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तालाब व कुएं में फेंकी मिली लाखों रुपए की सरकारी दवाएं
Updated Fri, 13 Oct 2017 11:32 PM IST
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सरकारी अस्पतालों की तमाम दवाएं तालाब व कुएं में फेंकीं
अंबेडकरनगर। सरकारी अस्पतालों में सप्लाई की जाने वाली तमाम दवाओं के इस्तेमाल की मियाद समाप्त होने के बाद उन्हें अहिरौली क्षेत्र में तालाब और कुएं में फेंक दिया गया। उनमें ज्यादातर दवाएं बच्चों के उपचार से संबंधित हैं। भारी मात्रा में दवाएं पड़ी देख ग्रामीणों ने ग्रामीणों ने डीएम अखिलेश सिंह को सूचना दी।
इसके बाद मौके पर पहुंचे कटेहरी सीएचसी प्रभारी की टीम का ग्रामीणों ने दवाएं ले जाने का विरोध किया। फोन पर सीएमओ के समझाने पर ग्रामीणों ने टीम को टीम नमूने के लिए सीरप की कुछ शीशियां जांच के लिए ले जाने दीं। यह दवाएं क्षेत्र के भरथुआ गांव में मिलीं हैं।
जानकारी के मुताबिक शुक्रवार सुबह ग्रामीण गांव के बाहर स्थित इंटर कॉलेज के पीछे पहुंचे तो उन्हें वहां के पोखरे में बड़ी संख्या में फेरस सल्फेट एण्ड फोलिक एसिड सीरप की शीशी व कई अन्य दवाएं पड़ी दिखी। ग्रामीणों ने उत्सुकता बस निकट स्थित एक कुएं में झांका तो वहां भी भारी मात्रा में दवाएं पड़ी थीं। यह देख ग्रामीण सन्न रह गए।
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यह सूचना गांव पहुंची तो तमाम ग्रामीण वहां पर एकत्र हो गए। ग्रामीणों ने मामले की जानकारी डीएम अखिलेश सिंह को दी। डीएम के निर्देश पर कटेहरी सीएचसी के प्रभारी डॉ. मुकेश कुमार टीम के साथ गांव पहुंचे। टीम ने पोखर में पड़ी दवा की शीशियों को एकत्र करने की कोशिश की, लेकिन ग्रामीणों ने विरोध कर दिया।
ग्रामीण अजय पटेल, शिवमूरत वर्मा, अमित कुमार आदि का कहना था कि मरीजों में वितरित की जाने वाली दवाएं पोखर व कुएं में फेंक दी गईं। उन्होंने कहा कि जब तक डीएम या सीएमओ मौके पर नहीं आते, तब तक दवाओं को नहीं ले जाने देंगे। इस पर सीएचसी प्रभारी ने ग्रामीणों की सीएमओ से मोबाइल फोन पर बात कराई।
सीएमओ ने कहा कि नमूने के लिए कुछ दवाएं टीम को ले जाने दें। जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद टीम ने पोखर व कुएं से कुछ दवाएं बाहर निकालीं तो पता चला कि सरकारी अस्पताल में सप्लाई की जाने वाली सभी दवाएं एक्सपायरी डेट की हैं। माना जा रहा कि भारी तादाद में दवाओं के एक्सपायर हो जाने के चलते उन्हें तालाब व कुएं में फेंक दिया गया।
जांच को भेजे गए दवा के नमूने
पोखरा व कुएं में मिली दवाओं में कुछ शीशियों को नमूने के तौर पर टीम ने लिया और उन्हें जांच के लिए भेजा गया है। दवाएं एक्सपायरी डेट की थीं। ग्रामीणों के विरोध के चलते सभी दवाएं गांव से नहीं लाई जा सकी हैं। मामले की गहन जांच होगी।
-डॉ. कृष्ण गोपाल सिंह, सीएमओ
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अंबेडकरनगर। सरकारी अस्पतालों में सप्लाई की जाने वाली तमाम दवाओं के इस्तेमाल की मियाद समाप्त होने के बाद उन्हें अहिरौली क्षेत्र में तालाब और कुएं में फेंक दिया गया। उनमें ज्यादातर दवाएं बच्चों के उपचार से संबंधित हैं। भारी मात्रा में दवाएं पड़ी देख ग्रामीणों ने ग्रामीणों ने डीएम अखिलेश सिंह को सूचना दी।
इसके बाद मौके पर पहुंचे कटेहरी सीएचसी प्रभारी की टीम का ग्रामीणों ने दवाएं ले जाने का विरोध किया। फोन पर सीएमओ के समझाने पर ग्रामीणों ने टीम को टीम नमूने के लिए सीरप की कुछ शीशियां जांच के लिए ले जाने दीं। यह दवाएं क्षेत्र के भरथुआ गांव में मिलीं हैं।
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जानकारी के मुताबिक शुक्रवार सुबह ग्रामीण गांव के बाहर स्थित इंटर कॉलेज के पीछे पहुंचे तो उन्हें वहां के पोखरे में बड़ी संख्या में फेरस सल्फेट एण्ड फोलिक एसिड सीरप की शीशी व कई अन्य दवाएं पड़ी दिखी। ग्रामीणों ने उत्सुकता बस निकट स्थित एक कुएं में झांका तो वहां भी भारी मात्रा में दवाएं पड़ी थीं। यह देख ग्रामीण सन्न रह गए।
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यह सूचना गांव पहुंची तो तमाम ग्रामीण वहां पर एकत्र हो गए। ग्रामीणों ने मामले की जानकारी डीएम अखिलेश सिंह को दी। डीएम के निर्देश पर कटेहरी सीएचसी के प्रभारी डॉ. मुकेश कुमार टीम के साथ गांव पहुंचे। टीम ने पोखर में पड़ी दवा की शीशियों को एकत्र करने की कोशिश की, लेकिन ग्रामीणों ने विरोध कर दिया।
ग्रामीण अजय पटेल, शिवमूरत वर्मा, अमित कुमार आदि का कहना था कि मरीजों में वितरित की जाने वाली दवाएं पोखर व कुएं में फेंक दी गईं। उन्होंने कहा कि जब तक डीएम या सीएमओ मौके पर नहीं आते, तब तक दवाओं को नहीं ले जाने देंगे। इस पर सीएचसी प्रभारी ने ग्रामीणों की सीएमओ से मोबाइल फोन पर बात कराई।
सीएमओ ने कहा कि नमूने के लिए कुछ दवाएं टीम को ले जाने दें। जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद टीम ने पोखर व कुएं से कुछ दवाएं बाहर निकालीं तो पता चला कि सरकारी अस्पताल में सप्लाई की जाने वाली सभी दवाएं एक्सपायरी डेट की हैं। माना जा रहा कि भारी तादाद में दवाओं के एक्सपायर हो जाने के चलते उन्हें तालाब व कुएं में फेंक दिया गया।
जांच को भेजे गए दवा के नमूने
पोखरा व कुएं में मिली दवाओं में कुछ शीशियों को नमूने के तौर पर टीम ने लिया और उन्हें जांच के लिए भेजा गया है। दवाएं एक्सपायरी डेट की थीं। ग्रामीणों के विरोध के चलते सभी दवाएं गांव से नहीं लाई जा सकी हैं। मामले की गहन जांच होगी।
-डॉ. कृष्ण गोपाल सिंह, सीएमओ