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पिचिंग बगैर बनाई शाही-मिर्जापुर रोड फिर बहगुल नदी में बह गई
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कटान करती बहगुल नदी।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
आवागमन प्रतिबंधित होने के बावजूद निकल रहे वाहन, हादसे का खतरा
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शाही। बहगुल नदी से सटे शाही-मिर्जापुर मार्ग भी अफसरों की कमाई का जरिया बन गया है। नदी से कटने के बाद हर साल इसके निर्माण पर लाखों खर्च किए जाते हैं मगर सुरक्षा इंतजाम नहीं किए जाते। पिछले साल निर्माण के दो महीने बाद ही सड़क का करीब 50 मीटर हिस्सा कटकर नदी में समा गया था। इस साल भी सड़क का आधा हिस्सा कटकर नदी में समा चुका है। प्रशासन ने हादसे की आशंका से इस मार्ग पर आवागमन बंद कर दिया है लेकिन छोटे वाहनों के अब भी गुजरने से हादसे की आशंका बनी हुई है।
पिछले साल अप्रैल में 44 लाख से शाही-मिर्जापुर मार्ग का निर्माण कराया गया था। 16 जून को ही बाढ़ में बहगुल पुल के पास सड़क का करीब 50 मीटर हिस्सा नदी में कट गया। इसके बाद मरम्मत न होने से सड़क और बदहाल हो गई। शाही पुल से मिर्जापुर की ओर 200 मीटर आगे नदी सड़क के बराबर में बह रही है। इस साल नदी का पानी घटने पर कटान शुरू हुआ तो यहां कई जगह सड़क दरककर नदी में समा गई। इलाके के लोगों का कहना है कि पिछले साल जब सड़क का निर्माण कराया जा रहा था तो उन्होंने नदी में भी पक्की पिचिंग कराने की मांग की थी ताकि सड़क सुरक्षित रहे लेकिन अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया। दो महीने बाद ही सड़क का 50 मीटर हिस्सा दरककर नदी में समा गया।
पिछले साल अप्रैल में 44 लाख से शाही-मिर्जापुर मार्ग का निर्माण कराया गया था। 16 जून को ही बाढ़ में बहगुल पुल के पास सड़क का करीब 50 मीटर हिस्सा नदी में कट गया। इसके बाद मरम्मत न होने से सड़क और बदहाल हो गई। शाही पुल से मिर्जापुर की ओर 200 मीटर आगे नदी सड़क के बराबर में बह रही है। इस साल नदी का पानी घटने पर कटान शुरू हुआ तो यहां कई जगह सड़क दरककर नदी में समा गई। इलाके के लोगों का कहना है कि पिछले साल जब सड़क का निर्माण कराया जा रहा था तो उन्होंने नदी में भी पक्की पिचिंग कराने की मांग की थी ताकि सड़क सुरक्षित रहे लेकिन अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया। दो महीने बाद ही सड़क का 50 मीटर हिस्सा दरककर नदी में समा गया।
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