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वरुण गांधी स्पेशल कोर्ट में तलब

Thu, 29 Nov 2018 02:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज Updated Thu, 29 Nov 2018 02:06 AM IST
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Varun Gandhi summoned in special court
varun gandhi
भाजपा सांसद वरुण गांधी की ओर से भड़काऊ भाषण देने का मुकदमा पीलीभीत स्थानांतरित करने की अर्जी स्पेशलकोर्ट एमपीएमएलए ने खारिज कर दी है। कोर्ट ने वरुण गांधी को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने का निर्देश दिया है। बुधवार को वरुण गांधी के खिलाफ सरकार द्वारा दाखिल फौजदारी अपील की सुनवाई स्पेशल कोर्ट(एमपी एमएलए) के जज पवन कुमार तिवारी ने की।
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कोर्ट ने वरुण गांधी की हाजिरी माफी इस शर्त पर स्वीकार कर ली कि वह अगली नियत तारीख पर कोर्ट में व्यक्तिगत उपस्थित होंगे। प्रकरण पीलीभीत के बरखेड़ा थाने का है। भड़काऊ भाषण देने के  दो मुकदमे में सीजेएम पीलीभीत ने वरुण गांधी को 27 फरवरी 2013 को दोषमुक्त कर दिया था। दोषमुक्त किए जाने के आदेश के खिलाफ सरकार की ओर से अपील प्रस्तुत की गई थी। जिसकी सुनवाई स्पेशल कोर्ट कर रही है।
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स्पेशल कोर्ट में वरुण गांधी के अधिवक्ता की ओर से अर्जी देकर कहा गया कि फौजदारी अपील की सुनवाई का क्षेत्राधिकार स्पेशल कोर्ट को नहीं है इसे वापस सक्षम न्यायालय में ट्रांसफर किया जाए। सुनवाई के बाद कोर्ट ने अर्जी खारिज कर दी और कहा कि हाईकोर्ट के निर्देश पर स्पेशल कोर्ट का गठन किया गया है और एमपी एमएलए के विरुद्ध दर्ज आपराधिक मामलों की सुनवाई का क्षेत्राधिकार इस कोर्ट को प्राप्त है। कोर्ट ने कहा है कि याची चाहें तो  हाईकोर्ट में अंतरण अर्जी दाखिल कर सकते हैं।
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मंत्री उपेन्द्र तिवारी ने किया सरेंडर, मिली जमानत
रास्ता रोक कर प्रदर्शन करने के मुकदमे में बुधवार को प्रदेश के वन मंत्री उपेन्द्र तिवारी ने स्पेशल कोर्ट (एमपी एमएलए) में सरेंडर किया। उन्होंने जमानत के लिए अर्जी प्रस्तुत की, जिस पर सुनवाई के बाद स्पेशल कोर्ट ने जमानत अर्जी मंजूर कर ली। मामले की अगली सुनवाई दस जनवरी 2019 को होगी। यह आदेश स्पेशल जज पवन कुमार तिवारी ने बचाव पक्ष के अधिवक्ता शीतला प्रसाद मिश्र को सुनकर दिया है। घटना 29 मार्च 2013 की बलिया के फेफना थाने की है। तत्कालीन भाजपा के जिला अध्यक्ष उपेंद्र तिवारी पर आरोप है कि अपने समर्थकों के साथ सड़क जाम कर प्रदर्शन किया था। इस प्रकरण में बुधवार को उपेन्द्र तिवारी ने स्पेशल कोर्ट में उपस्थित होकर जमानत अर्जी प्रस्तुत की। राष्ट्रीय राजमार्ग अवरुद्ध करने के एक अन्य मुकदमे में उपेंद्र तिवारी के खिलाफ कोर्ट ने गैर जमानती वारंट किया था। बुधवार को उन्हाेंने वारंट निरस्त करने की अर्जी दी । जिस पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने वारंट निरस्त कर 50 हजार रुपए के निजी मुचलके पर रिहा कर दिया।

प्रयागराज के कर्नलगंज थाने में दर्ज हत्या के प्रयास के तीन मुकदमों में अभियोजन साक्ष्य समाप्त होने के बाद बुधवार को उपेंद्र तिवारी का बयान दर्ज किया गया। अगली सुनवाई सफाई साक्ष्य के लिए सात जनवरी 2019 की तारीख नियत की गई है।
मामला 29 मार्च 1996 का कर्नलगंज थाना क्षेत्र के हिंदू हॉस्टल का है। इस प्रकरण में उपेंद्र तिवारी सहित अन्य पर तीन मुकदमे दर्ज किए गए थे। तीनों मामलों की सुनवाई स्पेशल कोर्ट में की जा रही है। आरोप है कि उपेंद्र तिवारी अपने साथियों के साथ जयशंकर राय पर तमंचे से फायर कर हत्या का प्रयास किया और जान से मारने की धमकी दी थी। विधि विरुद्ध जमाव कर पुलिस पार्टी पर हमला किया और पुलिस पर बम फेंक कर आरक्षी विजय कुमार सहित अन्य लोगों की हत्या का प्रयास किया था।  तीनों मामलों में अभियोजन का साक्ष्य समाप्त हो गया है। अब बचाव पक्ष का साक्ष्य होगा।

आप सांसद संजय सिंह स्पेशल कोर्ट में हुए हाजिर
प्रयागराज। बुधवार को आम आदमी पार्टी के राज्य सभा सांसद संजय सिंह स्पेशल कोर्ट (एमपी एमएलए) में अपने खिलाफ लंबित एक मुकदमे में उपस्थित हुए। मुकदमे की सुनवाई कर रहे स्पेशल जज पवन कुमार तिवारी ने अगली तारीख 21 दिसंबर नियत की है। संजय सिंह के खिलाफ 19 जून 2000 को सुल्तानपुर के कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने समर्थकों के साथ पुरानी हनुमानगढ़ी के पास सड़क जाम कर प्रदर्शन किया और अधिशासी अभियंता का पुतला फूंका। इस मामले में संजय सिंह सहित नौ लोग अभियुक्त बनाए गए हैं। पत्रावली की सुनवाई स्पेशल कोर्ट कर रही है। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता अरविंद त्रिपाठी, यशवीर प्रताप सिंह, बीपी पांडेय आदि लोग उपस्थित रहे।


मंत्री अनिल राजभर कोर्ट में हुए हाजिर
प्रयागराज। बुधवार को प्रदेश के मंत्री अनिल कुमार राजभर स्पेशल कोर्ट में हाजिर हुए। कोर्ट में उनके खिलाफ दो मामले लंबित हैं। घटना 23 जनवरी 2002 की चन्दौली थाने की है। आरोप है कि मंसूर आलम की हत्या का विरोध और मुआवजे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। स्पेशल कोर्ट में सरकार बनाम रामकिशुन आदि की पत्रावली गवाही में लंबित है। रेलपटरी जाम कर प्लेटफार्म पर तोड़फोड़ करने के एक अन्य मुकदमा सरकार बनाम हरिदास आदि के नाम से भी लंबित है। घटना नौ अगस्त 2001 की जीआरपी थाने की है। दोनों मुकदमों में मंत्री राजभर अभियुक्त बनाए गए हैं, जिसकी सुनवाई स्पेशल कोर्ट कर रही है।
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