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पटरी से उतरा मालगाड़ी का इंजन, आठ घंटे ठप रहा ट्रेनों का संचालन
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Sun, 04 Mar 2018 12:50 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
- फोटो : pratapgarh
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प्रतापगढ़ रेलवे स्टेशन पर शुक्रवार की रात मालगाड़ी का इंजन ट्रैक से उतर गया। यह हादसा उस समय हुआ जब (पीक्यूआरएस) मालगाड़ी शंटिंग करते हुए यार्ड की ओर भेजी जा रही थी। घटना मेन लाइन पर होने के कारण लखनऊ, इलाहाबाद, बनारस और फैजाबाद रेल मार्ग पर ट्रेनों का संचालन पूरी तरह से ठप हो गया। प्रतापगढ़ होकर गुजरने वाली ट्रेनें जहां तहां रोेक दी गईं। इंजन को दोबारा पटरी पर लाने और ट्रैक बहाल होने में पूरी रात बीत गई। इसके चलते दर्जन भर ट्रेनों के मुसाफिर करीब आठ घंटे तक फंसे रहे। शनिवार की सुबह रूट बहाल हुआ। जिसके बाद धीरे-धीरे ट्रेनों का संचालन शुरू किया गया। घटना को लेकर आरोप प्रत्यारोप होता रहा।
शुक्रवार की रात करीब पौने दस बजे पांच नंबर लाइन पर पीक्यूआरएस मालगाड़ी खड़ी थी। उसे यार्ड के नौ नंबर लाइन पर लेना था। स्टेशन मास्टर कमर अली ने प्वाइंट देने के बाद लीवर मैन वंशराज से सिग्नल देने को कहा। इसके बाद वाकी टॉकी के जरिए शंटिंग मैन लालजी व अशर्फी लाल को जानकारी दी गई। लालजी रोजाना की तरह पीक्यूआरएस मालगाड़ी को मेन लाइन पर लेकर जेलरोड क्रॉसिंग के पास पहुंचा। आगे बढ़ने के बाद जब लाइन मिली तो वे ट्रेन को बैक करते हुए यार्ड की ओर जाने लगा। बताया जा रहा है कि मालगाड़ी की पूरी बोगी और इंजन का आधा हिस्सा निकल गया तो प्वाइंट खिसक गया। इंजन का पहिया पटरी से उतर गया। इससे मेन लाइन बाधित हो गई। खबर रेलवे के अफसरों के साथ कर्मचारियों को हुई तो हड़कंप मच गया। प्रतापगढ़ होकर गुजरने वाली ट्रेनों को जहां -तहां रोक दिया गया। रात में लखनऊ से एडीआरएम, सीनियर डीओएजी, सीनियर डीएसओ, सीनियर डीएसटी मौके पर पहुंचे। सभी घटना की जांच पड़ताल करने में जुट गए। इसके बाद फैजाबाद और इलाहाबाद से क्रेन मंगवाया गया। क्रेन आने के बाद करीब चार बजे इंजन को दुबारा पटरी पर लाया गया। इसके बाद उसे यार्ड में भेजा गया। पांच बजे के करीब ट्रेनों का संचालन बहाल हुआ। अफसरों ने स्टेशन मास्टर, शंटिंग मैन के साथ लीवर मैन की जांच कराई। जांच में एक भी रेलवे के कर्मचारी फिट मिले। इसके चलते ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों को मुसीबत का सामना करना पड़ा।
लखनऊ और प्रतापगढ़ के रेलवे अफसरों के जांच मेें प्रथम दृष्टया परिचालन और सिग्नल दोनों ही विभाग की लापरवाही सामने आई है। चर्चाओं पर यकीन करें तो कई कर्मचारी लपेटे में आ सकते हैं। खुद को फंसता देखकर जिम्मेदार अधिकारी एक दूसरे पर लापरवाही का आरोप लगाने में जुटे थे। जानकारों का कहना है कि सेफ्टी के लिहाज से प्रतापगढ़ यार्ड में ट्रेनों का संचालन कहीं से भी ठीक नहीं है। ट्रैक और सिग्नल से संबंधी इतनी खामियां हैं कि आए दिन कुछ न कुछ हो रहा है। कर्मचारी का कहना है कि सेफ्टी के लिहाज से जरूरी सामान उनके पास नहीं है। जुगाड़ से काम चलाया जा रहा है। जब भी कुछ होता है छोटे कर्मचारी की गर्दन पकड़ी जाती है। यहां के बारे में रेलवे के बड़े से बड़े अधिकारी को भी बताया जा चुका है, मगर किसी के कान पर जूं नहीं रेंग रही है। जिसका नतीजा शुक्रवार की रात सामने आया। मामला उजागर न होने पाए, इसके लिये जिम्मेदार लोगों ने पहले तो मामले को दबाने की कोशिश की। इसके लिए हर मुमकिन कोशिश की गई। जिससे आसानी से इंजन पटरी पर लाया जा सके। मगर सारी कोशिश बेकार गई। हादसा मेन लाइन पर हुआ था। जिससे दोनों साइड से प्रतापगढ़ आने और जाने वाली गाड़ियां सिग्नल न मिलने से जगह- जगह रुक गईं। स्टेशन अधीक्षक त्रिभुवन मिश्रा ने बताया तकनीक खराबी के कारण इंजन पटरी से उतर गया था। मामले की जांच पड़ताल की जा रही है।
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हादसे की जांच कर रहे स्टेशन के जिम्मेदारों की मानें तो ट्रेन हादसा जल्दबाजी के चलते हुआ। यार्ड में मालगाड़ी को खड़ी करने के बाद लालकुंआ एक्सप्रेस को पास किया जाना था। इसके चलते जिम्मेदार लोग जल्दबाजी में थे। मालगाड़ी की बोगियां ही निकल पाई थी कि लीवरमैन और स्टेशन मास्टर को लगा कि मालगाड़ी यार्ड में पहुंच गई है। प्वाइंट छोड़ चुकी है। इसके चलते प्वाइंट को बदल दिया गया। दो पटरी के बीच बने गैप में इंजन का तीसरा और चौथा पहिया जाकर फंस गया और पटरी से उतर गया। इसको लेकर परिचालन और सिग्नल विभाग के लोग बचाव की मुद्रा में आमने सामने आ गए। दोनों एक दूसरे को दोषी बताने लगे। जिससे स्टेशन पर हंगामा खड़ा हो गया। वेस्ट केबिन पर स्टेशन मास्टर कमर की ड्यूटी थी। यहीं से प्वाइंट बदला गया था। लालजी शन्टिंग करवा रहा था। कर्मियों का आरोप है प्वाइंट की गड़बड़ी रोज ही रहती है। सिग्नल लोवर नहीं होता है। कर्मचारी रोज लोहे की राड से इसके तारों को पीटते हैं। इसके पहले वे कई हादसा बचा चुके हैं। इसकी जानकारी अफसरों को भी है ।
कानपुर से चलकर प्रतापगढ़ आने वाली इंटरसिटी और लखनऊ से आने वाली शटल प्रतापगढ़ नहीं आई। रूट बहाल न होने से इंटर सिटी को चिलबिला में ही रोक दिया गया। झाड़ू मारकर सुबह वहीं से इंटरसिटी को कानपुर तो शटल को लखनऊ के लिए रवाना कर दिया गया। दोनों ट्रेनोंके मुसाफिरों को रात भर रेलवे की लापरवाही का खामियाजा भुगतना पड़ा। इनके हाबड़ा लालकुआ एक्सप्रेस को प्रतापगढ़ स्टेशन पर जहां आठ घंटे के लिए रोक लिया गया था वहीं दिल्ली से चलकर बनारस को जाने वाली काशी विश्वनाथ सात घंटे तक अंतू के पहले ही किसी स्टेशन पर रोक ली गई थी। बरेली पैसेंजर को दो घंटे प्रतापगढ़ में रोका गया। बनारस से चलकर लखनऊ को जाने वाली वन वीपीएल, सरजू एक्सप्रेस, पद्मावत एक्सप्रेस एफपी पैसेंजर, इंटरसिटी इत्यादि गाड़ियां जाम में फंसी होने से घंटों देरी से प्रतापगढ़ पहुंचीं। कई को दूसरे स्टेशन पर रोका गया।
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ट्रैक मरम्मत करवाने के लिए अफसर अपने कर्मचारियों के साथ दिन भर जेल रोड क्रासिंग पर जमे रहे। इसके चलते ट्रेनों को कासन पर गुजारा जा रहा था। कई पैसेंजर ट्रेनों को प्रतापगढ़ स्टेशन पर रोक लिया गया था।
पटरी से पीक्यूआरएस मालगाड़ी का इंजन उतरने की जांच शुरू हो गई है। जांच के बाद रिपोर्ट रेल मुख्यालय को भेजा जाएगा। इसके बाद फिर से जांच टीम गठित होगी। जांच टीम में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अभी किसकी गलती है इसके बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता है।
त्रिभुवन मिश्र, स्टेशन अधीक्षक।
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शुक्रवार की रात करीब पौने दस बजे पांच नंबर लाइन पर पीक्यूआरएस मालगाड़ी खड़ी थी। उसे यार्ड के नौ नंबर लाइन पर लेना था। स्टेशन मास्टर कमर अली ने प्वाइंट देने के बाद लीवर मैन वंशराज से सिग्नल देने को कहा। इसके बाद वाकी टॉकी के जरिए शंटिंग मैन लालजी व अशर्फी लाल को जानकारी दी गई। लालजी रोजाना की तरह पीक्यूआरएस मालगाड़ी को मेन लाइन पर लेकर जेलरोड क्रॉसिंग के पास पहुंचा। आगे बढ़ने के बाद जब लाइन मिली तो वे ट्रेन को बैक करते हुए यार्ड की ओर जाने लगा। बताया जा रहा है कि मालगाड़ी की पूरी बोगी और इंजन का आधा हिस्सा निकल गया तो प्वाइंट खिसक गया। इंजन का पहिया पटरी से उतर गया। इससे मेन लाइन बाधित हो गई। खबर रेलवे के अफसरों के साथ कर्मचारियों को हुई तो हड़कंप मच गया। प्रतापगढ़ होकर गुजरने वाली ट्रेनों को जहां -तहां रोक दिया गया। रात में लखनऊ से एडीआरएम, सीनियर डीओएजी, सीनियर डीएसओ, सीनियर डीएसटी मौके पर पहुंचे। सभी घटना की जांच पड़ताल करने में जुट गए। इसके बाद फैजाबाद और इलाहाबाद से क्रेन मंगवाया गया। क्रेन आने के बाद करीब चार बजे इंजन को दुबारा पटरी पर लाया गया। इसके बाद उसे यार्ड में भेजा गया। पांच बजे के करीब ट्रेनों का संचालन बहाल हुआ। अफसरों ने स्टेशन मास्टर, शंटिंग मैन के साथ लीवर मैन की जांच कराई। जांच में एक भी रेलवे के कर्मचारी फिट मिले। इसके चलते ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों को मुसीबत का सामना करना पड़ा।
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लखनऊ और प्रतापगढ़ के रेलवे अफसरों के जांच मेें प्रथम दृष्टया परिचालन और सिग्नल दोनों ही विभाग की लापरवाही सामने आई है। चर्चाओं पर यकीन करें तो कई कर्मचारी लपेटे में आ सकते हैं। खुद को फंसता देखकर जिम्मेदार अधिकारी एक दूसरे पर लापरवाही का आरोप लगाने में जुटे थे। जानकारों का कहना है कि सेफ्टी के लिहाज से प्रतापगढ़ यार्ड में ट्रेनों का संचालन कहीं से भी ठीक नहीं है। ट्रैक और सिग्नल से संबंधी इतनी खामियां हैं कि आए दिन कुछ न कुछ हो रहा है। कर्मचारी का कहना है कि सेफ्टी के लिहाज से जरूरी सामान उनके पास नहीं है। जुगाड़ से काम चलाया जा रहा है। जब भी कुछ होता है छोटे कर्मचारी की गर्दन पकड़ी जाती है। यहां के बारे में रेलवे के बड़े से बड़े अधिकारी को भी बताया जा चुका है, मगर किसी के कान पर जूं नहीं रेंग रही है। जिसका नतीजा शुक्रवार की रात सामने आया। मामला उजागर न होने पाए, इसके लिये जिम्मेदार लोगों ने पहले तो मामले को दबाने की कोशिश की। इसके लिए हर मुमकिन कोशिश की गई। जिससे आसानी से इंजन पटरी पर लाया जा सके। मगर सारी कोशिश बेकार गई। हादसा मेन लाइन पर हुआ था। जिससे दोनों साइड से प्रतापगढ़ आने और जाने वाली गाड़ियां सिग्नल न मिलने से जगह- जगह रुक गईं। स्टेशन अधीक्षक त्रिभुवन मिश्रा ने बताया तकनीक खराबी के कारण इंजन पटरी से उतर गया था। मामले की जांच पड़ताल की जा रही है।
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हादसे की जांच कर रहे स्टेशन के जिम्मेदारों की मानें तो ट्रेन हादसा जल्दबाजी के चलते हुआ। यार्ड में मालगाड़ी को खड़ी करने के बाद लालकुंआ एक्सप्रेस को पास किया जाना था। इसके चलते जिम्मेदार लोग जल्दबाजी में थे। मालगाड़ी की बोगियां ही निकल पाई थी कि लीवरमैन और स्टेशन मास्टर को लगा कि मालगाड़ी यार्ड में पहुंच गई है। प्वाइंट छोड़ चुकी है। इसके चलते प्वाइंट को बदल दिया गया। दो पटरी के बीच बने गैप में इंजन का तीसरा और चौथा पहिया जाकर फंस गया और पटरी से उतर गया। इसको लेकर परिचालन और सिग्नल विभाग के लोग बचाव की मुद्रा में आमने सामने आ गए। दोनों एक दूसरे को दोषी बताने लगे। जिससे स्टेशन पर हंगामा खड़ा हो गया। वेस्ट केबिन पर स्टेशन मास्टर कमर की ड्यूटी थी। यहीं से प्वाइंट बदला गया था। लालजी शन्टिंग करवा रहा था। कर्मियों का आरोप है प्वाइंट की गड़बड़ी रोज ही रहती है। सिग्नल लोवर नहीं होता है। कर्मचारी रोज लोहे की राड से इसके तारों को पीटते हैं। इसके पहले वे कई हादसा बचा चुके हैं। इसकी जानकारी अफसरों को भी है ।
कानपुर से चलकर प्रतापगढ़ आने वाली इंटरसिटी और लखनऊ से आने वाली शटल प्रतापगढ़ नहीं आई। रूट बहाल न होने से इंटर सिटी को चिलबिला में ही रोक दिया गया। झाड़ू मारकर सुबह वहीं से इंटरसिटी को कानपुर तो शटल को लखनऊ के लिए रवाना कर दिया गया। दोनों ट्रेनोंके मुसाफिरों को रात भर रेलवे की लापरवाही का खामियाजा भुगतना पड़ा। इनके हाबड़ा लालकुआ एक्सप्रेस को प्रतापगढ़ स्टेशन पर जहां आठ घंटे के लिए रोक लिया गया था वहीं दिल्ली से चलकर बनारस को जाने वाली काशी विश्वनाथ सात घंटे तक अंतू के पहले ही किसी स्टेशन पर रोक ली गई थी। बरेली पैसेंजर को दो घंटे प्रतापगढ़ में रोका गया। बनारस से चलकर लखनऊ को जाने वाली वन वीपीएल, सरजू एक्सप्रेस, पद्मावत एक्सप्रेस एफपी पैसेंजर, इंटरसिटी इत्यादि गाड़ियां जाम में फंसी होने से घंटों देरी से प्रतापगढ़ पहुंचीं। कई को दूसरे स्टेशन पर रोका गया।
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ट्रैक मरम्मत करवाने के लिए अफसर अपने कर्मचारियों के साथ दिन भर जेल रोड क्रासिंग पर जमे रहे। इसके चलते ट्रेनों को कासन पर गुजारा जा रहा था। कई पैसेंजर ट्रेनों को प्रतापगढ़ स्टेशन पर रोक लिया गया था।
पटरी से पीक्यूआरएस मालगाड़ी का इंजन उतरने की जांच शुरू हो गई है। जांच के बाद रिपोर्ट रेल मुख्यालय को भेजा जाएगा। इसके बाद फिर से जांच टीम गठित होगी। जांच टीम में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अभी किसकी गलती है इसके बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता है।
त्रिभुवन मिश्र, स्टेशन अधीक्षक।