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बाढ़ से निपटने की तैयारियां शिथिल, क्षतिग्रस्त पड़े चार ठोकर
Updated Tue, 04 Jul 2017 11:47 PM IST
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बाढ़ से निपटने की तैयारियां धीमी
अमर उजाला ब्यूरो
अंबेडकरनगर। नदियों के उफनाने की आशंका के बीच बाढ़ की तैयारियां जिले में गति नहीं पकड़ पा रही हैं। टांडा तहसील में सरयू नदी पर बना चार ठोकर क्षतिग्रस्त पड़ा है, तो वहीं एक स्टीमर भी लंबे समय से खराब पड़ा है। हालांकि प्रशासन ने 34 विद्यालयों को बाढ़ चौकी के रूप में चिह्नित करने के साथ ही 32 निजी नाव को भी अनुबंधित कर लिया है, जिससे समय रहते आवश्यक मदद पहुंचाई जा सके। लगभग 12 हजार लीटर केरोसिन, डीजल व पेट्रोल भी सुरक्षित रखने का दावा प्रशासन ने किया है।
गौरतलब है कि मानसून दस्तक दे चुका है। बारिश का दौर तेज हो गया है। ऐसे में सरयू नदी में बाढ़ की आशंका देखते हुए बाढ़ प्रभावित क्षेत्र टांडा व आलापुर तहसील के माझा क्षेत्रों में बाढ़ से बचाव को लेकर बाढ़ प्रखंड की तैयारियां गति पकड़ती नहीं दिख रही हैं। टांडा तहसील क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र माझा उलटहवा, करमपुर बरसावां, अवसानपुर, माझा छज्जापुर, माझा चिंतौरा, माझा रसूलपुर मुबारकरपुर, माझा कला व माझा केवटला क्षेत्र के घाटों में नौ ठोकर पूर्व में कटान रोकने के लिए बनाई गई थीं। इनकी देखरेख का जिम्मा बाढ़ प्रखंड के पास है। लापरवाही के चलते ही इनमें से चार ठोकर लंबे समय से क्षतिग्रस्त हैं। इन्हें दुरुस्त कराने की सुध संबंधित विभाग को नहीं है। इस बीच बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए सरकारी नाव नहीं होने के चलते प्रशासन ने 32 निजी नाव को अनुबंधित किया है। साथ ही 34 विद्यालयों को बाढ़ चौकी के रूप में चिह्नित किया गया है।
इसके अलावा बाढ़ प्रभावितों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए प्रशासन ने पांच हजार लीटर डीजल, तीन हजार लीटर पेट्रोल व चार हजार लीटर मिट्टी का तेल सुरक्षित रखने का दावा किया है। इन सबसे इतर बाढ़ से निपटने को लेकर संबंधित विभाग दावा तो बढ़-चढ़कर करता है, लेकिन जब बाढ़ आती है, तो उसकी तैयारियों की पोल खुल जाती है। गत वर्ष सरयू नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया था। इससे माझा क्षेत्र के लोगों को व्यापक समस्या का सामना करना पड़ा था।
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खराब पड़ा स्टीमर
बाढ़ प्रभावितों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए लगभग पांच वर्ष पहले टांडा में स्टीमर मंगवाया गया था। कुछ दिन चलने के बाद वह खराब हो गया। इसके बाद उसे ठीक कराने की सुध नहीं है। लंबे समय से खराब पड़ा स्टीमर तहसील परिसर में पड़ा धूल फांक रहा है। इसे ठीक कराने की मांग के बावजूद संबंधित अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है।
बाढ़ से निपटने के हो रहे व्यापक इंतजाम
एडीएम गिरिजेश त्यागी का कहना है कि, संभावित बाढ़ से निपटने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। 34 बाढ़ चौकियां चिह्नित की जा चुकी हैं। कोटेदारों को राशन तथा पेट्रोल पंपों को डीजल, पेट्रोल व केरोसिन रिजर्व रखने के लिए निर्देशित किया गया है। बाढ़ चौकियों पर लेखपालों व अन्य कर्मचारियों की तैनाती कर दी गई है। गत वर्ष बाढ़ से निपटने के लिए 25 लाख रुपये शासन से उपलब्ध हुए थे। बाढ़ नहीं आने पर उसे लौट दिया गया था। इस वर्ष 50 लाख रुपये की मांग शासन से की गई है।
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबेडकरनगर। नदियों के उफनाने की आशंका के बीच बाढ़ की तैयारियां जिले में गति नहीं पकड़ पा रही हैं। टांडा तहसील में सरयू नदी पर बना चार ठोकर क्षतिग्रस्त पड़ा है, तो वहीं एक स्टीमर भी लंबे समय से खराब पड़ा है। हालांकि प्रशासन ने 34 विद्यालयों को बाढ़ चौकी के रूप में चिह्नित करने के साथ ही 32 निजी नाव को भी अनुबंधित कर लिया है, जिससे समय रहते आवश्यक मदद पहुंचाई जा सके। लगभग 12 हजार लीटर केरोसिन, डीजल व पेट्रोल भी सुरक्षित रखने का दावा प्रशासन ने किया है।
गौरतलब है कि मानसून दस्तक दे चुका है। बारिश का दौर तेज हो गया है। ऐसे में सरयू नदी में बाढ़ की आशंका देखते हुए बाढ़ प्रभावित क्षेत्र टांडा व आलापुर तहसील के माझा क्षेत्रों में बाढ़ से बचाव को लेकर बाढ़ प्रखंड की तैयारियां गति पकड़ती नहीं दिख रही हैं। टांडा तहसील क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र माझा उलटहवा, करमपुर बरसावां, अवसानपुर, माझा छज्जापुर, माझा चिंतौरा, माझा रसूलपुर मुबारकरपुर, माझा कला व माझा केवटला क्षेत्र के घाटों में नौ ठोकर पूर्व में कटान रोकने के लिए बनाई गई थीं। इनकी देखरेख का जिम्मा बाढ़ प्रखंड के पास है। लापरवाही के चलते ही इनमें से चार ठोकर लंबे समय से क्षतिग्रस्त हैं। इन्हें दुरुस्त कराने की सुध संबंधित विभाग को नहीं है। इस बीच बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए सरकारी नाव नहीं होने के चलते प्रशासन ने 32 निजी नाव को अनुबंधित किया है। साथ ही 34 विद्यालयों को बाढ़ चौकी के रूप में चिह्नित किया गया है।
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इसके अलावा बाढ़ प्रभावितों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए प्रशासन ने पांच हजार लीटर डीजल, तीन हजार लीटर पेट्रोल व चार हजार लीटर मिट्टी का तेल सुरक्षित रखने का दावा किया है। इन सबसे इतर बाढ़ से निपटने को लेकर संबंधित विभाग दावा तो बढ़-चढ़कर करता है, लेकिन जब बाढ़ आती है, तो उसकी तैयारियों की पोल खुल जाती है। गत वर्ष सरयू नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया था। इससे माझा क्षेत्र के लोगों को व्यापक समस्या का सामना करना पड़ा था।
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खराब पड़ा स्टीमर
बाढ़ प्रभावितों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए लगभग पांच वर्ष पहले टांडा में स्टीमर मंगवाया गया था। कुछ दिन चलने के बाद वह खराब हो गया। इसके बाद उसे ठीक कराने की सुध नहीं है। लंबे समय से खराब पड़ा स्टीमर तहसील परिसर में पड़ा धूल फांक रहा है। इसे ठीक कराने की मांग के बावजूद संबंधित अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है।
बाढ़ से निपटने के हो रहे व्यापक इंतजाम
एडीएम गिरिजेश त्यागी का कहना है कि, संभावित बाढ़ से निपटने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। 34 बाढ़ चौकियां चिह्नित की जा चुकी हैं। कोटेदारों को राशन तथा पेट्रोल पंपों को डीजल, पेट्रोल व केरोसिन रिजर्व रखने के लिए निर्देशित किया गया है। बाढ़ चौकियों पर लेखपालों व अन्य कर्मचारियों की तैनाती कर दी गई है। गत वर्ष बाढ़ से निपटने के लिए 25 लाख रुपये शासन से उपलब्ध हुए थे। बाढ़ नहीं आने पर उसे लौट दिया गया था। इस वर्ष 50 लाख रुपये की मांग शासन से की गई है।