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बेहतर समाज के लिए बच्चों को अच्छी तालीम की जरूरत
Updated Tue, 16 Oct 2018 10:48 PM IST
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अंबेडकरनगर। इल्म एक ऐसी पूंजी है, जिसे जितना भी खर्च किया जाए, उसमें उतनी ही अधिक वृद्धि होती है। ऐसे में हम सभी की जिम्मेदारी है कि न सिर्फ खुद व अपने बच्चों को बेहतर तालीम दें, बल्कि ऐसे बच्चों को भी आगे बढ़ने में मदद करें, जो आर्थिक मजबूरी के चलते नहीं पढ़ पा रहे हैं। यह बातें मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना सै. शुजा हैदर जैदी ने कहीं।
मीरानपुर मोहल्ला स्थित दिलबर हुसैन के आवास पर मंगलवार को आयोजित मजलिस में मौलाना शुजा हैदर ने कहा कि किसी भी समाज व देश का विकास तभी संभव है, जब उसमें शत-प्रतिशत साक्षरता हो। ऐसे में हम सभी को चाहिए कि अपने बच्चों को दीनी व दुनियावी तालीम दोनों दिलाएं।
दुनियावी तालीम से रोजगार मिलता है, जबकि दीनी तालीम से न सिर्फ अच्छे संस्कार आते हैं, बल्कि मौत के बाद भी यह तालीम काम आती है। कहा कि जब बच्चा पैदा होता है, तो उसके कान में अजान दी जाती है। जब इंसान मर जाता है, तो कब्र में लिटाकर दुआ पढ़ी जाती है, जिसके माध्यम से उसे तालीम दी जाती है। इससे यह साफ होता है कि इल्म हासिल करने का कोई समय निर्धारित नहीं होता है।
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मौलाना जैदी ने कहा कि इमाम हुसैन जब छोटे थे, तभी उन्हें जानकारी हो गई थी कि कर्बला में क्या होने वाला है। उनकी व उनके 72 साथियों की शहादत कैसे होगी, इसकी जानकारी उन्हें थी। इसके बावजूद इस्लाम को बचाने के लिए उन्होंने कर्बला पहुंचकर अपने खून से इस्लाम व इंसानियत को कयामत तक इस्लाम को जिंदा कर दिया। इस मौके पर आरिफ अनवर, डॉ. आमिर अब्बास, यासिर हुसैन, रेहान जैदी, रजा अनवर, मुमताज हुसैन आदि मौजूद रहे।
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मीरानपुर मोहल्ला स्थित दिलबर हुसैन के आवास पर मंगलवार को आयोजित मजलिस में मौलाना शुजा हैदर ने कहा कि किसी भी समाज व देश का विकास तभी संभव है, जब उसमें शत-प्रतिशत साक्षरता हो। ऐसे में हम सभी को चाहिए कि अपने बच्चों को दीनी व दुनियावी तालीम दोनों दिलाएं।
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दुनियावी तालीम से रोजगार मिलता है, जबकि दीनी तालीम से न सिर्फ अच्छे संस्कार आते हैं, बल्कि मौत के बाद भी यह तालीम काम आती है। कहा कि जब बच्चा पैदा होता है, तो उसके कान में अजान दी जाती है। जब इंसान मर जाता है, तो कब्र में लिटाकर दुआ पढ़ी जाती है, जिसके माध्यम से उसे तालीम दी जाती है। इससे यह साफ होता है कि इल्म हासिल करने का कोई समय निर्धारित नहीं होता है।
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मौलाना जैदी ने कहा कि इमाम हुसैन जब छोटे थे, तभी उन्हें जानकारी हो गई थी कि कर्बला में क्या होने वाला है। उनकी व उनके 72 साथियों की शहादत कैसे होगी, इसकी जानकारी उन्हें थी। इसके बावजूद इस्लाम को बचाने के लिए उन्होंने कर्बला पहुंचकर अपने खून से इस्लाम व इंसानियत को कयामत तक इस्लाम को जिंदा कर दिया। इस मौके पर आरिफ अनवर, डॉ. आमिर अब्बास, यासिर हुसैन, रेहान जैदी, रजा अनवर, मुमताज हुसैन आदि मौजूद रहे।