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रेती पर लहराईं जूना, अग्नि, आवाहन की धर्मध्वजाएं
Sun, 23 Dec 2018 01:57 AM IST
यशवीर सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
Published by: यशवीर सिंह
Updated Sun, 23 Dec 2018 01:57 AM IST
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प्रयागराज
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो,प्रयागराज
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संगम की रेती पर आस्था का महापर्व आरंभ हुआ। शनिवार को पंच दशनाम जूना अखाड़ा, श्रीपंच अग्नि अखाड़ा और पंचदशनाम आवाहन अखाड़े की धर्मध्वजाएं लहराईं। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच परंपरा के मुताबिक अखाड़ों की छावनी में ध्वजदंड स्थापित किए गए। धर्मध्वजा ही अखाड़ों का पता और उनकी पहचान बताती है। सो उन्हें ऊंचा रखा गया ताकि दूर से ही श्रद्धालु आसानी से वहां पहुंच सकें। परंपरा के मुताबिक संन्यासियों की 52 मढ़ियों के मुताबिक ही ध्वजदंड की ऊंचाई 52 फीट रखी गई। वहीं ध्वजदंड के तने का व्यास तकरीबन डेढ़ से दौ फीट तक रहा। ध्वजदंड पर पताका लहराने के लिए बांस का प्रयोग भी किया गया।
पूजन में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि के अतिरिक्त जूना के श्रीमहंत प्रेमगिरि, प्रवक्ता श्रीमहंत विद्यानंद सरस्वती, हीरापुरी, भगवत पुरी, अविमुक्तानंद, आवाहन के सत्यगिरि जी महाराज, अग्नि अखाड़े के सभापति मुक्तानंद, सोमेश्वरानंद सहित अनेक संत, महात्मा मौजूद थे। हालांकि इस अवसर पर प्रशासन और पुलिस की ओर से किसी अधिकारी के न पहुंचने पर संतों ने नाराजगी जताई।
धर्मध्वजा दंड को लगाने के लिए चारों दिशाओं में रस्से (बंद) बांधे गए। चार बंद चारों दिशाओं, चारों वेदों की प्रतीक हैं। पंच दशनाम जूना अखाड़े के संरक्षक और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री हरिगिरि के मुताबिक मकर संक्रांति, अमावस्या, वसंत पंचमी और महापुरुषों के स्नानपर्वों के साथ इन्हें एक-एक करके खोला जाएगा। भूमि पूजन और धर्मध्वजा लहराने के बाद अब तीनों अखाड़ों की ओर से पेशवाई निकाली जाएगी। परंपरा के मुताबिक पंचदशनाम जूना अखाड़े और अग्नि अखाड़ेकी पेशवाई 25 दिसंबर को निकलेगी जबकि आवाहन की अलग पेशवाई 27 दिसंबर को निकलेगी।
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पूजन में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि के अतिरिक्त जूना के श्रीमहंत प्रेमगिरि, प्रवक्ता श्रीमहंत विद्यानंद सरस्वती, हीरापुरी, भगवत पुरी, अविमुक्तानंद, आवाहन के सत्यगिरि जी महाराज, अग्नि अखाड़े के सभापति मुक्तानंद, सोमेश्वरानंद सहित अनेक संत, महात्मा मौजूद थे। हालांकि इस अवसर पर प्रशासन और पुलिस की ओर से किसी अधिकारी के न पहुंचने पर संतों ने नाराजगी जताई।
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धर्मध्वजा दंड को लगाने के लिए चारों दिशाओं में रस्से (बंद) बांधे गए। चार बंद चारों दिशाओं, चारों वेदों की प्रतीक हैं। पंच दशनाम जूना अखाड़े के संरक्षक और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री हरिगिरि के मुताबिक मकर संक्रांति, अमावस्या, वसंत पंचमी और महापुरुषों के स्नानपर्वों के साथ इन्हें एक-एक करके खोला जाएगा। भूमि पूजन और धर्मध्वजा लहराने के बाद अब तीनों अखाड़ों की ओर से पेशवाई निकाली जाएगी। परंपरा के मुताबिक पंचदशनाम जूना अखाड़े और अग्नि अखाड़ेकी पेशवाई 25 दिसंबर को निकलेगी जबकि आवाहन की अलग पेशवाई 27 दिसंबर को निकलेगी।
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