आदि क्षेत्रों में भी घनी आबादी व आवासीय भवनों पर ऐसे टॉवर लगा दिए गए हैं। मानक को दरकिनार कर लगाए गए ऐसे टॉवर से निकलने वाली जहरीली विकरणों का आमजनजीवन के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
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बताते चलें कि ऐसे टॉवरों की स्थापना के लिए संबंधित कंपनियों के लखनऊ स्थित कार्यालय से लाइसेंस दिया जाता है, जबकि पर्यावरण एनओसी प्रमाणपत्र अयोध्या से दिया जाता है। बताया जाता है कि टॉवर लगाने वाले फर्जी दस्तावेज दिखाकर लाइसेंस ले लेते हैं। मानक की अनदेखी कर स्थापित किए गए ऐसे टॉवरों को हटाए जाने की शिकायत कई बार जिम्मेदार अधिकारियों से की गई, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका। नतीजा यह है कि इसका खामियाजा आमजन को भुगतना पड़ रहा है।
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शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
सम्मनपुर के संदीप वर्मा नाराजगी जताते हुए कहा कि जिले में जितने भी टॉवर लगे हैं, उनमें से ज्यादातर मानक की अनदेखी कर लगाए गए हैं। इसकी शिकायत कई बार जिम्मेदार अधिकारियों से की गई, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। कुर्कीबाजार के मनीष कमार व कोड़रा के रामअवतार ने कहा कि घनी आबादी में ही टॉवर की स्थापना कर दी गई है। इससे निकलने वाली जहरीली विकरण आमजन के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही हैं। इसके बावजूद इसे हटवाने को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। कृष्णानगर कॉलोनी निवासी आकाश वर्मा ने कहा कि जिला मुख्यालय पर ही ज्यादातर टॉवर मानक की अनदेखी कर लगाए गए हैं। इन्हें हटाए जाने की मांग समय समय पर की जाती है, लेकिन गंभीरता नहीं दिखाई जा रही।
यह हैं मानक
-घनी आबादी के बीच न हो
-सरकारी व आवासीय भवनों की छत पर न लगाया गया हो
-राष्ट्रीय राजमार्ग से 20 मीटर दूर हो
-अन्य मार्गों से 10 मीटर की दूरी पर हो
-ऐतिहासिक व पूजा स्थलों की छत पर न हो
यह है नुकसान
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. हैदर मेहदी ने बताया कि टॉवर से निकलने वाली जहरीली विकिरण से त्वचा संबंधित रोग होता है। त्वचा कैंसर की भी संभावना अधिक होती है। विकिरण से मानसिक बीमारियां होती हैं। इससे चिड़चिड़ापन बढ़ता है। नींद नहीं पूरी होती।
मानकों का रखा जाता है ध्यान
टॉवरों को मानक के अनुरूप लगाया गया है। यदि किसी प्रकार की शिकायत सामने आती है, तो उसकी जांच कराई जाती है। मानक के विपरीत पाए जाने पर उसे हटवाया भी जाता है। -गिरिजेश त्यागी, एडीएम