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वीरेंद्र दीक्षित, सच्चिदानंद, त्रिकाल भवंता फर्जी घोषित
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 30 Dec 2017 01:32 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने शुक्रवार को फर्जी बाबाओं की नई सूची जारी कर दी है। इसमें बस्ती के सच्चिदानंद सरस्वती, नई दिल्ली के वीरेंद्र देव दीक्षित कालनेमि के अतिरिक्त इलाहाबाद स्थित परी अखाडे़ की प्रमुख त्रिकाल भवंता शामिल हैं। इससे पहले अखाड़े की ओर से जारी की गई पहली सूची में चौदह नाम शामिल थे। तीन नए नामों को जोड़कर फर्जी बाबाओं की सूची अब सत्रह तक पहुंच गई है।
मठ बाघंबरी गद्दी में हुई परिषद की बैठक में कुल सात प्रस्ताव पारित किए गए। इसके तहत फर्जी बाबाओं की सूची जारी करते हुए श्रद्धालुओं से सनातन धर्म की आस्था को आहत करने वाले बहुरूपिए और मनमुखी बाबाओं से सावधान रहने अपील भी की गई। संतों ने कहा कि जनता को ऐसे बाबाओं से सजग रहना चाहिए जो सनातन धर्म के नाम पर लोगों की आस्था से खिलवाड़ कर रहे हैं।
विमर्श के दौरान सदस्यों ने अलवर के फलाहारी बाबा को फिलहाल अदालत का आखिरी फैसला आने तक सूची से बाहर रखा है। हालांकि सदस्यों ने यह जरूर कहा कि उनके ऊपर तमाम आरोप लगाए गए हैं, इस आधार पर उन्हें तब तक के लिए निलंबित किया गया है, जब तक कि अदालत से आखिरी फैसला नहीं आ जाता है। अदालत के फैसले के बाद ही अखाड़ा परिषद उनके बारे में कोई निर्णय लेगा।
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सदस्यों ने अखाड़ों के स्थायी निर्माण के बारे में अब तक शासन की ओर से कोई पहल न किए जाने पर नाराजगी जताई। कहा, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसके लिए मंडलायुक्त को नियुक्त किया था लेकिन कोई पहल नहीं की गई। ऐसे में मुख्यमंत्री से मंडलायुक्त को पुन: निर्देशित करने की मांग की गई। जिन अखाड़ों की ओर से स्थायी निर्माण के लिए नक्शा प्रस्तुत किया जा चुका है, प्रशासन उनका नक्शा पास करवाकर निर्धारित राशि से निर्माण आरंभ कराए। इस राशि के तहत काम होने के बाद जो निर्माण अधूरा रह जाएगा, उसे अखाड़े अपनी ओर से पूरा कराएंगे। इसी तरह जिन अखाड़ों के पास जमीन नहीं है, उसे प्रशासन जमीन भी उपलब्ध कराए। बैठक का संचालन महामंत्री महंत हरि गिरि ने किया। बैठक में सभी अखाड़ों के प्रतिनिधि मौजूद थे।
अखाड़ा परिषद की ओर से शुक्रवार को जारी दूसरी सूची में झूंसी के एक बाबा का भी नाम शामिल किया गया था लेकिन कई अखाड़ों की ओर से असहमति जताए जाने के बाद उनका नाम सूची से बाहर कर दिया गया।
0 त्रिकाल भवंता ने कहा, परिषद को अधिकार नहीं
अखाड़ा परिषद की ओर से जारी फर्जी बाबाओं की सूची पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए परी अखाड़े की प्रमुख त्रिकाल भवंता ने कहा है कि आरोप लगाने से पहले परिषद अध्यक्ष को बताना चाहिए कि किसी को असली या फर्जी बताने का अधिकार किसने दिया। सरकार इस मामले को संज्ञान में ले, मुकदमा करे और जांच कराए।
कुंभ मेला प्राधिकरण के लिए संतों की एक निगरानी कमेटी बनाए जाने की भी मांग की गई। क हा गया कि अखाडे़ कुंभ मेले के सिरमौर हैं, ऐसे में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और महामंत्री को उसका पदेन अध्यक्ष और महामंत्री बनाया जाए। कमेटी में प्रत्येक अखाड़े से एक-एक सदस्य सहित प्रयागवाल सभा का प्रदेश अध्यक्ष पदेन, आचार्यबाड़ा, दंडी बाड़ा, खाक चौक के अध्यक्ष को भी पदेन शामिल किया जाए। कुंभ मेले में अखाड़े के पास ही उनके महामंडलेश्वरों की भूमि दिए जाने की भी मांग की गई। याद दिलाया गया कि इस बावत विवाद छिड़ने पर वर्ष 2013 में तत्कालीन कुंभ मेला अधिकारी ने वर्ष 2019 में अखाड़े के निकट ही जमीन देने की बात कही थी।
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मठ बाघंबरी गद्दी में हुई परिषद की बैठक में कुल सात प्रस्ताव पारित किए गए। इसके तहत फर्जी बाबाओं की सूची जारी करते हुए श्रद्धालुओं से सनातन धर्म की आस्था को आहत करने वाले बहुरूपिए और मनमुखी बाबाओं से सावधान रहने अपील भी की गई। संतों ने कहा कि जनता को ऐसे बाबाओं से सजग रहना चाहिए जो सनातन धर्म के नाम पर लोगों की आस्था से खिलवाड़ कर रहे हैं।
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विमर्श के दौरान सदस्यों ने अलवर के फलाहारी बाबा को फिलहाल अदालत का आखिरी फैसला आने तक सूची से बाहर रखा है। हालांकि सदस्यों ने यह जरूर कहा कि उनके ऊपर तमाम आरोप लगाए गए हैं, इस आधार पर उन्हें तब तक के लिए निलंबित किया गया है, जब तक कि अदालत से आखिरी फैसला नहीं आ जाता है। अदालत के फैसले के बाद ही अखाड़ा परिषद उनके बारे में कोई निर्णय लेगा।
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सदस्यों ने अखाड़ों के स्थायी निर्माण के बारे में अब तक शासन की ओर से कोई पहल न किए जाने पर नाराजगी जताई। कहा, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसके लिए मंडलायुक्त को नियुक्त किया था लेकिन कोई पहल नहीं की गई। ऐसे में मुख्यमंत्री से मंडलायुक्त को पुन: निर्देशित करने की मांग की गई। जिन अखाड़ों की ओर से स्थायी निर्माण के लिए नक्शा प्रस्तुत किया जा चुका है, प्रशासन उनका नक्शा पास करवाकर निर्धारित राशि से निर्माण आरंभ कराए। इस राशि के तहत काम होने के बाद जो निर्माण अधूरा रह जाएगा, उसे अखाड़े अपनी ओर से पूरा कराएंगे। इसी तरह जिन अखाड़ों के पास जमीन नहीं है, उसे प्रशासन जमीन भी उपलब्ध कराए। बैठक का संचालन महामंत्री महंत हरि गिरि ने किया। बैठक में सभी अखाड़ों के प्रतिनिधि मौजूद थे।
अखाड़ा परिषद की ओर से शुक्रवार को जारी दूसरी सूची में झूंसी के एक बाबा का भी नाम शामिल किया गया था लेकिन कई अखाड़ों की ओर से असहमति जताए जाने के बाद उनका नाम सूची से बाहर कर दिया गया।
0 त्रिकाल भवंता ने कहा, परिषद को अधिकार नहीं
अखाड़ा परिषद की ओर से जारी फर्जी बाबाओं की सूची पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए परी अखाड़े की प्रमुख त्रिकाल भवंता ने कहा है कि आरोप लगाने से पहले परिषद अध्यक्ष को बताना चाहिए कि किसी को असली या फर्जी बताने का अधिकार किसने दिया। सरकार इस मामले को संज्ञान में ले, मुकदमा करे और जांच कराए।
कुंभ मेला प्राधिकरण के लिए संतों की एक निगरानी कमेटी बनाए जाने की भी मांग की गई। क हा गया कि अखाडे़ कुंभ मेले के सिरमौर हैं, ऐसे में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और महामंत्री को उसका पदेन अध्यक्ष और महामंत्री बनाया जाए। कमेटी में प्रत्येक अखाड़े से एक-एक सदस्य सहित प्रयागवाल सभा का प्रदेश अध्यक्ष पदेन, आचार्यबाड़ा, दंडी बाड़ा, खाक चौक के अध्यक्ष को भी पदेन शामिल किया जाए। कुंभ मेले में अखाड़े के पास ही उनके महामंडलेश्वरों की भूमि दिए जाने की भी मांग की गई। याद दिलाया गया कि इस बावत विवाद छिड़ने पर वर्ष 2013 में तत्कालीन कुंभ मेला अधिकारी ने वर्ष 2019 में अखाड़े के निकट ही जमीन देने की बात कही थी।