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कर्मचारियों पर गाज, अफसरों की मौज

Wed, 11 Dec 2019 02:00 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 11 Dec 2019 02:00 AM IST
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Work on employees, officers have fun
प्रयागराज। परिषदीय विद्यालयों में 68500 सहायक अध्यापक भर्ती में 87 लोगों के खिलाफ एफआईआर के बावजूद कई जवाबदेह अब भी कार्रवाई की जद से बाहर हैं। परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय के रजिस्ट्रार ने 49 चयनित शिक्षकों और मूल्यांकन से जुड़े 38 कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई है। दूसरी ओर गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार बड़े अधिकारी आज भी बड़े पदों पर तैनात हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई तो दूर, कुछ को पुरस्कार के रूप में दो-दो विभागों की जिम्मेदारी दे दी गई है। जबकि इनकी लापरवाही के चलते ही सहायक अध्यापक भर्ती के परिणाम में लगातार बदलाव की प्रक्रिया जारी है।
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सहायक अध्यापक भर्ती में गड़बड़ी सामने आने पर कोर्ट की फटकार के बाद भले ही सरकार ने तत्काल कार्रवाई करके परीक्षार्थियों का गुस्सा शांत कर दिया हो परंतु, कुछ महीने बाद ही सरकार ने इन आरोपियों की बहाली कर दी। अध्यापक भर्ती में अच्छे अंक पाने के बाद भी परीक्षा में असफल किए गए अभ्यर्थी आज भी कोर्ट, सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी और बेसिक शिक्षा विभाग के कार्यालयों का चक्कर लगा रहे हैं। कोर्ट के आदेश के बाद अब तक सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी ने चार बार मूल्यांकन का सफल अभ्यर्थियों की नई सूची जारी की है। यह प्रक्रिया अब भी जारी है। सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी की माने तो अभी 400 नए अभ्यर्थियों को नौकरी देने की तैयारी है।
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लचर पैरवी के चलते बहाल हो गए जिम्मेदार
2018 में शिक्षक भर्ती में गड़बड़ी की शिकायत मिलने के बाद शासन ने इसकी जांच कराई। कोर्ट ने भी कड़ी फटकार लगाई थी। आरोप के घेरे में आए तत्कालीन सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी डॉ. सुत्ता सिंह और रजिस्ट्रार जीवेंद्र सिंह ऐरी को उस समय निलंबित कर दिया गया। लेकिन, शासन की ओर से कोर्ट में इन अधिकारियों के खिलाफ आरोप पत्र ही दाखिल नहीं किया गया। कुछ दिन बाद इनको बहाल भी कर दिया गया। शासन की मेहरबानी यहीं तक नहीं रही, डॉ. सुत्ता सिंह को पहले सीमैट और अब प्रदेश मुख्यालय स्थित बेसिक शिक्षा निदेशालय में अपर निदेशक बेसिक के महत्वपूर्ण पद पर तैनाती दे दी गई। जबकि डॉ. सर्वेंद्र विक्रम बहादुर सिंह को वर्तमान में दो-दो विभागों की जिम्मेदारी सौंप दी गई है। वहीं, भर्ती में गड़बड़ी की पूरी जिम्मेदारी तत्कालीन निदेशक एससीईआरटी संजय सिन्हा पर डालकर सरकार ने उनको महत्वहीन पद पर भेज दिया।
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आननफानन मेें लिखाई गई रिपोर्ट
रजिस्ट्रार परीक्षा नियामक प्राधिकारी राजशेखर की ओर से 49 शिक्षकों और 38 कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज करवाई गई है। पता चला है कि कोर्ट ने 11 दिसंबर को इस मामले में एफआईआर दर्ज करके रिपोर्ट मांगी है। आनन फानन में रिपोर्ट दाखिल करने के एक दिन पहले एफआईआर दर्ज करवाई गई है।

दोबारा मूल्यांकन में भी लापरवाही, पास को फेल किया
मूल्यांकन की प्रक्रिया अब तक जारी है। बड़ी संख्या में परीक्षार्थियों ने कोर्ट में याचिका दाखिल कर रखी है। कोर्ट के आदेश पर हुए दोबारा मूल्यांकन के बाद लगभग पांच हजार नए अभ्यर्थियों को नौकरी दी गई। इसके बाद भी गड़बड़ी नहीं रुकी और कुछ अभ्यर्थियों की कॉपी में जब दावे के बाद अंक नहीं बढ़े तो इन परीक्षार्थियों की कॉपी कोर्ट के आदेश पर तीसरी बार जांची गई। यहां पर इनका दावा सही पाया गया गया और इन्हें नौकरी देने की सिफारिश की गई है। यह 400 उन नए अभ्यर्थियों में शामिल हैं, जिनको नौकरी दी जानी है। हालांकि परीक्षा नियामक कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक यह संख्या बढ़ भी सकती है।
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