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प्रयागराज में ढोल नगाड़ों के साथ हुआ भाग्य विधाता का स्वागत
Mon, 13 May 2019 01:15 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 13 May 2019 01:15 AM IST
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- फोटो : प्रयागराज
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जगत तारन गर्ल्स डिग्री कालेज मतदान केंद्र पर वोट करने वाले मतदाता कुछ ज्यादा उल्लास में थे। वहां बहुत भीड़ तो नहीं थी नहीं लेकिन जो पहुंचे वे जोरदार स्वागत से चकित थे। स्कूल की बच्चियों ने उनका ढोल नगाड़ों से स्वागत किया।
इतना ही नहीं स्कूल परिसर में घूसते ही रेड कार्पेट बिछा मिला तो पूरा कैंपस गुब्बारों, फूलों से सजा था। पानी के साथ पेठा भी मिल रहा था। मतदान के बाद सेल्फी प्वाइंट फोटो पर खिंचवाने को लेकर तो काफी उत्साह दिखा। यह नजारा सिर्फ जगत तारन का नहीं था। करीब सभी आदर्श बूथों पर रहा। मीरापुर के रमा देवी बालिका इंटर कालेज परिसर में नृत्य की मुद्रा में पुतले भी थे, जहां बच्चों तथा बड़ों ने फोटो खिंचवाई। ज्वाला देवी इंटर कालेज केंद्र पर पहुंच विवेक के पैर में फ्रैक्चर था। फिर भी वह वोट देने पहुंचे थे। पत्नी के साथ उन्होंने सेल्फी प्वाइंट पर फोटो भी खिंचवाई। कारपेंटरी आदर्श मतदान केंद्र पर परिवार के साथ पहुंचे सूर्यकांत गुप्त व्यवस्था से काफी खुश थे। एसएस राय का कहना था कि इस बार भले ही मतदान प्रतिशत न बढ़े लेकिन ऐसी व्यवस्था आगे भी होती रही तो लोग घरों से वोट डालने के लिए निकलेंगे।
आदर्श मतदान केंद्र के बूथों पर पहला वोट देने वालों को प्रमाणपत्र तथा मेडल देकर सम्मानित किया गया। सीओ बांदा आलोक मिश्र ने बृजबिहारी सहाय इंटर कालेज आदर्श केंद्र के बूथ पर पहला वोट डाला और प्रमाणपत्र हासिल किया। इनके अलावा अन्य केंद्र के बूथों के पहले मतदाताओं को प्रमाणपत्र दिए गए।
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सुबह के नौ बजे। कलेक्ट्रेट के सामने की सड़क। आम दिनों की तुलना में सड़क पर सन्नाटा। एक-दो वाहन तथा कुछ लोग पैदल चले जा रहे हैं। इनमें महिलाओं का समूह भी शामिल है। उनका लक्ष्य मतदान के लिए बिशप जानसन तथा मेरी लूकस स्कूल पहुंचना है। इस नजारे के बीच सदर तहसील परिसर के कोने पर 50-60 लोगों का जमावड़ा है। वहां बड़ी गाड़ी खड़ी हैं और उसमें बैठे शख्स से सभी बात करने की कोशिश कर रहे हैं।
इस सन्नाटे में इस तरह का नजारा चौंकाता है। दरअसल, वह लेबर तिराहा है और मतदान के दिन भी बड़ी संख्या में मजदूरी की तलाश में लोग पहुंचे थे और गाड़ी सवार उनके लिए उम्मीद बनकर आया था। प्रशासन की ओर से मतदान के लिए कारखानों तथा अन्य प्रतिष्ठानों में सवेतनिक अवकाश का आदेश दिया गया है। प्रतिष्ठान बंद भी रहे लेकिन दिहाड़ी मजदूरों के लिए इस तरह का आदेश बेमानी है। मजदूरी की तलाश में आए सोरांव के नान्हू, फाफार्म के दुर्गा का कहना था कि ‘भइया, परिवार का पेट पाली की वोट देई। कौनो सरकार आवे हमका ता रोज काम करके पेट पालै का है।’
दिव्यांग मतदाताओं के लिए बूथ पर विशेष व्यवस्था के दावे किए जा रहे हैं। हर बूथ पर व्हीलचेयर रखने का आदेश दिया गया था। इसके विपरीत भारत स्काउट इंटर कालेज केंद्र पर व्हीलचेयर की व्यवस्था नहीं थी। जबकि, वह आदर्श बूथ था। इसकी वजह से कई दिव्यांग मतदाता बिना वोट डाले ही वापस हो गए।
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इतना ही नहीं स्कूल परिसर में घूसते ही रेड कार्पेट बिछा मिला तो पूरा कैंपस गुब्बारों, फूलों से सजा था। पानी के साथ पेठा भी मिल रहा था। मतदान के बाद सेल्फी प्वाइंट फोटो पर खिंचवाने को लेकर तो काफी उत्साह दिखा। यह नजारा सिर्फ जगत तारन का नहीं था। करीब सभी आदर्श बूथों पर रहा। मीरापुर के रमा देवी बालिका इंटर कालेज परिसर में नृत्य की मुद्रा में पुतले भी थे, जहां बच्चों तथा बड़ों ने फोटो खिंचवाई। ज्वाला देवी इंटर कालेज केंद्र पर पहुंच विवेक के पैर में फ्रैक्चर था। फिर भी वह वोट देने पहुंचे थे। पत्नी के साथ उन्होंने सेल्फी प्वाइंट पर फोटो भी खिंचवाई। कारपेंटरी आदर्श मतदान केंद्र पर परिवार के साथ पहुंचे सूर्यकांत गुप्त व्यवस्था से काफी खुश थे। एसएस राय का कहना था कि इस बार भले ही मतदान प्रतिशत न बढ़े लेकिन ऐसी व्यवस्था आगे भी होती रही तो लोग घरों से वोट डालने के लिए निकलेंगे।
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आदर्श मतदान केंद्र के बूथों पर पहला वोट देने वालों को प्रमाणपत्र तथा मेडल देकर सम्मानित किया गया। सीओ बांदा आलोक मिश्र ने बृजबिहारी सहाय इंटर कालेज आदर्श केंद्र के बूथ पर पहला वोट डाला और प्रमाणपत्र हासिल किया। इनके अलावा अन्य केंद्र के बूथों के पहले मतदाताओं को प्रमाणपत्र दिए गए।
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सुबह के नौ बजे। कलेक्ट्रेट के सामने की सड़क। आम दिनों की तुलना में सड़क पर सन्नाटा। एक-दो वाहन तथा कुछ लोग पैदल चले जा रहे हैं। इनमें महिलाओं का समूह भी शामिल है। उनका लक्ष्य मतदान के लिए बिशप जानसन तथा मेरी लूकस स्कूल पहुंचना है। इस नजारे के बीच सदर तहसील परिसर के कोने पर 50-60 लोगों का जमावड़ा है। वहां बड़ी गाड़ी खड़ी हैं और उसमें बैठे शख्स से सभी बात करने की कोशिश कर रहे हैं।
इस सन्नाटे में इस तरह का नजारा चौंकाता है। दरअसल, वह लेबर तिराहा है और मतदान के दिन भी बड़ी संख्या में मजदूरी की तलाश में लोग पहुंचे थे और गाड़ी सवार उनके लिए उम्मीद बनकर आया था। प्रशासन की ओर से मतदान के लिए कारखानों तथा अन्य प्रतिष्ठानों में सवेतनिक अवकाश का आदेश दिया गया है। प्रतिष्ठान बंद भी रहे लेकिन दिहाड़ी मजदूरों के लिए इस तरह का आदेश बेमानी है। मजदूरी की तलाश में आए सोरांव के नान्हू, फाफार्म के दुर्गा का कहना था कि ‘भइया, परिवार का पेट पाली की वोट देई। कौनो सरकार आवे हमका ता रोज काम करके पेट पालै का है।’
दिव्यांग मतदाताओं के लिए बूथ पर विशेष व्यवस्था के दावे किए जा रहे हैं। हर बूथ पर व्हीलचेयर रखने का आदेश दिया गया था। इसके विपरीत भारत स्काउट इंटर कालेज केंद्र पर व्हीलचेयर की व्यवस्था नहीं थी। जबकि, वह आदर्श बूथ था। इसकी वजह से कई दिव्यांग मतदाता बिना वोट डाले ही वापस हो गए।