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verdict : हाईकोर्ट ने दो हत्याओं के दोषियों को फांसी की सजा से किया बरी

Fri, 23 Dec 2022 08:06 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 23 Dec 2022 08:06 PM IST
सार

Allahabad High Court : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मऊ में मार्च 2009 में हुई दो हत्याओं के दोषियों को फांसी की सजा से बरी करते हुए उन्हें जेल से रिहा करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा, सत्र न्यायालय ने सुबूतों, तथ्यों और परिस्थितियों को नजरअंदाज करते हुए फांसी की सजा सुनाई थी।

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Verdict: High Court acquits two murder convicts from death sentence
अदालत - फोटो : file

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मऊ में मार्च 2009 में हुई दो हत्याओं के दोषियों को फांसी की सजा से बरी करते हुए उन्हें जेल से रिहा करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा, सत्र न्यायालय ने सुबूतों, तथ्यों और परिस्थितियों को नजरअंदाज करते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। यह सजा एकतरफा थी। लिहाजा, दोषियों को बरी किया जाता है। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर और न्यायमूर्ति नलिन कुमार श्रीवास्तव ने अकलू चौहान, जयचंद और राम सरन चौहान की ओर से दाखिल अपील का निस्तारण करते हुए दिया है। कोर्ट ने कहा, सत्र न्यायालय से दोषी अपीलकर्ता संदेह का लाभ पाने के हकदार हैं। लिहाजा, उन्हें सजा से बरी किया जाता है।

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कोर्ट ने कहा, इसमें कोई संदेह नहीं कि अभियोजन पक्ष आरोपों को सिद्ध करने में विफल रहा। सत्र न्यायालय इस पर सही से विचार नहीं कर पाया। लिहाजा, अपीलकर्ताओं की अपील स्वीकार की जाती है। अपीलकर्ताओं की ओर से जितेंद्र कुमार और श्रीनिवास यादव ने बहस की। अपीलकर्ताओं पर आरोप है कि उन्होंने अपने नलकूप पर सो रहे गांव के ही राम सनेही और पब्बर मौर्या को गोली मार दी। इससे दोनों की हालत गंभीर हो गई। अस्पताल में उपचार के दौरान दोनों की मौत हो गई। मामले में अकलू चौहान, जय चंद, बेफू चौहान और राम चरन चौहान को आरोपी बनाया गया।
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 ट्रायल के दौरान बेफू चौहान की मौत हो गई। सत्र न्यायालय ने आरोपियों को फांसी की सजा सुनाते हुए 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था। सत्र न्यायालय ने कहा, दोषी अगर जुर्माने की रकम नहीं जमा कर पाते हैं तो राजस्व भूमि से रिकवर किया जाए। दोषियों ने सत्र न्यायालय के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान सत्र न्यायालय केफैसले को पलटते हुए अपीलकर्ताओं को बरी करने का आदेश पारित किया।

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