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विशेष अभियान में मिले 10,568 कुपोषित बच्चे
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अंबेडकरनगर। शासन-प्रशासन के तमाम प्रयासों के बावजूद जिले में अतिकुपोषित व कुपोषित बच्चों की संख्या कम नहीं हो रही है। बीते दिनों बाल विकास विभाग द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से चलाए गए विशेष अभियान में 10,568 बच्चे कुपोषित व अतिकुपोषित चिह्नित किए गए हैं।
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक यह संख्या लगभग 1 लाख 83 हजार 193 बच्चों की जांच में सामने आई है। सवाल उठ रहा है कि जब प्रत्येक माह पौष्टिक राशन सामग्री का वितरण हो रहा है तो आखिर इतनी बड़ी संख्या में कुपोषित बच्चे कैसे सामने आ रहे हैं।
गौरतलब है कि प्रदेश सरकार द्वारा कुपोषण मुक्त समाज बनाने के लिए कई योजनाएं चलायी जा रही हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों से महिलाओं व बच्चों तक पौष्टिक आहार पहुंचाया जा रहा है। साथ ही समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण कर जरूरत के अनुसार अतिरिक्त पौष्टिक आहार व उपचार की व्यवस्था भी है। इसके बावजूद जिले में इसका कोई खास असर नहीं दिख रहा है।
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बीते दिनों शासन के निर्देश पर जिले के 2551 आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से छह वर्ष तक के बच्चों का 24 मार्च से 4 अप्रैल के बीच स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया। विभागीय सूत्रों से जो आंकड़ा सामने आया है, वह हैरान करने वाला है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने जिले के 1 लाख 83 हजार 193 बच्चों का वजन, लंबाई आदि की जांच की।
इनमें 1 लाख 52 हजार 63 बच्चे सामान्य श्रेणी में पाए गए। इसके अलावा 20,562 बच्चे पीली श्रेणी में पाए गए जिनका स्वास्थ्य औसत के अनुसार बेहतर नहीं था। 10,568 बच्चे लाल श्रेणी में पाए गए। इनमें से 6,789 बच्चे अति कुपोषित मिले जबकि 3,779 बच्चे कुपोषित पाए गए। इनका वजन लंबाई के अनुपात में काफी कम था।
ऐसे में बाल विकास विभाग की योजनाओं को लेकर सवाल भी उठ रहा है। विभाग प्रत्येक माह आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों को चने की दाल, गेहूं की दलिया, चावल व रिफाइंड आयल आदि उपलब्ध करा रहा है। इसके बावजूद लगातार जिले में कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चे सामने आ रहे हैं।
विभाग द्वारा प्रत्येक माह सामान्य बच्चों को एक किलो चना दाल, एक किलो गेहूं की दलिया व एक किलो चावल व आधा किलो रिफाइंड आयल दिया जाता है। अति कुपोषित बच्चों को को दो किलो चना दाल, डेढ़ किलो चावल, डेढ़ किलो गेहूं की दलिया व आधा किलो रिफाइंड दिया जाता है।
इसके साथ ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं को निर्देेश है कि वे समय-समय पर बच्चों के वजन व स्वास्थ्य का परीक्षण करती रहें। जरूरत के अनुसार कई बच्चों को जिला अस्पताल में बने पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती भी कराए जाने का प्रबंध है। इसके बाद कुपोषण पर अंकुश न लग पाना अत्यंत गंभीर माना जा रहा है।
शासन के निर्देशानुसार समय-समय पर विशेष अभियान चलाया जाता है। साथ ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को निर्देश है कि वे बच्चों का समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण करती रहें और जरूरत के अनुसार सामग्री उपलब्ध कराएं। बीते दिनों चले अभियान में 10,568 कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चे सामने आए हैं। उन्हें जरूरी सामग्री उपलब्ध करा दी गई है।
-दिनेश कुमार मिश्र, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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विभागीय आंकड़ों के मुताबिक यह संख्या लगभग 1 लाख 83 हजार 193 बच्चों की जांच में सामने आई है। सवाल उठ रहा है कि जब प्रत्येक माह पौष्टिक राशन सामग्री का वितरण हो रहा है तो आखिर इतनी बड़ी संख्या में कुपोषित बच्चे कैसे सामने आ रहे हैं।
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गौरतलब है कि प्रदेश सरकार द्वारा कुपोषण मुक्त समाज बनाने के लिए कई योजनाएं चलायी जा रही हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों से महिलाओं व बच्चों तक पौष्टिक आहार पहुंचाया जा रहा है। साथ ही समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण कर जरूरत के अनुसार अतिरिक्त पौष्टिक आहार व उपचार की व्यवस्था भी है। इसके बावजूद जिले में इसका कोई खास असर नहीं दिख रहा है।
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बीते दिनों शासन के निर्देश पर जिले के 2551 आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से छह वर्ष तक के बच्चों का 24 मार्च से 4 अप्रैल के बीच स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया। विभागीय सूत्रों से जो आंकड़ा सामने आया है, वह हैरान करने वाला है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने जिले के 1 लाख 83 हजार 193 बच्चों का वजन, लंबाई आदि की जांच की।
इनमें 1 लाख 52 हजार 63 बच्चे सामान्य श्रेणी में पाए गए। इसके अलावा 20,562 बच्चे पीली श्रेणी में पाए गए जिनका स्वास्थ्य औसत के अनुसार बेहतर नहीं था। 10,568 बच्चे लाल श्रेणी में पाए गए। इनमें से 6,789 बच्चे अति कुपोषित मिले जबकि 3,779 बच्चे कुपोषित पाए गए। इनका वजन लंबाई के अनुपात में काफी कम था।
ऐसे में बाल विकास विभाग की योजनाओं को लेकर सवाल भी उठ रहा है। विभाग प्रत्येक माह आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों को चने की दाल, गेहूं की दलिया, चावल व रिफाइंड आयल आदि उपलब्ध करा रहा है। इसके बावजूद लगातार जिले में कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चे सामने आ रहे हैं।
विभाग द्वारा प्रत्येक माह सामान्य बच्चों को एक किलो चना दाल, एक किलो गेहूं की दलिया व एक किलो चावल व आधा किलो रिफाइंड आयल दिया जाता है। अति कुपोषित बच्चों को को दो किलो चना दाल, डेढ़ किलो चावल, डेढ़ किलो गेहूं की दलिया व आधा किलो रिफाइंड दिया जाता है।
इसके साथ ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं को निर्देेश है कि वे समय-समय पर बच्चों के वजन व स्वास्थ्य का परीक्षण करती रहें। जरूरत के अनुसार कई बच्चों को जिला अस्पताल में बने पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती भी कराए जाने का प्रबंध है। इसके बाद कुपोषण पर अंकुश न लग पाना अत्यंत गंभीर माना जा रहा है।
शासन के निर्देशानुसार समय-समय पर विशेष अभियान चलाया जाता है। साथ ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को निर्देश है कि वे बच्चों का समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण करती रहें और जरूरत के अनुसार सामग्री उपलब्ध कराएं। बीते दिनों चले अभियान में 10,568 कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चे सामने आए हैं। उन्हें जरूरी सामग्री उपलब्ध करा दी गई है।
-दिनेश कुमार मिश्र, जिला कार्यक्रम अधिकारी