मौसम की मार : अधिक तापमान से 15 प्रतिशत तक कम हो गई गेहूं की पैदावार
मार्च में ही पारा 40 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया। मुश्किल यह कि सामान्य से अधिक तापमान की स्थिति अप्रैल के पहले पखवारे में भी बनी हुई है। इसका दुष्प्रभाव रबी की फसलों पर भी पड़ा है।
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मार्च और अप्रैल के महीने में अधिक तापमान की वजह से गेहूं की पैदावार को भारी नुकसान हुआ है। गेहूं के दाने कमजोर पड़ने की वजह से पैदावार में 15 से 20 प्रतिशत की कमी की बात कही जा रही है। यमुनापार के कई गांवों में तो 50 फीसदी से भी कम उपज हुई है। इससे किसानों में घोर निराशा है।
मार्च में ही पारा 40 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया। मुश्किल यह कि सामान्य से अधिक तापमान की स्थिति अप्रैल के पहले पखवारे में भी बनी हुई है। इसका दुष्प्रभाव रबी की फसलों पर भी पड़ा है। सबसे अधिक नुकसान गेहूं की फसल को हुआ है। मार्च महीने में अधिक तापमान की वजह से गेहूं की फसल समय से जल्दी तैयार हो गई जिससे दाने कमजोर पड़ गए हैं।
गंगापार में गेहूं की जल्दी बुआई होती है। इसकी वजह से गंगापार में कम नुकसान हुआ है लेकिन यमुनापार में पिछैती की खेती होने के कारण इसका ज्यादा असर हुआ है। मेजा में लोटर गांव के प्रमोद कुमार का कहना है कि शुरुआती दिनों में मौसम काफी अच्छा रहा लेकिन आखिरी दिनों में तापमान ने सारा खेल बिगाड़ दिया। मनुकपुरा के फूल चंद्र का कहना है कि सामान्यत: प्रति क्विंटल आठ से नौ क्विंटल गेहूं की पैदावार होती है, लेकिन इस बार तीन क्विंटल ही उपज मिली है।
मरहा के सुरेंद्र कुमार, रामपुर के आनंद पांडेय आदि का भी यही दर्द है और उनका कहना है कि सबकुछ बर्बाद हो गया है। जिला कृषि अधिकारी सुभाष मौर्या का कहना है कि अधिक तापमान की वजह से गेहूं की फसल को नुकसान हुआ है। कितना नुकसान हुआ है इसका आकलन कराया जा रहा है।
सरसाें को भी नुकसान
इस बार तीन गुने से भी ज्यादा क्षेत्र में सरसों की बुआई हुई थी। इससे किसानों को काफी उम्मीदें थीं लेकिन अधिक तापमान से उनमें निराशा है। पिछैती की फसल को ज्यादा नुकसान हुआ है।
कराया जा रहा सर्वे
गेहूं की पैदावार का आकलन करने केलिए कृषि विभाग की ओर से सर्वे कराया जा रहा है। इस बाबत कई क्षेत्रों में क्रॉप कटिंग कराई जा चुकी है। क्रॉप कटिंग पर प्रशासनिक अमले की भी नजर है। इसकी रिपोर्ट आने पर स्पष्ट हो पाएगा कि अधिक तापमान की वजह से पैदावार कितना कम हुआ है।