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Prayagraj News: चयन प्रक्रिया के बीच नए नियम लागू कर नौकरी देने से नहीं कर सकते इन्कार
Wed, 23 Sep 2026 02:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
Updated Wed, 23 Sep 2026 02:38 AM IST
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि चयन प्रक्रिया शुरू होने के बाद भर्ती नियमों में हुए बदलाव को पिछली तारीख से लागू कर अभ्यर्थी को नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता की एकल पीठ ने प्रयागराज की याची ज्ञान लता पाल की याचिका स्वीकार करते हुए डिप्टी जेलर के पद पर हुई उनकी नियुक्ति को कार्यभार ग्रहण करने की तारीख से नियमित मानने और सभी परिणामी लाभ देने का आदेश दिया है।
मामला उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से नौ अगस्त 2008 को सम्मिलित अवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा के जारी विज्ञापन से जुड़ा है। याची ने प्रारंभिक, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार में सफलता हासिल की। 12 दिसंबर 2013 को विभिन्न पदों के लिए विकल्प मांगे गए तो उन्होंने डिप्टी जेलर के पद को चुना। इसके बाद 27 जून 2014 को नियमों में संशोधन कर महिला अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम 152 सेंटीमीटर लंबाई और 45 से 58 किलोग्राम वजन निर्धारित कर दिया गया।
संशोधित नियमों के तहत हुई मेडिकल जांच में याची की लंबाई 150 सेंटीमीटर और वजन 70 किलोग्राम पाया गया। इसी आधार पर उन्हें नियुक्ति देने से इन्कार कर दिया गया। इसके खिलाफ उन्होंने 2015 में हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। अंतरिम आदेश पर 20 जुलाई 2015 को उन्होंने उप जेलर के पद पर कार्यभार ग्रहण किया। बाद में वरिष्ठता और पदोन्नति का लाभ न मिलने पर दो और याचिकाएं दाखिल की गईं।
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कोर्ट ने तीनों याचिकाओं को एक साथ स्वीकार कर ली। कहा कि जिस समय चयन प्रक्रिया शुरू हुई थी, उस समय लागू 1980 की सेवा नियमावली में महिला अभ्यर्थियों के लिए कोई शारीरिक मानक निर्धारित नहीं था। बाद में किए गए संशोधन को भूतकालिक प्रभाव के साथ पहले से चल रही चयन प्रक्रिया पर लागू नहीं किया जा सकता। लिहाजा, कोर्ट ने सरकार को याची की नियुक्ति को 20 जुलाई 2015 से नियमित मानते हुए आदेश की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत किए जाने के आठ सप्ताह में सभी परिणामी लाभ प्रदान करने का आदेश दिया है।
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मामला उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से नौ अगस्त 2008 को सम्मिलित अवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा के जारी विज्ञापन से जुड़ा है। याची ने प्रारंभिक, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार में सफलता हासिल की। 12 दिसंबर 2013 को विभिन्न पदों के लिए विकल्प मांगे गए तो उन्होंने डिप्टी जेलर के पद को चुना। इसके बाद 27 जून 2014 को नियमों में संशोधन कर महिला अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम 152 सेंटीमीटर लंबाई और 45 से 58 किलोग्राम वजन निर्धारित कर दिया गया।
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संशोधित नियमों के तहत हुई मेडिकल जांच में याची की लंबाई 150 सेंटीमीटर और वजन 70 किलोग्राम पाया गया। इसी आधार पर उन्हें नियुक्ति देने से इन्कार कर दिया गया। इसके खिलाफ उन्होंने 2015 में हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। अंतरिम आदेश पर 20 जुलाई 2015 को उन्होंने उप जेलर के पद पर कार्यभार ग्रहण किया। बाद में वरिष्ठता और पदोन्नति का लाभ न मिलने पर दो और याचिकाएं दाखिल की गईं।
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कोर्ट ने तीनों याचिकाओं को एक साथ स्वीकार कर ली। कहा कि जिस समय चयन प्रक्रिया शुरू हुई थी, उस समय लागू 1980 की सेवा नियमावली में महिला अभ्यर्थियों के लिए कोई शारीरिक मानक निर्धारित नहीं था। बाद में किए गए संशोधन को भूतकालिक प्रभाव के साथ पहले से चल रही चयन प्रक्रिया पर लागू नहीं किया जा सकता। लिहाजा, कोर्ट ने सरकार को याची की नियुक्ति को 20 जुलाई 2015 से नियमित मानते हुए आदेश की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत किए जाने के आठ सप्ताह में सभी परिणामी लाभ प्रदान करने का आदेश दिया है।