प्रयागराज जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव : चुनाव जीते बागी और निर्दलीय प्रत्याशियों को मनाना चुनौती
- जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए बागी प्रत्याशियों को मनाने में जुटे पार्टी नेता
- अनुभवहीन स्थानीय संगठन के आगे नहीं चली जनता के चुने जनप्रतिनिधियों की
विस्तार
जिला पंचायत के चुनावी नतीजों ने भारतीय जनता पार्टी को आईना दिखाया है। पार्टी के तमाम जनप्रतिनिधियों की अनदेखी करने और अनुभवहीन गंगापार एवं यमुनापार संगठन पर ज्यादा भरोसे ने पार्टी को इस चुनाव में तगड़ा झटका दे दिया। विधानसभा 2022 का सेमीफाइनल मानकर चुनाव लड़ रही भाजपा को सिर्फ 14 सीटें ही मिली हैं। जबकि जिला पंचायत में कुल सदस्यों की संख्या 84 है। कई सीटों पर भाजपा के बागी प्रत्याशियों को जीत मिली है। निर्दलीय का भी आंकड़ा 30 के पार है। ऐसे में जिला पंचायत अध्यक्ष बनने के लिए अब पार्टी का पूरा जोर चुनाव जीते पार्टी के बागी नेताओं को मनाने में है। निर्दलीय प्रत्याशियों को भी अपनी ओर करने के लिए कई पुराने नेताओं को मध्यस्थता के लिए पार्टी ने उतार दिया है।
दिग्गज नेताओं की अनदेखी कर ‘कमजोर’ को बना दिया उम्मीदवार
जिला पंचायत सदस्य चुनाव में भाजपा को उम्मीद थी कि उसके खाते में 50 से ज्यादा सीटें आएंगी, लेकिन तीन दिन चली मतगणना के बाद आए परिणाम से भाजपा को निराशा हाथ लगी। पार्टी ने कई दिग्गज नेताओं की अनदेखी करते हुए कमजोर प्रत्याशियों को उम्मीदवार बना दिया जिसका नतीजा यह रहा कि उसे महज 14 सीटें ही मिल सकी। चर्चा है कि पार्टी ने इस बार अपने नेताओं की बिल्कुल भी नहीं सुनी। जबकि भाजपा की ओर से प्रत्याशियों की सूची जारी करने के पूर्व ही संगठन पदाधिकारियों के साथ हुई बैठक में जनप्रतिनिधियों ने कई ऐसे नाम सुझाए थे जिनकी पंचायत सदस्य चुनाव में जीत सुनिश्चित थी। सांसद केशरी देवी पटेल की परंपरागत सीट शंकरगढ़ द्वितीय में संगठन के कई पदाधिकारियों ने बिना उनसे चर्चा किए एक अनजान चेहरे को मैदान में उतार दिया। जबकि इस सीट से जीतीं अनारकली की शुरू से ही जीत तय मानी जा रही थी।
सूत्र बताते हैं कि सांसद के परिवार के सदस्यों ने अनारकली को इस सीट से प्रत्याशी बनाने का समर्थन भी किया। सांसद डॉ.रीता जोशी को भी इसमें कोई आपत्ति नहीं थी, लेकिन पार्टी ने यहां अनीता देवी को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया। अनीता देवी इस चुनाव में हार गईं, जबकि अनारकली चार हजार से ज्यादा वोटों से जीत गईं। इसी तरह सांसद डॉ. रीता बहुगुणा जोशी के करीबी बाबा तिवारी की जीत मेजा वार्ड 67 से तय मानी जा रही थी लेकिन पार्टी ने उन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया। उन्होंने पार्टी से बगावत करके अपनी पत्नी उमा तिवारी को मैदान में उतारा और वह जीती भीं।