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वन्य जीव संरक्षण अधिनियम बरामद सामानों को रिलीज करने का मजिस्ट्रेट को क्षेत्राधिकार
Fri, 13 Aug 2021 10:28 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 13 Aug 2021 10:28 PM IST
सार
अदालत ने स्पष्ट किया कि मजिस्ट्रेट ने आदेश पारित करते समय ही विधिक त्रुटि की है। मामले के संपूर्ण तथ्यों पर विचार नहीं किया इसलिए मजिस्ट्रेट का आदेश यथावत रहने योग्य नहीं है।
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अदालत
- फोटो : file
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विस्तार
सेशन कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में विधि का यह प्रश्न निर्धारित किया कि वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत आरोपित से बरामद सामानों को रिलीज करने का क्षेत्राधिकार मजिस्ट्रेट को प्राप्त है, इसी निष्कर्ष के साथ अधीनस्थ न्यायालय के आदेश को निरस्त कर दिया और निगरानी याचिका स्वीकार कर ली है। मजिस्ट्रेट ने क्षेत्राधिकार नहीं होने का कारण बताकर अर्जी खारिज कर दी थी। यह फैसला अपर सेशन जज भारत सिंह यादव ने बलिया निवासी राहुल राय उर्फ डिंपल राय की निगरानी याचिका पर उनके अधिवक्ता विद्याभूषण दिवेदी एवं लोक अभियोजक एवं वन्य विभाग के अधिवक्ता के तर्कों को सुन कर दिया।
अदालत ने स्पष्ट किया कि मजिस्ट्रेट ने आदेश पारित करते समय ही विधिक त्रुटि की है। मामले के संपूर्ण तथ्यों पर विचार नहीं किया इसलिए मजिस्ट्रेट का आदेश यथावत रहने योग्य नहीं है। अदालत ने मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया कि इस फैसले में दिए गए निर्देशों के अंतर्गत दोनों पक्षों को पुन: सुनकर विधि अनुसार मामले का निस्तारण करें।
अदालत ने यह भी कहा कि मजिस्ट्रेट को वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के व दंड प्रक्त्रिस्या संहिता के प्रावधान के तहत निरुद्ध वस्तुओं के निस्तारण के लिए पूर्ण रूप से क्षेत्राधिकार प्राप्त है। पुलिस ने मुकदमा पंजीकृत किया था कि आरोपित को जब पकड़ा गया तो उनके कब्जे से दो मुंहे सांप का परिवहन किया जा रहा था । मोबाइल फोन , रेलवे विभाग की आईडी ,ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड ,आधार कार्ड अलग-अलग बैंक के एटीएम कार्ड व रुपए बरामद हुए। साथ ही लाइसेंसी पिस्टल , मोबाइल फोन ,कार्ड व अन्य वस्तु भी बरामद हुई इन सामानों को अपने पक्ष में रिलीज कराने के लिए राहुल राय की ओर से मजिस्ट्रेट की अदालत में प्रार्थना पत्र दिया गया था । जिसे मजिस्ट्रेट ने क्षेत्राधिकार न होने के कारण खारिज कर दिया था ।इसी आदेश के विरुद्ध निगरानी याचिका प्रस्तुत की गई थी।
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अदालत ने स्पष्ट किया कि मजिस्ट्रेट ने आदेश पारित करते समय ही विधिक त्रुटि की है। मामले के संपूर्ण तथ्यों पर विचार नहीं किया इसलिए मजिस्ट्रेट का आदेश यथावत रहने योग्य नहीं है। अदालत ने मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया कि इस फैसले में दिए गए निर्देशों के अंतर्गत दोनों पक्षों को पुन: सुनकर विधि अनुसार मामले का निस्तारण करें।
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अदालत ने यह भी कहा कि मजिस्ट्रेट को वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के व दंड प्रक्त्रिस्या संहिता के प्रावधान के तहत निरुद्ध वस्तुओं के निस्तारण के लिए पूर्ण रूप से क्षेत्राधिकार प्राप्त है। पुलिस ने मुकदमा पंजीकृत किया था कि आरोपित को जब पकड़ा गया तो उनके कब्जे से दो मुंहे सांप का परिवहन किया जा रहा था । मोबाइल फोन , रेलवे विभाग की आईडी ,ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड ,आधार कार्ड अलग-अलग बैंक के एटीएम कार्ड व रुपए बरामद हुए। साथ ही लाइसेंसी पिस्टल , मोबाइल फोन ,कार्ड व अन्य वस्तु भी बरामद हुई इन सामानों को अपने पक्ष में रिलीज कराने के लिए राहुल राय की ओर से मजिस्ट्रेट की अदालत में प्रार्थना पत्र दिया गया था । जिसे मजिस्ट्रेट ने क्षेत्राधिकार न होने के कारण खारिज कर दिया था ।इसी आदेश के विरुद्ध निगरानी याचिका प्रस्तुत की गई थी।
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