Youth Parliament : ‘मोदी’ और ‘राहुल’ आमने-सामने, राष्ट्रीय मुद्दों पर सत्तारूढ़ और विपक्ष के बीच हुई तीखी बहस
यूनाइटेड ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस एवं अमर उजाला के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यूथ पार्लियामेंट के पहले सत्र की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका में छात्र प्रशांत सिंह ने कहा कि कमजोर वर्ग को समाज की मुख्य धारा में लाने के लिए जाति आधारित आरक्षण को बढ़ावा देना जरूरी है।
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यूनाइटेड ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस (यूजीआई) नैनी में मंगलवार को आयोजित यूनाइटेड यूथ पार्लियामेंट में जाति आधारित आरक्षण के मसले पर सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। सदन में जय श्रीराम के नारे भी लगे और बड़े नेताओं के किरदार निभा रहे छात्रों ने कई राष्ट्रीय मुद्दों पर तर्कों के साथ अपने-अपने पक्ष रखे।
यूनाइटेड ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस एवं अमर उजाला के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यूथ पार्लियामेंट के पहले सत्र की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका में छात्र प्रशांत सिंह ने कहा कि कमजोर वर्ग को समाज की मुख्य धारा में लाने के लिए जाति आधारित आरक्षण को बढ़ावा देना जरूरी है। पीएम के बयान पर पलटवार करते हुए विपक्ष की ओर से सांसद राहुल गांधी बने अनस उस्मान ने कहा कि सत्तापक्ष बिलों को लागू करने के बजाय उन्हें पेश करने में ज्यादा दिलचस्पी लेता है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के रूप में छात्र अभिषेक धवन ने कहा कि एससी और एसटी में अभी भी कई गैर-मान्यता प्राप्त जातियां हैं जिन्हें अपने विकास के लिए आरक्षण की आवश्यकता है। प्रियंका गांधी के रूप में मुस्कान दुबे ने कहा कि केंद्र की सरकार समानता पर काम करने में विफल रही है और उसके शासन में गरीबी और महंगाई में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।
संबित पात्रा के रूप में कुंवर ऋतुराज साहू ने कहा कि सरकार ने अपने नारे ‘सबका साथ, सबका विकास’ के तहत सभी लोगों के लिए समान अवसर पैदा किए हैं। कहा, यह विपक्षी दल (कांग्रेस) है जो विकास में बाधा उत्पन्न कर रहा है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के रूप में अम्मार अहमद ने आरोप लगाया कि सत्ता में आने के बाद से सत्तारूढ़ सरकार में दलितों का शोषण बढ़ गया है।
बसपा सुप्रीमो मायावती के रूप में साक्षी मिश्रा ने कहा कि सत्तारूढ़ दल अपने हित के लिए जाति आधारित आरक्षण को तुरुप के पत्ते की तरह इस्तेमाल कर रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के रूप में विश्वास तिवारी ने जाति-आधारित आरक्षण की आलोचना करने के लिए विपक्ष की खिंचाई की। उन्होंने कहा कि विपक्ष को केवल फलस्तीन की समस्याओं की चिंता है, अपने देश से जुड़ी समस्याओं की नहीं।
सदन में जाति-आधारित आरक्षण, समानता, महिला सशक्तिकरण, गरीबी, सांप्रदायिक सद्भाव, धार्मिक सहिष्णुता और आतंकवाद जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर तीखी बहस हुई। इससे पूर्व मुख्य अतिथि बीएचयू वाराणसी के पूर्व कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी एवं अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की। मुख्य अतिथि को प्राचार्यों द्वारा सम्मान स्वरूप स्मृति चिह्न भी दिया गया।
कार्यक्रम में शंभूनाथ और शुआट्स, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, एसएस खन्ना डिग्री कॉलेज, सीएमपी डिग्री कॉलेज, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, इविंग क्रिश्चियन कॉलेज, एमएनएनआईटी सहित विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थानों ने भी भागीदारी की कार्यक्रम के दूसरे सत्र नेशनल कमीशन फॉर वुमेन के तहत फेमीनिज्म और फेक एलीगेशन्स (गलत आरोपों) पर चर्चा की गई। डीन, कॉर्पोरेट और उद्योग संबंध, यूजीआई डॉ. दिव्या बरतरिया ने अतिथियों का स्वागत किया। वंश ऐरन, अंश बी. कुंद्रा, अलिजा रिजवी, आयुष कुमार, जयंत अग्रवाल, अनीला संयोजक के रूप में उपस्थित रहे।