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बिना नाम के कैसा रिजल्ट

Fri, 21 Aug 2015 01:43 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Fri, 21 Aug 2015 01:43 AM IST
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What results without names
इलाहाबाद (ब्यूरो)। भर्ती आयोगों को ऐसी पारदर्शी चयन प्रक्रिया अपनानी चाहिए जिससे उनके उपर कोई अंगुली न उठा सके। परीक्षार्थियों को कभी ऐसा नहीं लगना चाहिए कि आयोग ने भर्ती प्रक्रिया में उनके साथ इंसाफ नहीं किया। यह बातें अमर उजाला से बातचीत के दौरान राजस्थान लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष एवं कोटा मुक्त विवि के पूर्व कुलपति प्रो. बीएम शर्मा ने कही। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से पीसीएस-2014 के अंतिम परिणाम में चयनित अभ्यर्थियों के नाम नहीं घोषित करने पर अमर उजाला की ओर से सवाल उठाए जाने पर उन्होंने कहा कि बिना नाम का कैसा रिजल्ट। उन्होंने कहा कि आयोग यदि सही है तो उसे चयनित अभ्यर्थियों का नाम घोषित करने से परहेज नहीं करना चाहिए।
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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की नियुक्ति को लेकर सवाल उठाने पर उन्होंने कहा कि सरकारों को चाहिए कि वह ऐसे व्यक्ति को लोक सेवा आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं की जिम्मेदारी न दें जिनके ऊपर गंभीर आरोप हों। यह जांच अवश्य होनी चाहिए कि उसके ऊपर कोई गंभीर आरोप तो नहीं हैं।
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उन्होंने कहा कि आयोग के अध्यक्ष पर प्रदेश में कानून व्यवस्था का संचालन करने वाले अधिकारियों को चुने जाने की जिम्मेदारी है। ऐसे में अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति में पारदर्शिता होनी चाहिए। प्रो. शर्मा 2012 में लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष के रूप में अपना ढाई वर्ष का कार्यकाल पूरा करके अवकाश ग्रहण किए थे। उन्होंने बताया कि अपने कार्यकाल में उन्होंने राजस्थान लोक सेवा आयोग में पारदर्शिता लाने की पूरी कोशिश की। प्रो. शर्मा उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विवि में एक कार्यक्रम में भाग लेने शहर आए हैं।
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