नेताओं के पास फटक नहीं सके युवा
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आयोग की भर्तियों की सीबीआई जांच, पीसीएस-2016 प्रारंभिक परीक्षा निरस्त करने, ग्राम विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा निरस्त करने, एसएससी की सिपाही भर्ती में नियुक्ति देने समेत विभिन्न मांगों को लेकर प्रतियोगियों के अलग-अलग संगठन लंबे समय से आंदोलनरत हैं। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति की ओर से रविवार को नेताओं के घेराव के साथ विश्वविद्यालय से बालसन चौराहा तक कैंडल मार्च की घोषणा की गई थी। ग्राम विकास अधिकारी भर्ती के अभ्यर्थियों ने चंद्रशेखर आजाद पार्क में बैठक की घोषणा की थी। इसके मद्देनजर पुलिस की प्रतियोगियों नजर रही और उन्हें कहीं एकत्रित नहीं होने दिया। एसएससी के अभ्यर्थियों को तो शनिवार की रात में हटा दिया गया था।
विश्वविद्यालय के आसपास भी भारी संख्या में फोर्स तैनात रही। ऐसे में विश्वविद्यालय पर प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के बैनर तले जुटे प्रतियोगियों ने कैंडल मार्च का कार्यक्रम स्थगित कर दिया। उन्होंने शोभनाथ की प्रतिमा के समक्ष दीप और मोमबत्ती जलाकर सीबीआई जांच की मांग की। उन्होंने लाल पद्मधर की प्रतिमा तक जुलूस भी निकाला। उन्होंने गृहमंत्री राजनाथ सिंह को उनका वादा दिलाया। उनका कहना था कि यदि सोमवार तक प्रधानमंत्री और गृहमंत्री की ओर से इस संबंध में कोई घोषणा नहीं की गई तो वे एक बार फिर आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। दीप जलाने वालों में रितेश सिंह, दिनेश तिवारी, राजकुमार द्विवेदी, लालजी, रत्नाकर, अनिल सिंह, आनंद सिंह, मनोज तिवारी, सुनील मिश्रा, प्रशांत तिवारी, गिरिजेश सिंह, सावन दुबे आदि शामिल रहे।
इलाहाबाद (ब्यूरो)। विश्वविद्यालयों तथा अन्य शिक्षण संस्थानों में भेदभाव रोकने और रोहित एक्ट लागू करने की मांग तथा प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के विरोध में आल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की ओर से रविवार को इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ भवन से बालसन चौराहा तक कैंडल मार्च निकाला गया। विद्यार्थियाें का कहना था कि परिसर में जातिगत भेदभाव की शिकायतें लगातार बनी हुई हैं। वे बालसन चौराहा पर सभा करना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने रोक दिया। इस दौरान उनकी पुलिस कर्मियों से झड़प भी हुई। मार्च निकालने वालों में प्रदेश सचिव सुनील मौर्य, इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ की पूर्व उपाध्यक्ष शालू यादव, अंतस सर्वानंद, शक्ति रजवार, रणविजय विद्रोही, विष्णु प्रभाकर उपाध्याय, सुभाष कुशवाहा, अनिरुद्ध शर्मा, रणवीर मिश्रा, डॉ.कमल उसरी, शिवानी जायसवाल, साक्षी उपाध्याय, अमीषा, सीमांत, किशन पाठक आदि शामिल रहे।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय संघटक कालेजों के शिक्षकाें ने प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपकर परिसर में राजनेताओं और छात्र नेताआें का दबाव कम करने की मांग की। उनका कहना था कि कुलपति प्रोफेसर रतनलाल हांगलू के नेतृत्व में विश्वविद्यालय और कालेजों के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं लेकिन नेताओं के विरोध की वजह से गतिरोध कायम हो जाता है। उन्होंने प्रधानमंत्री से मांग की कि इस तरह के दबाव को खत्म करने के लिए आवश्यक हस्तक्षेप करें।