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30 माह में दो दर्जन से ज्यादा विवाद, 43 याचिकाएं

Thu, 15 Oct 2015 12:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Thu, 15 Oct 2015 12:02 AM IST
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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष अनिल यादव के मात्र ढाई वर्षों के कार्यकाल में उनके साथ तकरीबन दो दर्जन विवाद जुड़े और भर्ती से जुडे़ विभिन्न मामलों में 43 याचिकाएं दाखिल की गईं।  शुरुआत से ही उनकी नियुक्ति पर लगातार सवाल उठते रहे। लगातार यह विवाद का विषय रहा कि उनकी नियुक्ति मानक के अनुसार नहीं हुई है। इससे पहले वह छह वर्षों तक आयोग में सदस्य भी रहे।
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खास वर्ग और क्षेत्र के लोगों को तवज्जो देने सहित उनकी कार्यशैली पर साक्षात्कार पैनल, पेपर सेटिंग, मूल्यांकन में भी खास वर्ग के लोगों को शामिल करने के  आरोप लगे। इससे इलाहाबाद विश्वविद्यालय के ज्यादातर वरिष्ठ शिक्षकों ने आयोग के साक्षात्कार पैनल में शामिल होने तथा मूल्यांकन से मना कर दिया। कई ने तो आयोग पर अच्छा व्यवहार नहीं किए जाने का भी आरोप लगाया है।
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उन पर अफसरों और कर्मचारियों के साथ तानाशाही रवैया अपनाने का भी आरोप लगा। कर्मचारियों को आयोग की भर्तियों में धांधली तथा अध्यक्ष के खिलाफ बोलना भी भारी पड़ा। चार कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा चुकी है। खास यह कि इसके खिलाफ यूनियन ने आवाज उठाई, धरना भी दिया लेकिन बाहर किसी की बोलने की हिम्मत नहीं हुई। सबकुछ आयोग परिसर के भीतर हुआ। डॉ.अनिल पर साक्षात्कार के लिए पहुंचे अभ्यर्थियों के साथ अच्छा व्यवहार नहीं करने का भी आरोप है।
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शायद यह अनिल यादव के कार्यकाल में ही संभव था कि इंटरव्यू पैनल में शामिल विषय विशेषज्ञों के नाराज होकर जाने के बावजूद साक्षात्कार लिया गया। राजकीय महाविद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती के लिए हुए साक्षात्कार में बीएचयू के प्रोफेसर चौथीराम और इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग अध्यक्ष प्रोफेसर मुश्ताक अली को बतौर विषय विशेषज्ञ पैनल में शामिल किया गया था लेकिन आयोग के सदस्य ने उनके साथ दुर्व्यवहार कर दिया। इसके विरोध में दोनों बिना इंटरव्यू लिए ही वापस चले गए और उन्होंने आगे से आयोग में न जाने का भी निर्णय ले लिया। इसके बावजूद उस दिन साक्षात्कार हुआ। एक्सपर्ट कहां से पहुंचे, यह अब भी सवाल बना हुआ है।
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