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मोरी गेट का लीकेज रोकने को कराई गई वेल्डिंग
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मोरी गेट का लीकेज रोकने के लिए जलकल विभाग ने जलनिगम और सीएनडीएस के तकनीकी अफसरों से मंत्रणा कर वेल्डिंग कराई है। इस प्रयास के बाद भी लीकेज रुका नहीं। वहां पानी रिस रहा है, जो तेज बारिश में मुसीबत का कारण बनेगा वहीं बक्शी बांध पर स्थापित पंपों की मरम्मत की गई लेकिन दो पंप अभी खराब हैं।
बक्शी बांध और मोरी गेट के साथ अन्य पंपिंग स्टेशनों की मरम्मत में लापरवाही अमर उजाला ने उजागर की तो महापौर अभिलाषा गुप्ता नंदी ने इसे गंभीरता से लिया। उन्होंने नगर निगम और जलकल अधिकारियों को मौके का मुआयना कर तुरंत मरम्मत कार्य कराने का निर्देश दिया।
जलकल जीएम हरिश्चंद बाल्मीकि, अधिशासी अभियंता पुरुषोत्तम, सौरभ श्रीवास्तव टीम के साथ मौके पर पहुंचे। 24 घंटे में एक सफलता मिली कि क्षतिग्रस्त पाइप मरम्मत करने के बजाय बदल दिए गए। वहीं पंपों की मरम्मत भी कराई गई। इन स्थानों पर जो कार्य सीएनडीएस ने कराए, उसके लिए प्रोजेक्ट मैनेजर को मौके पर बुलाया गया।
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वरिष्ठ पार्षद कमलेश सिंह का कहना है कि अब मोरी गेट का लीकेज बालू की बोरियां लगाकर ही रोकना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि तेज बारिश से जलभराव का खतरा टला न
हीं है। यहां करीब 50 लाख की लागत से स्थापित नए पंप की जाली तली से डेढ़ मीटर ऊपर लगाने से निष्प्रयोज्य रहेगा। वहीं सीएनडीएस के अफसरों का तर्क है कि यदि तली से सटाकर पंप की सेटिंग की जाएगी तो कचरा फंस जाएगा। ऐन मौके पर इस तरह के दावे शहरियों पर भारी पड़ सकते हैं। वहीं नगर आयुक्त रवि रंजन ने सभी पंपों की रिपोर्ट तलब की है।
अलोपीबाग पंपिंग स्टेशन जस का तस
गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के अफसर तमाम निर्देशों के बाद भी हरकत में नहीं आए हैं। सड़े पाइप पर सीमेंट लगाकर काम बंद कर दिया गया है। मोटरें खुली पड़ी हैं। 650 केवी का ट्रांसफार्मर अभी तक मरम्मत होकर नहीं आया है। ऐसे में तेज बारिश हुई तो शहर में जलभराव होना तय है।
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बक्शी बांध और मोरी गेट के साथ अन्य पंपिंग स्टेशनों की मरम्मत में लापरवाही अमर उजाला ने उजागर की तो महापौर अभिलाषा गुप्ता नंदी ने इसे गंभीरता से लिया। उन्होंने नगर निगम और जलकल अधिकारियों को मौके का मुआयना कर तुरंत मरम्मत कार्य कराने का निर्देश दिया।
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जलकल जीएम हरिश्चंद बाल्मीकि, अधिशासी अभियंता पुरुषोत्तम, सौरभ श्रीवास्तव टीम के साथ मौके पर पहुंचे। 24 घंटे में एक सफलता मिली कि क्षतिग्रस्त पाइप मरम्मत करने के बजाय बदल दिए गए। वहीं पंपों की मरम्मत भी कराई गई। इन स्थानों पर जो कार्य सीएनडीएस ने कराए, उसके लिए प्रोजेक्ट मैनेजर को मौके पर बुलाया गया।
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वरिष्ठ पार्षद कमलेश सिंह का कहना है कि अब मोरी गेट का लीकेज बालू की बोरियां लगाकर ही रोकना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि तेज बारिश से जलभराव का खतरा टला न
हीं है। यहां करीब 50 लाख की लागत से स्थापित नए पंप की जाली तली से डेढ़ मीटर ऊपर लगाने से निष्प्रयोज्य रहेगा। वहीं सीएनडीएस के अफसरों का तर्क है कि यदि तली से सटाकर पंप की सेटिंग की जाएगी तो कचरा फंस जाएगा। ऐन मौके पर इस तरह के दावे शहरियों पर भारी पड़ सकते हैं। वहीं नगर आयुक्त रवि रंजन ने सभी पंपों की रिपोर्ट तलब की है।
अलोपीबाग पंपिंग स्टेशन जस का तस
गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के अफसर तमाम निर्देशों के बाद भी हरकत में नहीं आए हैं। सड़े पाइप पर सीमेंट लगाकर काम बंद कर दिया गया है। मोटरें खुली पड़ी हैं। 650 केवी का ट्रांसफार्मर अभी तक मरम्मत होकर नहीं आया है। ऐसे में तेज बारिश हुई तो शहर में जलभराव होना तय है।