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नहीं आए कुलपति, छात्रों की बढ़ी नाराजगी
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 30 Jun 2016 01:19 AM IST
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय में शोध (क्र्रेट) और परास्नातक प्रवेश परीक्षा (पीजीएटी) में अनियमितता को लेकर छात्र-छात्राओं का आंदोलन बुधवार को भी जारी रहा। अध्यापकों के आश्वासन के बावजूद कुलपति से वार्ता नहीं हो पाने की वजह से उनकी नाराजगी और बढ़ गई है। इससे नाराज विद्यार्थियों ने भैंस के आगे बीन बजाकर प्रतिकात्मक विरोध दर्ज कराया तो परिसर में जुलूस भी निकाला। विद्यार्थियों ने डीएसडब्ल्यू ऑफिस में अध्यापकों का घेराव किया। उन्होंने बृहस्पतिवार को बड़े आंदोलन की घोषणा की है।
क्रेट और पीजीएटी दोबारा कराने, प्रवेश प्रकोष्ठ के निदेशक को बर्खास्त करने आदि मांग को लेकर विद्यार्थियों का आंदोलन परीक्षा के बाद से ही जारी है। कुलपति दफ्तर पर सोमवार को जुटे छात्रों को अध्यापकों ने आश्वासन दिया था कि बुधवार को उनकी वीसी से वार्ता कराने की कोशिश की जाएगी। इसी सिलसिले में छात्र-छात्राओं का बुधवार को फिर जमावड़ा हुआ। छात्रसंघ भवन पर उन्होंने कुलपति का पुतला दहन किया। इसके बाद वे जुलूस बनाकर डीएसडब्ल्यू ऑफिसर पहुंचे। विद्यार्थियों ने वहां डीएसडब्ल्यू प्रोफेसर हर्ष कुमार के साथ सुरक्षा एवं विद्यार्थी सलाहकार प्रोफेसर माता अंबर तिवारी, चीफ प्रॉक्टर प्रोफेसर आईआर सिद्दीकी का घेराव किया।
वे कुलपति से वार्ता कराने की मांग कर रहे थे, लेकिन उन्हें बताया गया कि कुलपति परिसर में नहीं हैं। इससे उनकी नाराजगी और बढ़ गई। उन्हाेंने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर की तथा बृहस्पतिवार को बड़े आंदोलन की घोषणा की। आंदोलन के क्रम में विद्यार्थियों ने दृश्य कला विभाग के सामने बनी भैंस के सामने बीन बजाकर विरोध जताया। आंदोलन में छात्र नेता विवेकानंद पाठक, छात्रसंघ की निवर्तमान अध्यक्ष ऋचा सिंह, महामंत्री सिद्धार्थ सिंह गोलू, जितेंद्र शुक्ला, नलिनी मिश्रा, अजीत यादव विधायक, अखिलेश गुप्ता, शक्ति रजवार, सुनील मौर्य, जाबिर, अविनाश दुबे, शनि सिंह आदि शामिल रहे।
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इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय कार्यसमिति की बृहस्पतिवार को आपात बैठक बुलाई गई है। 28 जून को दिल्ली में हुई वित्त समिति की बैठक में बीते सत्र के बजट को मंजूरी देने के अलावा कई अन्य निर्णय लिए गए थे। कार्यपरिषद की बैठक में इसे रखा जाएगा। उधर, कुलपति से वार्ता नहीं हो पाने से नाराज छात्र-छात्राओं ने कार्यपरिषद की बैठक में बाधा पहुंचाने की घोषणा की है। इससे बैठक में गतिरोध की आशंका है।
क्रेट और पीजीएटी में अनियमितता के विरोध में आंदोलन के बीच बुधवार को प्रवेश प्रकोष्ठ के निदेशक के समर्थन में भी छात्रों का एक गुट छात्रसंघ पर पहुंचा था। उन्होंने आंदोलनकारियों के खिलाफ नारेबाजी भी की। इससे वहां कुछ देर के लिए तनाव बन गया था।
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क्रेट और पीजीएटी दोबारा कराने, प्रवेश प्रकोष्ठ के निदेशक को बर्खास्त करने आदि मांग को लेकर विद्यार्थियों का आंदोलन परीक्षा के बाद से ही जारी है। कुलपति दफ्तर पर सोमवार को जुटे छात्रों को अध्यापकों ने आश्वासन दिया था कि बुधवार को उनकी वीसी से वार्ता कराने की कोशिश की जाएगी। इसी सिलसिले में छात्र-छात्राओं का बुधवार को फिर जमावड़ा हुआ। छात्रसंघ भवन पर उन्होंने कुलपति का पुतला दहन किया। इसके बाद वे जुलूस बनाकर डीएसडब्ल्यू ऑफिसर पहुंचे। विद्यार्थियों ने वहां डीएसडब्ल्यू प्रोफेसर हर्ष कुमार के साथ सुरक्षा एवं विद्यार्थी सलाहकार प्रोफेसर माता अंबर तिवारी, चीफ प्रॉक्टर प्रोफेसर आईआर सिद्दीकी का घेराव किया।
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वे कुलपति से वार्ता कराने की मांग कर रहे थे, लेकिन उन्हें बताया गया कि कुलपति परिसर में नहीं हैं। इससे उनकी नाराजगी और बढ़ गई। उन्हाेंने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर की तथा बृहस्पतिवार को बड़े आंदोलन की घोषणा की। आंदोलन के क्रम में विद्यार्थियों ने दृश्य कला विभाग के सामने बनी भैंस के सामने बीन बजाकर विरोध जताया। आंदोलन में छात्र नेता विवेकानंद पाठक, छात्रसंघ की निवर्तमान अध्यक्ष ऋचा सिंह, महामंत्री सिद्धार्थ सिंह गोलू, जितेंद्र शुक्ला, नलिनी मिश्रा, अजीत यादव विधायक, अखिलेश गुप्ता, शक्ति रजवार, सुनील मौर्य, जाबिर, अविनाश दुबे, शनि सिंह आदि शामिल रहे।
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इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय कार्यसमिति की बृहस्पतिवार को आपात बैठक बुलाई गई है। 28 जून को दिल्ली में हुई वित्त समिति की बैठक में बीते सत्र के बजट को मंजूरी देने के अलावा कई अन्य निर्णय लिए गए थे। कार्यपरिषद की बैठक में इसे रखा जाएगा। उधर, कुलपति से वार्ता नहीं हो पाने से नाराज छात्र-छात्राओं ने कार्यपरिषद की बैठक में बाधा पहुंचाने की घोषणा की है। इससे बैठक में गतिरोध की आशंका है।
क्रेट और पीजीएटी में अनियमितता के विरोध में आंदोलन के बीच बुधवार को प्रवेश प्रकोष्ठ के निदेशक के समर्थन में भी छात्रों का एक गुट छात्रसंघ पर पहुंचा था। उन्होंने आंदोलनकारियों के खिलाफ नारेबाजी भी की। इससे वहां कुछ देर के लिए तनाव बन गया था।