Prayagraj : ड्राइविंग सीट पर महिलाएं... तीन साल में 13 हजार से अधिक लाइसेंस जारी
घर के काम हों या दफ्तर के, पढ़ाई-लिखाई हो या खेलकूद, देश की आधी आबादी ने हर कदम पर अपना परचम बुलंद किया है। अब वह दूसरों पर निर्भरता भी कम कर रही हैं। पहले दफ्तर या किसी भी जगह पर आने-जाने के लिए उन्हें दूसरों पर निर्भर होना पड़ता था।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
घर के काम हों या दफ्तर के, पढ़ाई-लिखाई हो या खेलकूद, देश की आधी आबादी ने हर कदम पर अपना परचम बुलंद किया है। अब वह दूसरों पर निर्भरता भी कम कर रही हैं। पहले दफ्तर या किसी भी जगह पर आने-जाने के लिए उन्हें दूसरों पर निर्भर होना पड़ता था। लेकिन, अब वह इसे भी कम कर रही हैं। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले तीन सालों में जिले में 13,417 महिलाओं के ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए गए हैं। जबकि करीब 15 हजार से ज्यादा आवेदन आए थे। वह घर और दफ्तर की स्टेयरिंग संग अब वाहनों की स्टेयरिंग भी संभाल रही हैं।
आज के समय में महिलाएं बच्चों को स्कूल छोड़ने से लेकर ऑफिस जाने और खरीदारी करने के लिए किसी का इंतजार नहीं करती हैं। बल्कि खुद ही कार और बाइक-स्कूटी से सारे काम निपटा देती हैं। सड़कों पर भी उनकी धमक है। वहीं, साल दर साल ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने में महिलाओं की संख्या बढ़ रही है। वर्ष 2022-23 में 4185, 2023-24 में 4426 और वर्ष 2024-25 में 4806 महिलाओं का ड्राइविंग लाइसेंस बना है।
करीब 50 महिलाएं सड़कों पर दौड़ा रहीं ई-रिक्शा
महिलाएं सिर्फ शौक के लिए वाहन नहीं चला रहीं, बल्कि रोजगार के तौर पर भी वह वाहनों को सड़कों पर दौड़ा रही हैं। वर्तमान में लगभग 50 महिलाएं ऐसी हैं जो कि ई-रिक्शा चलाकर अपना परिवार चला रही हैं।
ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने वाली महिलाओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है। वहीं, लाइट मोटर वाहन में 75 सौ किलोग्राम वजन तक के वाहन आते हैं। ऐसे में महिला दो पहिया से लेकर चार पहिया तक चला रही हैं। - राजीव चतुर्वेदी, एआरटीओ प्रशासन।
2019 से लेकर अब तक ई-रिक्शा चलाने में महिलाओं की संख्या बढ़ी है। वर्तमान में करीब 50 महिलाएं ऐसी हैं, जो कि ई-रिक्शा चलाकर अपने परिवार का सहारा बनीं हैं। - रघुनाथ द्विवेदी, उपाध्यक्ष, टेंपो-टैक्सी, ई-रिक्शा यूनियन।