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Prayagraj News: राहुल गांधी के खिलाफ सिखों पर कथित बयान के मामले में फैसला सुरक्षित
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इलाहाबाद हाईकोर्ट में शुक्रवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सांसद राहुल गांधी के सिख समुदाय को लेकर दिए गए कथित बयान के मामले में सुनवाई पूरी हो गई। न्यायमूर्ति विक्रम डी.चौहान की एकल पीठ ने नागेश्वर मिश्रा व अन्य की याचिका पर फैसला सुरक्षित कर लिया।
वाराणसी निवासी याची ने आरोप लगाया था कि राहुल ने 2024 में अमेरिका यात्रा के दौरान सिख समुदाय को लेकर बयान दिया था। उन्होंने वहां कहा था कि भारत में सिखों को कड़ा पहनने, पगड़ी बांधने और गुरुद्वारे जाने की स्वतंत्रता नहीं है। याची ने इसे लेकर वाराणसी के ट्रायल कोर्ट में एफआईआर दर्ज करने के लिए आवेदन किया था। वहां से मांग खारिज होने पर याची ने हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दायर की।
याची के अधिवक्ता सत्येंद्र कुमार त्रिपाठी ने दलील दी कि राहुल के बयान के अगले ही दिन खालिस्तान समर्थक पन्नू सिंह ने उनकी टिप्पणी का समर्थन किया था। ऐसे में यह कृत्य भारतीय न्याय संहिता की धारा-152 के तहत दंडनीय है। सरकार को एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई करनी चाहिए। सांविधानिक पद और विपक्ष के नेता के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे व्यक्ति को देश विरोधी और गैर-जिम्मेदाराना बयानों से बचना चाहिए।
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वाराणसी निवासी याची ने आरोप लगाया था कि राहुल ने 2024 में अमेरिका यात्रा के दौरान सिख समुदाय को लेकर बयान दिया था। उन्होंने वहां कहा था कि भारत में सिखों को कड़ा पहनने, पगड़ी बांधने और गुरुद्वारे जाने की स्वतंत्रता नहीं है। याची ने इसे लेकर वाराणसी के ट्रायल कोर्ट में एफआईआर दर्ज करने के लिए आवेदन किया था। वहां से मांग खारिज होने पर याची ने हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दायर की।
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याची के अधिवक्ता सत्येंद्र कुमार त्रिपाठी ने दलील दी कि राहुल के बयान के अगले ही दिन खालिस्तान समर्थक पन्नू सिंह ने उनकी टिप्पणी का समर्थन किया था। ऐसे में यह कृत्य भारतीय न्याय संहिता की धारा-152 के तहत दंडनीय है। सरकार को एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई करनी चाहिए। सांविधानिक पद और विपक्ष के नेता के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे व्यक्ति को देश विरोधी और गैर-जिम्मेदाराना बयानों से बचना चाहिए।
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