{"_id":"ba42370e6e1769f7c3b3a0aec0f02631","slug":"why-not-girls-enterd-in-library-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"छात्र लाईब्रेरी जा सकते हैं तो छात्राएं क्यों नहींः हाईकोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
छात्र लाईब्रेरी जा सकते हैं तो छात्राएं क्यों नहींः हाईकोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 26 Nov 2014 12:01 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के मौलाना अब्दुल कलाम पुस्तकालय में छात्राओं का प्रवेश रोकने पर हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की है। कुलपति के निर्णय को भेदभाव पूर्ण और असंवैधानिक बताते हुए कोर्ट ने कहा कि जिस पुस्तकालय में छात्रों को प्रवेश की इजाजत है, वहां छात्राओं को जाने से कैसे रोका जा सकता है।
कोर्ट ने वीसी द्वारा सुरक्षा का हवाला देकर छात्राओं को रोकने पर भी नाराजगी जताते हुए कहा कि विश्वविद्यालय जैसी संस्था द्वारा ऐसे कारण बताना पूरी तरह से अनुचित है क्योंकि परिसर में सुरक्षा देना उनकी जिम्मेदारी है।
विधि छात्रा दीक्षा द्विवेदी और अन्य द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायाधीश डॉ. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल की खंडपीठ ने कुलपति के इस आश्वासन के बाद याचिका निस्तारित कर दी कि अब लाइब्रेरी में सभी को जाने की इजाजत दे दी गई है।
विज्ञापन
कुलपति जमीरुद्दीन शाह की ओर से दाखिल हलफनामे कहा गया कि इसी सत्र से महिला कालेज में पढ़ रही छात्राओं को भी प्रवेश की इजाजत दे दी गई है। कुलपति के हलफनामे में उन कारणों का हवाला दिया गया जिनकी वजह से छात्राओं को प्रवेश से रोका गया।
खंडपीठ ने कहा यह कहना कि छात्राओं के प्रवेश से असुरक्षा बढ़ेगी मनमाना पूर्ण और असंवैधानिक है। लिंग के आधार पर भेदभाव करना संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का उल्लंघन है। संविधान समानता का अधिकार देता है।
खंडपीठ ने कुलपति के उस आदेश पर भी कड़ी टिप्पणी की जिसमें उन्होंने छात्राओं के अभिभावकों को पत्र भेज कर कहा था कि यदि लड़कियां लाइब्रेरी जाती हैं तो अभिभावक स्वयं उनकी सुरक्षा के जिम्मेदार होंगे। कहा कि इस प्रकार का आदेश देना गैर जिम्मेदाराना और असंवैधानिक है। खंडपीठ ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया है कि यदि विश्वविद्यालय सुरक्षा की मांग करता है सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।
उल्लेखनीय है कि एएमयू कुलपति जमीरूद्दीन शाह ने गत दिनों मौलाना आजाद पुस्तकालय में छात्राओं को यह कहते हुए प्रवेश की इजाजत नहीं दी कि छात्राओं के वहां जाने से छात्रों का ध्यान भटकेगा। लाइब्रेरी में स्थान की कमी है। छात्राओं की सुरक्षा की समस्या भी खड़ी होगी।
विज्ञापन
कोर्ट ने वीसी द्वारा सुरक्षा का हवाला देकर छात्राओं को रोकने पर भी नाराजगी जताते हुए कहा कि विश्वविद्यालय जैसी संस्था द्वारा ऐसे कारण बताना पूरी तरह से अनुचित है क्योंकि परिसर में सुरक्षा देना उनकी जिम्मेदारी है।
विज्ञापन
विधि छात्रा दीक्षा द्विवेदी और अन्य द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायाधीश डॉ. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल की खंडपीठ ने कुलपति के इस आश्वासन के बाद याचिका निस्तारित कर दी कि अब लाइब्रेरी में सभी को जाने की इजाजत दे दी गई है।
विज्ञापन
कुलपति जमीरुद्दीन शाह की ओर से दाखिल हलफनामे कहा गया कि इसी सत्र से महिला कालेज में पढ़ रही छात्राओं को भी प्रवेश की इजाजत दे दी गई है। कुलपति के हलफनामे में उन कारणों का हवाला दिया गया जिनकी वजह से छात्राओं को प्रवेश से रोका गया।
खंडपीठ ने कहा यह कहना कि छात्राओं के प्रवेश से असुरक्षा बढ़ेगी मनमाना पूर्ण और असंवैधानिक है। लिंग के आधार पर भेदभाव करना संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का उल्लंघन है। संविधान समानता का अधिकार देता है।
खंडपीठ ने कुलपति के उस आदेश पर भी कड़ी टिप्पणी की जिसमें उन्होंने छात्राओं के अभिभावकों को पत्र भेज कर कहा था कि यदि लड़कियां लाइब्रेरी जाती हैं तो अभिभावक स्वयं उनकी सुरक्षा के जिम्मेदार होंगे। कहा कि इस प्रकार का आदेश देना गैर जिम्मेदाराना और असंवैधानिक है। खंडपीठ ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया है कि यदि विश्वविद्यालय सुरक्षा की मांग करता है सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।
उल्लेखनीय है कि एएमयू कुलपति जमीरूद्दीन शाह ने गत दिनों मौलाना आजाद पुस्तकालय में छात्राओं को यह कहते हुए प्रवेश की इजाजत नहीं दी कि छात्राओं के वहां जाने से छात्रों का ध्यान भटकेगा। लाइब्रेरी में स्थान की कमी है। छात्राओं की सुरक्षा की समस्या भी खड़ी होगी।