बदल रहा समाज, गोद लेने की प्रक्रिया ऑनलाइन होने के बाद बच्चों को विदेश से भी मिल रहे मां-बाप
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प्रयागराज में शिशुओं को गोद लेने की प्रक्रिया ऑनलाइन होने के बाद इसका दायरा भी बढ़ गया है। गोद लेने की प्रक्रिया को ऑनलाइन करने के बाद इसमें अप्रत्याशित बढ़ोत्तरी हो रही है। खुल्दाबाद स्थित राजकीय शिशुगृह से इस साल जुलाई महिने तक 22 बच्चे गोद लिए गए हैं। यह संख्या पहले के वर्षों की तुलना में कहीं अधिक है।
शिशुगृह से बच्चों को गोद लेने वालों में विदेशी दंपतियों की संख्या भी चौंकाने वाली है। विगत ढाई वर्षों में शिशुगृह के 14 बच्चों को विदेशी दंपतियों ने गोद लिया है। इसके अलावा आंकड़े यह भी कहते हैं कि बच्चों को गोद लेने वाले देश के भीतर के जो दंपति हैं, उनमें से ज्यादातर दिल्ली नोएडा जैसे मेट्रो शहरों के हैं।
2015 से ऑनलाइन की गई थी पूरी प्रक्रिया
शिशुगृह से बच्चों को गोद लेने की पूरी प्रक्रिया 2015 से ऑनलाइन कर दी गई है। इसके बाद से इसके दायरे में साकारात्मक वृद्धी देखी जा रही है। शिशुगृह के अधिकारियों ने बताया कि पहले प्रयागराज और आसपास के जिलों के लोग ही बच्चों को गोद लेते थे, लेकिन प्रक्रिया ऑनलाइन होने के बाद क्षेत्रीय बाधा दूर हो गई है।
शिशुगृह की अधीक्षक पूनम पाल का कहना है कि अब देश के हर कोने से दंपति यहां के बच्चों को गोद लेने के लिए आ रहे हैं। नई व्यवस्था में सेंट्रल एडाप्शन रिसोर्स अॅथारिटी (कारा) के तहत ही गोद लिया जा सकता है। इसकी पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है। जिला प्रोबेशन अधिकारी
पंकज मिश्रा का कहना है कि अब गोद लेने को लेकर लोगों का नजरिया भी बदला है और हिचक टूटी है। लोग शिशुओं को गोद लेने के लिए खुलकर आगे आ रहे हैं।
गोद लिए गए 47 में से 26 बालिकाएं
विगत तीन वर्ष की बात करें तो शिशुगृह के 47 बच्चों को गोद लिया गया है। इनमें 26 बालिकाएं हैं। कुल 47 बच्चों में से 14 बच्चों को विदेशी दंपति ने गोद लिया है। गोद लेने वाले विदेशी परिवारों में अमेरिका के तीन, स्पेन और स्वीडन के दो-दो दंपति हैं। इनके अलावा इटली, फ्रांस और दुबई के परिवार ने भी बच्चों को गोद लिया है।
वर्तमान में विदेश के दो अन्य दंपति ने भी यहां के दो बच्चों को गोद लेने की इच्छा जताई है। इसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। पूनम पाल का कहना है कि पूरी प्रक्रिया आफा के माध्यम से की जाती है। इसमें भारत सरकार के कई मंत्रालय शामिल हैं साथ ही अलग-अलग स्तर पर छानबीन भी की जाती है।
सिंगल पैरेंट्स ने भी लिया गोद
हालांकि बच्चों को गोद लेने के लिए अकेले पुरुष भी आगे आ रहे हैं, लेकिन उनके लिए यह प्रक्रिया काफी जटिल है। दरअसल अकेले पुरुष सिर्फ बालक को ही गोद ले सकते हैं। वो बालिका को गोद नहीं ले सकते। इसकी वजह से गोद लेने वाले अकेले पुरुषों की संख्या कम है।
शिशुगृह से गोद लिए गए बच्चों का विवरण
समाज में हो रहा बड़ा बदलाव
समाजशास्त्री इसे बड़े और सकारात्मक बदलाव के रूप में ले रहे हैं। एसएस खन्ना गर्ल्स डिग्री कालेज की प्राचार्य डॉ.लालिमा सिंह का कहना है कि सिंगल पैरेंट्स के कई कारण हैं। समाज में परिवर्तन तेजी से हो रहा है। संबंधों के मायने और मान्यताएं बदल रही हैं। आज की लड़कियां पति को परमेश्वर मानने के लिए तैयार नहीं हैं। उनके लिए करियर प्राथमिकता में है। ऐसे में तलाक के केस बढ़े हैं तो शादी न करने वालों की भी संख्या अधिक है लेकिन, सभी को आधार की जरूरत होती है। गोद लेने की प्रक्रिया में दोनों को आधार प्राप्त होता है। यह अच्छासंकेत है।
गोद लिए गए बच्चों का विवरण
| वर्ष | बालक | बालिका |
| 2005 | 1 | 1 |
| 2006 | 3 | 10 |
| 2007 | 3 | 6 |
| 2008 | 6 | 5 |
| 2009 | 4 | 9 |
| 2010 | 9 | 6 |
| 2011 | 5 | 9 |
| 2012 | 6 | 8 |
| 2013 | 12 | 16 |
| 2014 | 9 | 9 |
| 2015 | 7 | 10 |
| 2016 | 2 | 10 |
| 2017 | 8 | 8 |
| 2018 | 4 | 5 |
| 2019 | 9 | 13 |
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