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बार-बार बदलने पड़े परिणाम
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 15 Oct 2015 12:00 AM IST
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उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग अध्यक्ष बनने के बाद डॉ.अनिल यादव की ओर से घोषित पहला परिणाम, पीसीएस-2011 सबसे विवादित रहा। आरक्षण की त्रिस्तरीय व्यवस्था हटाने के बाद इसे दोबारा घोषित किया गया। इतना ही नहीं कई प्रश्नों के जवाब को लेकर आयोग को पीसीएस-2011 मुख्य परीक्षा का भी रिजल्ट संशोधित करना पड़ा। पीसीएस-जे 2011 प्रारंभिक परीक्षा के एक पेपर में 13 सवाल ऐसे थे, जिनके गलत जवाब को आयोग ने सही माना। अभ्यर्थियों की आपत्ति के बावजूद उसी आधार पर रिजल्ट घोषित किया गया लेकिन हाईकोर्ट के आदेश के बाद संशोधित रिजल्ट जारी किया गया।
न्यायालय के आदेश के बाद लोअर सबऑर्डिनेट-2013 प्रारंभिक परीक्षा भी आयोग को एक दिन पहले स्थगित करनी पड़ी थी। इसके पदों पर 2009 के बाद भर्ती हो रही थी। इसके बावजूद अभ्यर्थियों को आयु सीमा में कोई छूट नहीं दी गई थी। इसके विरोध में प्रतियोगियों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। इसके अलावा कृषि विभाग में तकनीकी सहायक समेत कई भर्तियों में न्यूनतम योग्यता को लेकर अभ्यर्थी लगातार आंदोलनरत हैं। खास यह इन भर्तियों की लिखित परीक्षा में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी सफल कर दिए गए लेकिन साक्षात्कार देने के लिए पहुंचने पर बताया गया कि वे इस पद की न्यूनतम योग्यता ही नहीं रखते।
आश्चर्यजनक यह कि उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में पीसीएस-2012 की कॉपियां जला दी गईं। आयोग ने आरटीआई के तहत मांगे गए जवाब में खुद यह जानकारी दी। इससे पहले उत्तर पुस्तिकाओं को रद्द करने की नियमावली भी संशोधित की गई। इतना ही नहीं कापियां जलाने का प्रकरण तब हुआ जब पीसीएस-2011 समेत आयोग की पिछली सभी भर्तियों की सीबीआई जांच की मांग को लेकर प्रतियोगियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल है।
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न्यायालय के आदेश के बाद लोअर सबऑर्डिनेट-2013 प्रारंभिक परीक्षा भी आयोग को एक दिन पहले स्थगित करनी पड़ी थी। इसके पदों पर 2009 के बाद भर्ती हो रही थी। इसके बावजूद अभ्यर्थियों को आयु सीमा में कोई छूट नहीं दी गई थी। इसके विरोध में प्रतियोगियों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। इसके अलावा कृषि विभाग में तकनीकी सहायक समेत कई भर्तियों में न्यूनतम योग्यता को लेकर अभ्यर्थी लगातार आंदोलनरत हैं। खास यह इन भर्तियों की लिखित परीक्षा में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी सफल कर दिए गए लेकिन साक्षात्कार देने के लिए पहुंचने पर बताया गया कि वे इस पद की न्यूनतम योग्यता ही नहीं रखते।
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आश्चर्यजनक यह कि उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में पीसीएस-2012 की कॉपियां जला दी गईं। आयोग ने आरटीआई के तहत मांगे गए जवाब में खुद यह जानकारी दी। इससे पहले उत्तर पुस्तिकाओं को रद्द करने की नियमावली भी संशोधित की गई। इतना ही नहीं कापियां जलाने का प्रकरण तब हुआ जब पीसीएस-2011 समेत आयोग की पिछली सभी भर्तियों की सीबीआई जांच की मांग को लेकर प्रतियोगियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल है।
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