इलाहाबाद विवि का नाम बदलने के लिए एमएचआरडी ने मांगा प्रस्ताव, नाम बदलने के खिलाफ शिक्षकों ने छेड़ा अभियान
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) समेत देश के चार सबसे पुराने विश्वविद्यालय आज भी अपने पुराने नाम से ही पहचाने जाते हैं, लेकिन अब इविवि का नाम बदले जाने की तैयारी चल रही है। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने इस मामले में इविवि प्रशासन से कार्य परिषद के सदस्यों की राय सहित एक प्रस्ताव मांग लिया है। हालांकि, इविवि के पूर्व एवं वर्तमान शिक्षकों ने ही इस प्रस्ताव का विरोध शुरू कर दिया है और इविवि की पहचान को बनाए रखने के लिए सोशल मीडिया पर मुहिम छेड़ दी है। शिक्षकों का कहना है कि विश्वविद्यालय का नाम बदलने से एक फायदा नहीं होगा लेकिन नुकसान ढेरों होंगे।
मंत्रालय की ओर से इविवि प्रशासन को जारी पत्र में कहा गया है कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय का नाम बदलकर ‘प्रयागराज विश्वविद्यालय’ किए जाने का प्रस्ताव मंत्रालय को दो दिनों में भेज दिया जाएगा। इसके साथ ही मुद्दे पर कार्य परिषद के सदस्यों की राय भी मांगी गई है। पत्र जारी होने के बाद इविवि प्रशासन ने कार्य परिषद के सभी सदस्यों को ई-मेल के माध्यम से पत्र भेजकर उनकी राय मांगी है, ताकि दो दिनों के बाद प्रस्ताव मंत्रालय को भेज दिया जाए। मंत्रालय के इस पत्र की जानकारी होने के बाद शिक्षकों ने इसके विरोध में सोशल मीडिया पर मुहिम शुरू कर दी है।
फेसबुक पेज पर दर्ज कराया विरोध
इविवि के पूर्व शिक्षक प्रो. एके श्रीवास्तव ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा कि ‘हम इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र या अध्यापक रहे हैं, इस बात का हमें गर्व है। मद्रास विश्वविद्यालय, कलकत्ता विश्वविद्यालय, बंबई विश्वविद्यालय और इलाहाबाद विश्वविद्यालय देश के सबसे पुराने चार विश्वविद्यालय हैं। इस बात से मन बेहद दुखी है, गुस्सा भी है और कुछ राजनीतिज्ञों की बुद्धि पर तरस भी आता है कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय का नाम बदलकर उसकी पहचान को खत्म किए जाने का प्रयास चल रहा है’।उन्होंने सवाल उठाए कि आखिर इविवि का नाम बदलकर ‘प्रयागराज विश्वविद्यालय’ किए जाने से क्या फायदा होगा?नाम बदलते ही छात्र-छात्राओं को इविवि के नाम से मिली डिग्री किस काम की रह जाएगी। ऐक्ट, ऑर्डिनेंस और न जने कहां-कहां कितने बदलाव करने होंगे। जब मद्रास, कलकत्ता और बंबई जैसे महानगरों का नाम बदले जाने के बावजूद वहां के विश्वविद्यालयों का नाम नहीं बदला गया तो इविवि के नाम पर आपत्ति क्यों। फेसबुक पर इविवि समेत तमाम विश्वविद्यालयों के शिक्षकों ने प्रो. एके श्रीवास्तव का समर्थन करते हुए इविवि के नाम बदले जाने के प्रस्ताव पर अपना विरोध दर्ज कराया है।