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स्वामी वासुदेवानंद बोले : रामचरित मानस का अपमान करने वाले स्वामी प्रसाद धूर्त

Tue, 24 Jan 2023 01:14 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 24 Jan 2023 01:14 AM IST
सार

बतौर मुख्य अतिथि राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र के सदस्य स्वामी वासुदेवानंद महाराज ने कहा कि रामचरित मानस पर इस तरह की टिप्पणी का किसी को अधिकार नहीं है। स्वामी प्रसाद मौर्य बड़े धूर्त हैं। उन्हें इसके लिए जनता दंड देगी।

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Vasudevanand said: Swami Prasad sly who insulted Ramcharit Manas
शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती महाराज - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

माघ मेले में सोमवार को ऋषिकेष के स्वामी कृष्णाचार्य के शिविर में हुए संत सम्मेलन में सनातन संस्कृति पर हमले को लेकर चिंता जताई गई। बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर के बाद सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य की ओर से रामचरित मानस को बकवास बताने और इस ग्रंथ पर रोक लगाने वाली टिप्पणी पर संतों में उबाल की स्थिति रही। बतौर मुख्य अतिथि राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र के सदस्य स्वामी वासुदेवानंद महाराज ने कहा कि रामचरित मानस पर इस तरह की टिप्पणी का किसी को अधिकार नहीं है। स्वामी प्रसाद मौर्य बड़े धूर्त हैं। उन्हें इसके लिए जनता दंड देगी।

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सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे रामानुजाचार्य विद्याभास्कर वासुदेवाचार्य ने कहा कि स्वामी प्रसाद मौर्य जैसे लोगों का कोई चरित्र नहीं है। ये वोट के चटोरे हैं। राम चरित मानस का उन्होंने जिस तरह अपमान किया है, उसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। इसके लिए उन पर कार्रवाई की जानी चाहिए। इस दौरान संतों ने गंगा निर्मलीकरण के अलावा भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने का भी मुद्दा उठाया। इस सम्मेलन का विषय था- संत हृदय नवतीत समाना...।

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इस परसंतों ने कहा कि संत समाज न होता तो वेद, पुराण, और ग्रंथ न होते। सनातन धर्म और वेदों की रक्षा संत समाज ने ही की है। इसके साथ ही संतों ने सभी श्रद्धालुओं से रामचरित मानस की चौपाई का अध्ययन करने और अपने धर्म के सभी पहलुओं को जानने की अपील की। पीठाधीश्वर स्वामी कृष्णाचार्य महाराज ने बताया कि रामानुजाचार्य ने लोक कल्याण के लिए गुरुवचन का त्याग किया था।

वह स्वयं ही दुनिया के उद्धार के लिए नरक लोक जाने को तैयार थे। देश में सनातन धर्म के विस्तार के लिए संतों के साथ ही श्रद्धालुओं को और युवाओं को प्रचार-प्रसार करना होगा। उन्होंने कहा कि देश और प्रदेश की सत्ता संतों के हाथ में काबिज है। वहीं स्वामी रामलखन दास ने कहा कि संत समाज न होता तो राष्ट्र और लोक न होते। संतों के त्याग बलिदान ने देश को विश्व के मार्गदर्शक के रूप में स्थापित किया है।

गया से इस कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे स्वामी रामाचार्य ने कहा कि स्वागत समारोह की परंपरा नवनीत ह्रदय से ही प्रारंभ होती है। इससे पहले शुभारंभ रामानुजाचार्य के चित्र पर माल्यार्पण और दीप जलाकर किया गया। इसके बाद सभी संत समाज के साधु संतों को फूल माला पहनाई गई और अंगवस्त्रम् भेंट किया गया। पंडाल में मौजूद हजारों श्रद्धालु गीतों पर थिरकते नजर आए ।माघ मेला सेक्टर तीन में स्थित कृष्ण कुंज आश्रम शिविर में यह संत सम्मेलन किया गया।

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