‘बाद में हैं हम हिंदू-मुस्लिम पहले हिंदुस्तानी’
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संगम शोध साहित्य संस्थान की ओर से रविवार को साहित्यकार राम कैलाश पाल ‘प्रयागी’ की काव्य कृति का विमोचन और कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। विशिष्ट अतिथि शैलेंद्र मधुर और कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. आभा श्रीवास्तव ने राम कैलाश पाल की की काव्य कृति मुक्तकश्री एवं इंदिरा गांधी खंड काव्य का विमोचन किया। साहित्य के क्षेत्र में विशेष कार्य करने के लिए डॉ. कलीम सूरी और नरेंद्र सिंह का प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
कवि सम्मेलन में विभिन्न जिलों से आए कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं का दिल जीत लिया। नरेंद्र सिंह आजादी के रचना ‘त्याग भी दो, त्याग भी दो एक पल को स्वार्थ को’, शाहिद सफर ने ‘तुम अपनी छत से चलाओगे बम पता है मुझे’, शैलेंद्र मधुर की रचना ‘मेरी सांसें ही रामायण, मेरी धड़कन ही गीता है, मेरा बचपन निराला, पंत की गलियों में बीता है‘ को खूब पसंद किया गया। डॉ. आभा श्रीवास्तव ने ‘झूठ के चेहरे से पर्दा हटाने आई हूूं’, राम कैलाश ने ‘शान की बात करनी है, तो अपने आप को जानो’ और अशोक अनुरागी ने ‘हर पूरी कर ली कसर धीरे-धीरे, रिश्तों में घोला जहर धीरे-धीरे’ रचनाएं सराही गईं।
कवि सम्मेलन में देवनाथ सिंह, शिबली सना, मखदूम फूलपुरी, अनिल बेधड़क, हुमा अक्सीर आदि ने अपनी रचनाओं से लोगों का दिल जीत लिया। अतिथियों का स्वागत राम कैलाश, संचालन अशोक अनुरागी और धन्यवाद संजय पाल ने दिया। कार्यक्रम में रमेश चंद्र कुशवाहा, मयूर गौड़, नमन श्रीवास्तव, शुभम श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से रविवार को शरत चंद्र लिखित उपन्यास ‘देवदास’ को नौटंकी रूपांतरण में सांस्कृतिक केंद्र में मंचित किया गया। बतौर मुख्य अतिथि वरिष्ठ रंगकर्मी राम चंद्र गुप्ता मौजूद रहे। सूर्यकांत के निर्देशन में कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय से दर्शकों को बांधे रखा। देवदास, पारो और चंद्रमुखी के किरदारों को खूब सराहा गया। प्रेम कहानी नौटंकी रूपांतरण एवं संगीत निर्देशन उदय चंद्र परदेसी का रहा।