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यूरिया खाद की कमीं से बढ़ी किसानों की मुश्किल
Updated Fri, 08 Dec 2017 10:46 PM IST
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जरूरत की आधी ही आई यूरिया, मुश्किल में काश्तकार
अंबेडकरनगर। जरूरत के समय जिले में किसानों के सामने यूरिया का संकट खड़ा हो गया है। काश्तकारों को जनवरी तक 29 हजार 276 मीट्रिक टन यूरिया की जरूरत है लेकिन अब तक केवल 14 हजार 773 एमटी ही खाद उपलब्ध हो सकी है।
जिले में 14 हजार 503 एमटी यूरिया की कमी रबी की फसलों पर भारी पड़ेगी। फसल की बोआई कर चुके किसानों को समय पर यूरिया के लिए भटकना पड़ सकता है। करीब एक माह पूर्व प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किसानों को फसलों की बोआई के समय पर्याप्त मात्रा में खाद सभी जिलों में उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। सीएम के निर्देशों का जनपद में असर नहीं दिख रहा है।
मौजूदा समय में रबी फसल के तहत गेहूं, सरसों, मटर, चना, मसूर, आलू की बोआई का काम पूरी होने चुका है। कुछ ही काश्तकार बोआई के लिए शेष हैं। अब फसलों सिंचाई के बाद गेहूं, सरसों आदि की टॉपड्रेसिंग के लिए किसानों को यूरिया की आवश्यकता होगी। इसी दौरान यूरिया की कमीं किसानों पर भारी पड़ने के पूरे आसार दिख रहे हैं। क्योंकि जनपद की कई समितियों पर खाद ही नहीं है।
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कुछ समितियों पर खाद उपलब्ध तो है, लेकिन उसकी मात्रा कम है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार जनवरी तक जिले को 29 हजार 276 मीट्रिक टन यूरिया खाद उपलब्ध कराए जाने का लक्ष्य है। इसके बावजूद अब तक मात्र 14 हजार 773 मीट्रिक टन ही उपलब्ध हो सकी है। ऐसे में जिले को अभी तक 14 हजार 503 मीट्रिक टन यूरिया की कमी है।
जरूरत के समय खाद की खेप जिले में नहीं पहुंची, तो किसानों को काफी मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है। दरअसल समितियों पर यूरिया खाद 330 रुपये में मिलती है, जबकि निजी विक्रेता 370 से 380 रुपये प्रति बोरी में बेच रहे हैं। खाद की कमी की स्थिति में निजी विक्रेता दाम और भी बढ़ देते हैं।
जिला कृषि अधिकारी धर्मराज सिंह के मुताबिक जिले में यूरिया की कमीं नहीं होने दी जाएगी। एक रैक यूरिया शीघ्र ही जिले में पहुंच जाएगी। इसमें 1200 मीट्रिक टन यूरिया जनपद को उपलब्ध हो जाएगी। डीएपी, एनपीके व एमओपी लक्ष्य से अधिक उपलब्ध है। किसानों को परेशान होने की आवश्यकता नहीं है।
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अंबेडकरनगर। जरूरत के समय जिले में किसानों के सामने यूरिया का संकट खड़ा हो गया है। काश्तकारों को जनवरी तक 29 हजार 276 मीट्रिक टन यूरिया की जरूरत है लेकिन अब तक केवल 14 हजार 773 एमटी ही खाद उपलब्ध हो सकी है।
जिले में 14 हजार 503 एमटी यूरिया की कमी रबी की फसलों पर भारी पड़ेगी। फसल की बोआई कर चुके किसानों को समय पर यूरिया के लिए भटकना पड़ सकता है। करीब एक माह पूर्व प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किसानों को फसलों की बोआई के समय पर्याप्त मात्रा में खाद सभी जिलों में उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। सीएम के निर्देशों का जनपद में असर नहीं दिख रहा है।
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मौजूदा समय में रबी फसल के तहत गेहूं, सरसों, मटर, चना, मसूर, आलू की बोआई का काम पूरी होने चुका है। कुछ ही काश्तकार बोआई के लिए शेष हैं। अब फसलों सिंचाई के बाद गेहूं, सरसों आदि की टॉपड्रेसिंग के लिए किसानों को यूरिया की आवश्यकता होगी। इसी दौरान यूरिया की कमीं किसानों पर भारी पड़ने के पूरे आसार दिख रहे हैं। क्योंकि जनपद की कई समितियों पर खाद ही नहीं है।
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कुछ समितियों पर खाद उपलब्ध तो है, लेकिन उसकी मात्रा कम है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार जनवरी तक जिले को 29 हजार 276 मीट्रिक टन यूरिया खाद उपलब्ध कराए जाने का लक्ष्य है। इसके बावजूद अब तक मात्र 14 हजार 773 मीट्रिक टन ही उपलब्ध हो सकी है। ऐसे में जिले को अभी तक 14 हजार 503 मीट्रिक टन यूरिया की कमी है।
जरूरत के समय खाद की खेप जिले में नहीं पहुंची, तो किसानों को काफी मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है। दरअसल समितियों पर यूरिया खाद 330 रुपये में मिलती है, जबकि निजी विक्रेता 370 से 380 रुपये प्रति बोरी में बेच रहे हैं। खाद की कमी की स्थिति में निजी विक्रेता दाम और भी बढ़ देते हैं।
जिला कृषि अधिकारी धर्मराज सिंह के मुताबिक जिले में यूरिया की कमीं नहीं होने दी जाएगी। एक रैक यूरिया शीघ्र ही जिले में पहुंच जाएगी। इसमें 1200 मीट्रिक टन यूरिया जनपद को उपलब्ध हो जाएगी। डीएपी, एनपीके व एमओपी लक्ष्य से अधिक उपलब्ध है। किसानों को परेशान होने की आवश्यकता नहीं है।