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किसानों को मिला सरसों की बेहतर खेती का टिप्स
Updated Sat, 14 Oct 2017 11:31 PM IST
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किसानों को मिले सरसों की बेहतर खेती के टिप्स
अंबेडकरनगर। कृषि विज्ञान केंद्र पांती के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. रवि प्रकाश मौर्य ने सरसों की खेती करने वाले किसानों को कई टिप्स दिए। उन्होंने सरसों की कई उन्नत प्रजातियों के बारे में भी बताया। डॉ. रवि प्रकाश मौर्य ने किसानों को टिप्स देते हुए कहा कि बोआई से पहले मिट्टी पलटने वाले हल से खेत की जोताई कर लें।
इसके बाद पाटा लगाकर मिट्टी को भुरभुरा बना लें। यदि खेत में नमी की कमी है तो पलेवा करके उसे तैयार करना चाहिए। इसके बाद रोटावेटर से जोताई करनी चाहिए ताकि भूमि अच्छी तरह तैयार हो जाए।
उन्होंने सरसों की बोआई के बारे में बताते हुए कहा कि अक्तूबर का पहला पखवाड़ा सरसों की बोवाई के लिए सबसे उचित होता है। किसी भी दशा में बोआई 20 अक्तूबर तक कर लेनी चाहिए। उन्होंने किसानों को सरसों के कुछ उन्नत प्रजातियों के बारे में भी जानकारी दी।
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उन्होंने सरसों की बोआई के तरीकों की भी किसानों को जानकारी दी। बताया कि बोआई लाइन से लाइन 45 सेेंटीमीटर की दूरी होनी चाहिए तथा बीज की दूरी 15 सेंटीमीटर पर गहरे कूड़ों में करें। बोआई के समय 120 किलोग्राम नाइट्रोजन, 60 किलोग्राम फास्फोरस व 60 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करें।
पहली सिंचाई बोआई के 25 से 30 दिन बाद करनी चाहिए। इसके बाद 132 किलोग्राम यूरिया डालें। यदि पौधे घने हों तो कुछ पौधों को निकालकर उनकी दूरी 15 सेंटीमीटर कर देना आवश्यक है। खर-पतवार नष्ट करने के लिए निराई-गुड़ाई करना जरूरी है।
नमी की कमी हो तो फूल आने के समय तथा दाना भरने की अवस्था में सिंचाई करनी चाहिए, इससे उपज अच्छी होती है। यदि फसल पर आरा मक्खी का प्रकोप दिखे तो इसकी रोकथाम के लिए एक सूडी प्रति पौधा दिखाई देने पर मैलाथियान पांच प्रतिशत व 25 किलोग्राम धूल प्रति हेक्टेयर की दर से डालना चाहिए।
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अंबेडकरनगर। कृषि विज्ञान केंद्र पांती के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. रवि प्रकाश मौर्य ने सरसों की खेती करने वाले किसानों को कई टिप्स दिए। उन्होंने सरसों की कई उन्नत प्रजातियों के बारे में भी बताया। डॉ. रवि प्रकाश मौर्य ने किसानों को टिप्स देते हुए कहा कि बोआई से पहले मिट्टी पलटने वाले हल से खेत की जोताई कर लें।
इसके बाद पाटा लगाकर मिट्टी को भुरभुरा बना लें। यदि खेत में नमी की कमी है तो पलेवा करके उसे तैयार करना चाहिए। इसके बाद रोटावेटर से जोताई करनी चाहिए ताकि भूमि अच्छी तरह तैयार हो जाए।
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उन्होंने सरसों की बोआई के बारे में बताते हुए कहा कि अक्तूबर का पहला पखवाड़ा सरसों की बोवाई के लिए सबसे उचित होता है। किसी भी दशा में बोआई 20 अक्तूबर तक कर लेनी चाहिए। उन्होंने किसानों को सरसों के कुछ उन्नत प्रजातियों के बारे में भी जानकारी दी।
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उन्होंने सरसों की बोआई के तरीकों की भी किसानों को जानकारी दी। बताया कि बोआई लाइन से लाइन 45 सेेंटीमीटर की दूरी होनी चाहिए तथा बीज की दूरी 15 सेंटीमीटर पर गहरे कूड़ों में करें। बोआई के समय 120 किलोग्राम नाइट्रोजन, 60 किलोग्राम फास्फोरस व 60 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करें।
पहली सिंचाई बोआई के 25 से 30 दिन बाद करनी चाहिए। इसके बाद 132 किलोग्राम यूरिया डालें। यदि पौधे घने हों तो कुछ पौधों को निकालकर उनकी दूरी 15 सेंटीमीटर कर देना आवश्यक है। खर-पतवार नष्ट करने के लिए निराई-गुड़ाई करना जरूरी है।
नमी की कमी हो तो फूल आने के समय तथा दाना भरने की अवस्था में सिंचाई करनी चाहिए, इससे उपज अच्छी होती है। यदि फसल पर आरा मक्खी का प्रकोप दिखे तो इसकी रोकथाम के लिए एक सूडी प्रति पौधा दिखाई देने पर मैलाथियान पांच प्रतिशत व 25 किलोग्राम धूल प्रति हेक्टेयर की दर से डालना चाहिए।