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प्रबोधिनी एकादशी आज, श्रद्घालुओं के आस्था का गवाह बनेगा श्रवणधाम
Updated Mon, 19 Nov 2018 12:06 AM IST
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अंबेडकरनगर। प्रबोधनी एकादशी के मौके पर श्रवणक्षेत्र धाम से मंगलवार भोर में सप्तकोशी परिक्रमा का आयोजन होगा। प्रशासनिक उदासीनता के बीच बड़ी संख्या में श्रद्धालु संगम तट पर पहुंचकर स्नान पूजन करेंगे। इसके बाद परिक्रमा की शुरुआत करेंगे। विभिन्न मार्गों से होते हुए परिक्रमार्थी अकबरपुर मुख्यालय पहुंचेंगे। यहां से पहितीपुर मार्ग से होते हुए वापस पवित्र धाम जाएंगे।
उधर बड़ी तादाद में लोग प्रबोधिनी एकादशी के दिन व्रत रखने के साथ ही जगह जगह पूजन अर्चन का भी आयोजन करेंगे। शाम के समय जहां लोग गन्ना चूसने की परंपरा का निर्वहन करेंगे, वहीं अगली सुबह दरिद्र को खदेड़ने की परंपरा भी निभायी जाएगी।
अव्यवस्थाओं के बीच इस बार भी अकबरपुर तहसील क्षेत्र के श्रवणक्षेत्र धाम से श्रद्धालुओं को परिक्रमा करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। दशकों से प्रबोधिनी एकादशी के मौके पर श्रवणक्षेत्र धाम से सप्तकोशी परिक्रमा का आयोजन होता आ रहा है। प्रशासनिक उदासीनता के बीच एक बार फिर श्रवणधाम श्रद्धालुओं की आस्था का गवाह बनेगा।
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इस सप्तकोशी परिक्रमा में न सिर्फ जिले के श्रद्धालु पहुंचते हैं, बल्कि पड़ोसी जनपद फैजाबाद, सुल्तानपुर व आजमगढ़ के भी श्रद्धालु आते हैं। इसके बावजूद उपेक्षा का आलम यह है कि मड़हा व विसुई नदी का संगम होने के बावजूद यहां पानी लगभग नदारद है। घाट पर चारों तरफ गंदगी फैली है। ऐसे में यहां आने वाले श्रद्धालुओं को हैंडपंपों पर ही स्नान करना पड़ेगा।
अधिकांश श्रद्धालु तो घरों से ही स्नान कर पहुंचते हैं। पर्यटन स्थल का दर्जा मिलने के बावजूद धाम की उपेक्षा बरकरार है। इससे क्षेत्र के लोगों में नाराजगी का भी माहौल है। लोगों का कहना है कि प्रशासन को इस तरफ गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। वर्ष में दो बार श्रवणधाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटती है। पौराणिक स्थलों में श्रवण क्षेत्र का नाम प्रमुखता से है।
गन्ने से सूप पीटने की परंपरा का होगा निर्वहन
प्रबोधिनी एकादशी के मौके पर घरों में पूजन-अर्चन का भी आयोजन होगा। बड़ी संख्या में लोग व्रत भी रखते हैं। ऐसे में मान्यता है कि प्रबोधिनी एकादशी पर कथा सुनने से पापों का प्रायश्चित होता है। ऐसे में लोग सत्यनरायण कथा भी सुनेंगे। यही नहीं पूजन-अर्चन के बाद देर शाम को गन्ना चूसने की परंपरा का निर्वहन होगा। इसके अलावा अगली सुबह गन्ने से सूप को पीटते हुए ईश्वर को आमंत्रित करने व दरिद्रता को भगाने की परंपरा का निर्वहन होगा। शहर से लेकर गांव तक में इस परंपरा का निर्वहन पूरी आस्था के साथ होता है। मान्यता है कि ऐसा करने से घर व समाज में खुशहाली आती है।
किए गए जरूरी इंतजाम
परिक्रमा को देेखते हुए इंतजाम किए गए हैं। ग्राम पंचायत ने तैयारी की है, जबकि प्रशासन भी लगातार सजग रहेगा। किसी श्रद्धालु को कोई दिक्कत नही होने दी जाएगी।
- गिरिजेश त्यागी, एडीएम
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उधर बड़ी तादाद में लोग प्रबोधिनी एकादशी के दिन व्रत रखने के साथ ही जगह जगह पूजन अर्चन का भी आयोजन करेंगे। शाम के समय जहां लोग गन्ना चूसने की परंपरा का निर्वहन करेंगे, वहीं अगली सुबह दरिद्र को खदेड़ने की परंपरा भी निभायी जाएगी।
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अव्यवस्थाओं के बीच इस बार भी अकबरपुर तहसील क्षेत्र के श्रवणक्षेत्र धाम से श्रद्धालुओं को परिक्रमा करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। दशकों से प्रबोधिनी एकादशी के मौके पर श्रवणक्षेत्र धाम से सप्तकोशी परिक्रमा का आयोजन होता आ रहा है। प्रशासनिक उदासीनता के बीच एक बार फिर श्रवणधाम श्रद्धालुओं की आस्था का गवाह बनेगा।
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इस सप्तकोशी परिक्रमा में न सिर्फ जिले के श्रद्धालु पहुंचते हैं, बल्कि पड़ोसी जनपद फैजाबाद, सुल्तानपुर व आजमगढ़ के भी श्रद्धालु आते हैं। इसके बावजूद उपेक्षा का आलम यह है कि मड़हा व विसुई नदी का संगम होने के बावजूद यहां पानी लगभग नदारद है। घाट पर चारों तरफ गंदगी फैली है। ऐसे में यहां आने वाले श्रद्धालुओं को हैंडपंपों पर ही स्नान करना पड़ेगा।
अधिकांश श्रद्धालु तो घरों से ही स्नान कर पहुंचते हैं। पर्यटन स्थल का दर्जा मिलने के बावजूद धाम की उपेक्षा बरकरार है। इससे क्षेत्र के लोगों में नाराजगी का भी माहौल है। लोगों का कहना है कि प्रशासन को इस तरफ गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। वर्ष में दो बार श्रवणधाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटती है। पौराणिक स्थलों में श्रवण क्षेत्र का नाम प्रमुखता से है।
गन्ने से सूप पीटने की परंपरा का होगा निर्वहन
प्रबोधिनी एकादशी के मौके पर घरों में पूजन-अर्चन का भी आयोजन होगा। बड़ी संख्या में लोग व्रत भी रखते हैं। ऐसे में मान्यता है कि प्रबोधिनी एकादशी पर कथा सुनने से पापों का प्रायश्चित होता है। ऐसे में लोग सत्यनरायण कथा भी सुनेंगे। यही नहीं पूजन-अर्चन के बाद देर शाम को गन्ना चूसने की परंपरा का निर्वहन होगा। इसके अलावा अगली सुबह गन्ने से सूप को पीटते हुए ईश्वर को आमंत्रित करने व दरिद्रता को भगाने की परंपरा का निर्वहन होगा। शहर से लेकर गांव तक में इस परंपरा का निर्वहन पूरी आस्था के साथ होता है। मान्यता है कि ऐसा करने से घर व समाज में खुशहाली आती है।
किए गए जरूरी इंतजाम
परिक्रमा को देेखते हुए इंतजाम किए गए हैं। ग्राम पंचायत ने तैयारी की है, जबकि प्रशासन भी लगातार सजग रहेगा। किसी श्रद्धालु को कोई दिक्कत नही होने दी जाएगी।
- गिरिजेश त्यागी, एडीएम