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महिला साथ रहे या नहीं, घरेलू हिंसा से संरक्षण पाने का है अधिकार- हाईकोर्ट

Wed, 14 Jul 2021 07:56 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 14 Jul 2021 07:56 PM IST
सार

  • पति की याचिका में हस्तक्षेप से इनकार

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Whether women live together or not, they have the right to be protected from domestic violence: High Court
अदालत - फोटो : file

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण कानून के तहत महिला पति के साथ रह रही हो या रह चुकी हो, दोनो स्थिति में उसे संरक्षण पाने का अधिकार है। कोर्ट ने पत्नी की ओर से केस दर्ज करने के आदेश एवं कार्यवाही की वैधता की चुनौती देने वाली याचिका पर हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है और कहा है कि याची केस की ग्राह्यता सहित सभी मुद्दे अधीनस्थ अदालत में उठा सकता है। याचिका खारिज होने से उसके अपना पक्ष रखने के अधिकार पर प्रभाव नहीं पड़ेगा।
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याची का कहना था कि वह घरेलू हिंसा का केस दर्ज कराने वाली महिला के साथ एक घर में निवास नहीं कर रहा है। इसलिए घरेलू हिंसा कानून उसके खिलाफ लागू नहीं होगा। इसलिए केस कार्यवाही रद्द की जाए।  न्यायमूर्ति डा. वाईके श्रीवास्तव ने निवेश गुप्ता उर्फ अंकुर गुप्ता व दो अन्य की याचिका पर सुनवाई की।
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7 नवंबर 20 को शांभवी केसरवानी ने निवेश गुप्ता के खिलाफ घरेलू हिंसा कानून के तहत इस्तगासा दायर किया। जिसे पंजीकृत कर कोर्ट सुनवाई की तारीख तय की है। केस कायम करने की वैधता को चुनौती दी गई थी।
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कोर्ट ने कहा, कानून के तहत शारीरिक, यौन, मौखिक, भावनात्मक व आर्थिक रूप से जैसे दहेज उत्पीड़न से संरक्षण की व्यवस्था की गई है। मजिस्ट्रेट को संरक्षण के आदेश देने का अधिकार है। विशेष स्थिति में एक पक्षीय आदेश भी दे सकता है। उसका दायित्व है कि महिला को संविधान के अनुच्छेद 14,15 व 21 के तहत मिले मूल अधिकारों की रक्षा करें।


सरकारी वकील का कहना था कि याचिका समय पूर्व दाखिल की गई है। अभी केस ही पंजीकृत हुआ है। यह माना कि परिवार के बीच सुरक्षा कानून हैं। कोर्ट ने कहा कि विएना समझौता 94, बीजिंग घोषणा 95 में घरेलू हिंसा को मानवाधिकार के खिलाफ माना गया और संयुक्त राष्ट्र संघ ने संरक्षण देने की सलाह दी है। परिवार में अकेली रह रही महिला को संरक्षण देने का कानून है। वह साथ रह रही हो या साथ रह चुकी हो, दोनों स्थितियों में कानून महिला को संरक्षण प्रदान करता है।
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