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Prayagraj News: केपी ट्रस्ट के लिए मतदान 25 को, होर्डिंग-पोस्टर से पटा शहर
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प्रयागराज। एशिया के सबसे बड़े शैक्षणिक ट्रस्ट कायस्थ पाठशाला की प्रबंध समिति के लिए 25 दिसंबर को मतदान से पहले होर्डिंग-पोस्टर वार चरम पर पहुंच गया है। इसके लिए 31,500 से अधिक मतदाता मनपसंद उम्मीदवार का चुनाव करेंगे। खबर है कि उम्मीदवारों ने विदेश में रहने वाले करीब सौ मतदाताओं के अपने खर्चे पर टिकट भी कराए हैं।
अध्यक्ष और 20 सदस्यों वाले ट्रस्ट पर काबिज होने के लिए पूरी जोर-आजमाइश चल रही है। अध्यक्ष पद के लिए सीधा मुकाबला ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष राघवेंद्र नाथ सिंह और डॉ. सुशील सिन्हा के बीच है। दोनों ही गुटों ने चाहे सिविल लाइंस से संगम को जोड़ने वाला महात्मा गांधी मार्ग हो या फिर कानपुर, लखनऊ, वाराणसी राजमार्ग, हर तरफ होर्डिंग-पोस्टर से पाट रखा है। दीवारें वादों-नारों से रंग गई हैं।
केपी ट्रस्ट के मौजूदा अध्यक्ष जितेंद्र नाथ सिंह अपने भाई राघवेंद्र नाथ के लिए एड़ी-चोटी एक किए हुए हैं, तो डॉ. सिन्हा के साथ भी कई पूर्व अध्यक्षों और जन प्रतिनिधियों की टीम लगी हुई है। एक-एक वोट की लड़ाई साख का सवाल बन गई है। दावे-प्रतिदावे तेज हो गए हैं। पांच वर्ष के लिए होने वाले चुनाव के लिए जोर-आजमाइश अंतिम दौर में पहुंच गई है। घर-घर संपर्क अभियान के साथ ही बैठकों के दौर चल रहे हैं।
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अध्यक्ष पद के उम्मीदवार डॉ. सुशील सिन्हा जहां ट्रस्ट की सैकड़ों बीघे भूमि पर बने होटल और व्यावसायिक इस्तेमाल में लाई जाने वाली संपत्तियों को मुक्त कराने, छात्रवृत्ति बढ़ाने के साथ ही शैक्षणिक संस्थाओं के उत्थान का वादा कर रहे हैं, वहीं राघवेंद्र नाथ ने एकता, समाज की प्रतिष्ठा को बढ़ाने का संकल्प दोहराया है। उनका कहना है कि उनके परिवार ने ट्रस्ट के लिए सर्वस्व दान कर दिया है। इसकी साख को घटने नहीं देंगे।
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अध्यक्ष और 20 सदस्यों वाले ट्रस्ट पर काबिज होने के लिए पूरी जोर-आजमाइश चल रही है। अध्यक्ष पद के लिए सीधा मुकाबला ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष राघवेंद्र नाथ सिंह और डॉ. सुशील सिन्हा के बीच है। दोनों ही गुटों ने चाहे सिविल लाइंस से संगम को जोड़ने वाला महात्मा गांधी मार्ग हो या फिर कानपुर, लखनऊ, वाराणसी राजमार्ग, हर तरफ होर्डिंग-पोस्टर से पाट रखा है। दीवारें वादों-नारों से रंग गई हैं।
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केपी ट्रस्ट के मौजूदा अध्यक्ष जितेंद्र नाथ सिंह अपने भाई राघवेंद्र नाथ के लिए एड़ी-चोटी एक किए हुए हैं, तो डॉ. सिन्हा के साथ भी कई पूर्व अध्यक्षों और जन प्रतिनिधियों की टीम लगी हुई है। एक-एक वोट की लड़ाई साख का सवाल बन गई है। दावे-प्रतिदावे तेज हो गए हैं। पांच वर्ष के लिए होने वाले चुनाव के लिए जोर-आजमाइश अंतिम दौर में पहुंच गई है। घर-घर संपर्क अभियान के साथ ही बैठकों के दौर चल रहे हैं।
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अध्यक्ष पद के उम्मीदवार डॉ. सुशील सिन्हा जहां ट्रस्ट की सैकड़ों बीघे भूमि पर बने होटल और व्यावसायिक इस्तेमाल में लाई जाने वाली संपत्तियों को मुक्त कराने, छात्रवृत्ति बढ़ाने के साथ ही शैक्षणिक संस्थाओं के उत्थान का वादा कर रहे हैं, वहीं राघवेंद्र नाथ ने एकता, समाज की प्रतिष्ठा को बढ़ाने का संकल्प दोहराया है। उनका कहना है कि उनके परिवार ने ट्रस्ट के लिए सर्वस्व दान कर दिया है। इसकी साख को घटने नहीं देंगे।