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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Zila Panchayat President Election: Challenging Rebels Winning Elections and Celebrating Independent Candidates

प्रयागराज जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव : चुनाव जीते बागी और निर्दलीय प्रत्याशियों को मनाना चुनौती

Mon, 10 May 2021 01:24 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 10 May 2021 01:24 AM IST
सार

  • जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए बागी प्रत्याशियों को मनाने में जुटे पार्टी नेता
  • अनुभवहीन स्थानीय संगठन के आगे नहीं चली जनता के चुने जनप्रतिनिधियों की

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Zila Panchayat President Election: Challenging Rebels Winning Elections and Celebrating Independent Candidates
prayagraj news : जिला पंचायत प्रयागराज। - फोटो : prayagraj

विस्तार

जिला पंचायत के चुनावी नतीजों ने भारतीय जनता पार्टी को आईना दिखाया है। पार्टी के तमाम जनप्रतिनिधियों की अनदेखी करने और अनुभवहीन गंगापार एवं यमुनापार संगठन पर ज्यादा भरोसे ने पार्टी को इस चुनाव में तगड़ा झटका दे दिया। विधानसभा 2022 का सेमीफाइनल मानकर चुनाव लड़ रही भाजपा को सिर्फ 14 सीटें ही मिली हैं। जबकि जिला पंचायत में कुल सदस्यों की संख्या 84 है। कई सीटों पर भाजपा के बागी प्रत्याशियों को जीत मिली है। निर्दलीय का भी आंकड़ा 30 के पार है। ऐसे में जिला पंचायत अध्यक्ष बनने के लिए अब पार्टी का पूरा जोर चुनाव जीते पार्टी के बागी नेताओं को मनाने में है।  निर्दलीय प्रत्याशियों को भी अपनी ओर करने के लिए कई पुराने नेताओं को मध्यस्थता के लिए पार्टी ने उतार दिया है।

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Zila Panchayat President Election: Challenging Rebels Winning Elections and Celebrating Independent Candidates
prayagraj news : जिला पंचायत कार्यालय, प्रयागराज। - फोटो : prayagraj

दिग्गज नेताओं की अनदेखी कर ‘कमजोर’ को बना दिया उम्मीदवार 

जिला पंचायत सदस्य चुनाव में भाजपा को उम्मीद थी कि उसके खाते में 50 से ज्यादा सीटें आएंगी, लेकिन तीन दिन चली मतगणना के बाद आए परिणाम से भाजपा को निराशा हाथ लगी। पार्टी ने कई दिग्गज नेताओं की अनदेखी करते हुए कमजोर प्रत्याशियों को उम्मीदवार बना दिया जिसका नतीजा यह रहा कि उसे महज 14 सीटें ही मिल सकी। चर्चा है कि पार्टी ने इस बार अपने नेताओं की बिल्कुल भी नहीं सुनी। जबकि भाजपा की ओर से प्रत्याशियों की सूची जारी करने के पूर्व ही संगठन पदाधिकारियों के साथ हुई बैठक में जनप्रतिनिधियों ने कई ऐसे नाम सुझाए थे जिनकी पंचायत सदस्य चुनाव में जीत सुनिश्चित थी। सांसद केशरी देवी पटेल की परंपरागत सीट शंकरगढ़ द्वितीय में संगठन के कई पदाधिकारियों ने बिना उनसे चर्चा किए एक अनजान चेहरे को मैदान में उतार दिया। जबकि इस सीट से जीतीं अनारकली की शुरू से ही जीत तय मानी जा रही थी। 

सूत्र बताते हैं कि सांसद के परिवार के सदस्यों ने अनारकली को इस सीट से प्रत्याशी बनाने का समर्थन भी किया। सांसद डॉ.रीता जोशी को भी इसमें कोई आपत्ति नहीं थी, लेकिन पार्टी ने यहां अनीता देवी को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया। अनीता देवी इस चुनाव में हार गईं, जबकि अनारकली चार हजार से ज्यादा वोटों से जीत गईं। इसी तरह सांसद डॉ. रीता बहुगुणा जोशी के करीबी बाबा तिवारी की जीत मेजा वार्ड 67 से तय मानी जा रही थी लेकिन पार्टी ने उन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया। उन्होंने पार्टी से बगावत करके अपनी पत्नी उमा तिवारी को मैदान में उतारा और वह जीती भीं।

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Zila Panchayat President Election: Challenging Rebels Winning Elections and Celebrating Independent Candidates
prayagraj news : जिला पंचायत प्रयागराज। - फोटो : prayagraj

कई सीटों से जीते बागी प्रत्याशी, अब उन्हें मनाने पर पूरा जोर

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने पंचायत चुनाव की मतगणना के दौरान बयान दिया था कि सभी जिलों में पार्टी प्रत्याशी ही जिला पंचायत अध्यक्ष बनेंगे। फिलहाल प्रयागराज की बात करें तो यहां जिला पंचायत अध्यक्ष बनने के लिए भाजपा को 43 जिला पंचायत सदस्यों का समर्थन चाहिए। इस चुनाव में भाजपा के पास 14 सीटें ही आई हैं। वहीं करीब एक दर्जन बागी प्रत्याशी भी चुनाव जीते हैं। इसमें वार्ड 52 करछना प्रथम से कुलदीप त्रिपाठी, वार्ड 54 करछना तृतीय से राजेश पटेल, वार्ड 74 उरुवा चतुर्थ  से सुचिता दुबे, वार्ड 72 उरुवा द्वितीय से आरती यादव पत्नी श्याम राज यादव, वार्ड 67 मेजा प्रथम से उमा तिवारी पत्नी बाबा तिवारी,  वार्ड 84 कोरांव षष्ठम से अरुण कुमार चतुर्वेदी, वार्ड 42 होलागढ़ द्वितीय से रश्मि पांडेय समेत गंगापार के कई वार्ड ऐसे रहे जिसमें पार्टी के सांसद, विधायकों आदि ने जिला पंचायत सदस्य में उम्मीदवारों के नाम संगठन तक पहुंचाए थे। लेकिन संगठन इस बार यमुनापार और गंगापार जिलाध्यक्ष एवं अन्य पदाधिकारियों पर ज्यादा निर्भर रहा। जनप्रतिनिधियों की ओर से सुझाए गए नाम की जगह पार्टी ने तमाम सीटों पर ऐसे उम्मीदवार उतार दिए, जिनके बारे में कार्यकर्ताओं तक को भी ज्यादा जानकारी नहीं रही। फिलहाल अब दर्जन भर से अधिक सीटों पर बागी उम्मीदवारों की जीत होने के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष पद के प्रत्याशी बागियों को मनाने में जुटे हैं। इस बीच निर्दलीय प्रत्याशियों को भी भाजपा के पक्ष में शामिल करने के लिए तमाम पुराने जमीनी नेताओं को उतारा गया है।

संगठन के पदाधिकारियों के चुनाव लड़ने से भी बढ़ी नाराजगी

जिला पंचायत सदस्य चुनाव के पूर्व ही भाजपा के क्षेत्र संगठन मंत्री भवानी सिंह ने कहा था कि जो लोग भाजपा संगठन में है, अगर उन्हें चुनाव लड़ना है तो पहले वह पद से इस्तीफा दें। उसके बाद ही वह चुनाव लड़ें। बाद में यही बातें प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने भी दोहराईं। लेकिन, पार्टी के तमाम पदाधिकारियों पर वरिष्ठ नेताओं की बात का कोई असर नहीं पड़ा। यमुनापार अध्यक्ष विभव नाथ भारती और गंगापार अध्यक्ष अश्वनी दुबे की नाक के नीचे संगठन के महत्वपूर्ण पदों पर काबिज पदाधिकारी जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़े, लेकिन वह चुनाव जीत नहीं सके। इससे स्थानीय कार्यकर्ताओं में नाराजगी रही। महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए जिन लोगों ने चुनाव लड़ा उसमें  यमुनापार जिला उपाध्यक्ष एवं निवर्तमान जिला पंचायत सदस्य त्रिवेणी प्रसाद पांडेय, जिला उपाध्यक्ष जय सिंह पटेल, जिला महामंत्री सरिता त्रिपाठी, जिला मंत्री  आरती कोल आदि के नाम प्रमुख रूप से शामिल रहे। इन सभी को चुनाव में हार का सामना भी करना पड़ा। इन पदाधिकारियों के चुनाव हारने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं में यही चर्चा का विषय है कि क्या प्रदेश अध्यक्ष चुनाव लड़ने वाले इन पदाधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई करेंगे ।

निर्दलीय प्रत्याशियों से संपर्क कर रहे वीके सिंह और रेखा सिंह

जिला पंचायत अध्यक्ष के दावेदारों में भाजपा से इस बार गंगापार से डा.वीके सिंह और यमुनापार से रेखा सिंह का नाम सामने आया है। दोनों ही नेताओं ने अध्यक्ष की कुर्सी पाने के लिए निर्दलीय सदस्यों से संपर्क भी शुरू कर दिया है। हंडिया चतुर्थ से वीके सिंह  के पिता देवराज सिंह की संघ में अच्छी पैठ है। इसके अलावा रक्षामंत्री राजनाथ सिंह से भी उनकी काफी नजदीकियां हैं। वहीं भाजपा सूत्रों के मुताबिक वीके सिंह का पार्टी के कई अन्य कद्दावर नेताओं से सीधा संपर्क है। वहीं दूसरी ओर रेखा सिंह की भी पार्टी में अच्छी पैठ है। भाजपा के महासचिव अरुण सिंह, कैबिनेट मंत्री डा.महेंद्र सिंह आदि नेताओं से उनका अच्छा संपर्क है।
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