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रोक के बावजूद क्यों जारी है जाटों को आरक्षण: हाईकोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 28 Jul 2016 01:40 AM IST
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अदालत
- फोटो : file
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हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से पूछा है कि सुप्रीमकोर्ट की रोक के बावजूद प्रदेश में जाट समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग के तहत आरक्षण क्यों जारी रखा गया है। सुप्रीमकोर्ट ने रामसिंह केस में जाटों को अन्य पिछड़ावर्ग श्रेणी का मानने से इंकार कर दिया था। इसके बाद हाईकोर्ट ने भी एक दिसंबर 2015 को प्रदेश सरकार को आदेश दिया था कि आठ सप्ताह के भीतर सुप्रीमकोर्ट के आदेश के अनुसार निर्णय लिया जाए। इसके बाद भी उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने यहां जाटों को आरक्षण जारी रखा है। इसे लेकर राजवीर और अन्य ने अवमानना याचिका दाखिल की है।
याचिका पर पक्ष रखते हुए अधिवक्ता अरविंद कुमार मिश्र ने कहा कि सुप्रीमकोर्ट ने जाटों को अन्य पिछड़ा वर्ग कोटे में आरक्षण देने से इंकार कर दिया है। इसके बाद उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव से कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए जाटों को आरक्षण संबंधी अधिसूचना रद्द करने की मांग की गई। सरकार ने कोई निर्णय नहीं लिया तो हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई। हाईकोर्ट ने एक दिसंबर 2015 को मुख्य सचिव को इस मामले में आठ सप्ताह में निर्णय लेने को कहा था मगर सरकार ने अब तक कोई निर्णय नहीं लिया है। अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता ने मुख्य सचिव को दो माह में इस मामले पर निर्णय लेने का एक और मौका दिया है। कहा है कि यदि सरकार कोई निर्णय नहीं लेती है तो याची दुबारा अवमानना याचिका दाखिल कर सकता है।
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याचिका पर पक्ष रखते हुए अधिवक्ता अरविंद कुमार मिश्र ने कहा कि सुप्रीमकोर्ट ने जाटों को अन्य पिछड़ा वर्ग कोटे में आरक्षण देने से इंकार कर दिया है। इसके बाद उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव से कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए जाटों को आरक्षण संबंधी अधिसूचना रद्द करने की मांग की गई। सरकार ने कोई निर्णय नहीं लिया तो हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई। हाईकोर्ट ने एक दिसंबर 2015 को मुख्य सचिव को इस मामले में आठ सप्ताह में निर्णय लेने को कहा था मगर सरकार ने अब तक कोई निर्णय नहीं लिया है। अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता ने मुख्य सचिव को दो माह में इस मामले पर निर्णय लेने का एक और मौका दिया है। कहा है कि यदि सरकार कोई निर्णय नहीं लेती है तो याची दुबारा अवमानना याचिका दाखिल कर सकता है।
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