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अध्यक्ष के खिलाफ आंदोलन में फुंक गए करोड़ों
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 15 Oct 2015 12:01 AM IST
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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष डॉ.अनिल यादव के खिलाफ हुए उग्र आंदोलनों में विगत ढाई वर्ष में करोड़ों रुपये स्वाहा हो गए। आगजनी में एक अनुमान की मुताबिक सिर्फ पुलिस विभाग को दो करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान उठाना पड़ा है। रोडवेज, व्यापारियाें तथा आम लोगों की इससे कई गुना संपत्ति नुकसान हो गई। आंदोलनाें की वजह से प्रभावित क्षेत्रों में 30 से अधिक दिन दुकानें भी बंद रहीं जिससे करोड़ों का व्यापारिक लेन-देन प्रभावित रहा।
त्रिस्तरीय आरक्षण व्यवस्था के विरोध में 15 जुलाई को उग्र आंदोलनाें की शुरुआत हुई।
इस दिन छात्रों और प्रतियोगियों ने जमकर उत्पात मचाया। इसमें सिविल लाइंस बस अड्डे के पास कई बसों में तोड़फोड़ की गई। बड़ी संख्या में छात्र बस अड्डा परिसर में भी घुस गए तथा दर्जनाें बसों में तोड़फोड़ की। आगजनी में कई माल, दुकानों पर भी पत्थरबाजी की जिससे काफी नुकसान हुआ। जुलाई में दो मौके और आए जब लाखों रुपये की संपत्ति बवाल और आगजनी की भेंट चढ़ गई। इसके बाद आयोग ने आरक्षण की पुरानी व्यवस्था बहाल कर दी लेकिन प्रतियोगियों का आंदोलन समाप्त नहीं हुआ। उन्होंने अध्यक्ष को हटाने तथा भर्तियों की सीबीआई जांच की मांग को लेकर तेज आंदोलन शुरू कर दिया।
फैसला वापस लेने के विरोध में आरक्षण समर्थकों ने भी बवाल शुरू कर दिया। उनकी ओर से 17 सितंबर को महापंचायत की घोषणा की गई जिसमें जनता दल यूनाइटेड के अध्यक्ष शरद यादव और अपना दल की अनुप्रिया पटेल को भी संबोधित करना था लेकिन दोनों नेताओं को एक दिन पहले रास्ते में ही गिरफ्तार कर लिया गया। आंदोलन की अगुवाई कर रहे छात्र नेताओं, प्रतियोगियों को भी जगह-जगह रोकते हुए गिरफ्तार किया गया। विरोध में शहर ही नहीं गांवों में भी जमकर आगजनी हुई। कई ऐसे मौके भी आए जब प्रतियोगियों के दोनों गुट आमने-सामने आए। टकराव में सिविल लाइंस के अलावा छोटा बघाड़ा, सलोरी आदि मोहल्लों में कई दुकानों और बसाें में तोड़फोड़ हुई तो पूरे शहर में तनाव भी बना रहा।
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छोटी-बड़ी घटनाओं के बाद पिछले साल दो जनवरी को एक बार फिर पूरा शहर, आयोग अध्यक्ष के खिलाफ शुरू आंदोलनों की आग में जला। इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ भवन पर चल रहे अनशन के समर्थन में दो जनवरी को भारी भीड़ जुटी। नोकझोंक के बाद पुलिस परिसर में घुसकर छात्रों और प्रतियोगियों की जमकर धुनाई की। विरोध में छात्रों और प्रतियोगियों ने पूरे शहर में तोड़फोड़, आगजनी की। छात्र नेताओं की गिरफ्तारी के विरोध में यह तांडव तीन और चार जनवरी को भी जारी रहा। समय-समय पर विरोध प्रदर्शन होता रहा। आयोग अध्यक्ष के खिलाफ छात्रों और प्रतियोगियों का आंदोलन चल ही रहा था कि पेपर लीक होने के बाद इसमें एक फिर तेजी आ गई और 15 अप्रैल को बड़ा आंदोलन हुआ।
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त्रिस्तरीय आरक्षण व्यवस्था के विरोध में 15 जुलाई को उग्र आंदोलनाें की शुरुआत हुई।
इस दिन छात्रों और प्रतियोगियों ने जमकर उत्पात मचाया। इसमें सिविल लाइंस बस अड्डे के पास कई बसों में तोड़फोड़ की गई। बड़ी संख्या में छात्र बस अड्डा परिसर में भी घुस गए तथा दर्जनाें बसों में तोड़फोड़ की। आगजनी में कई माल, दुकानों पर भी पत्थरबाजी की जिससे काफी नुकसान हुआ। जुलाई में दो मौके और आए जब लाखों रुपये की संपत्ति बवाल और आगजनी की भेंट चढ़ गई। इसके बाद आयोग ने आरक्षण की पुरानी व्यवस्था बहाल कर दी लेकिन प्रतियोगियों का आंदोलन समाप्त नहीं हुआ। उन्होंने अध्यक्ष को हटाने तथा भर्तियों की सीबीआई जांच की मांग को लेकर तेज आंदोलन शुरू कर दिया।
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फैसला वापस लेने के विरोध में आरक्षण समर्थकों ने भी बवाल शुरू कर दिया। उनकी ओर से 17 सितंबर को महापंचायत की घोषणा की गई जिसमें जनता दल यूनाइटेड के अध्यक्ष शरद यादव और अपना दल की अनुप्रिया पटेल को भी संबोधित करना था लेकिन दोनों नेताओं को एक दिन पहले रास्ते में ही गिरफ्तार कर लिया गया। आंदोलन की अगुवाई कर रहे छात्र नेताओं, प्रतियोगियों को भी जगह-जगह रोकते हुए गिरफ्तार किया गया। विरोध में शहर ही नहीं गांवों में भी जमकर आगजनी हुई। कई ऐसे मौके भी आए जब प्रतियोगियों के दोनों गुट आमने-सामने आए। टकराव में सिविल लाइंस के अलावा छोटा बघाड़ा, सलोरी आदि मोहल्लों में कई दुकानों और बसाें में तोड़फोड़ हुई तो पूरे शहर में तनाव भी बना रहा।
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छोटी-बड़ी घटनाओं के बाद पिछले साल दो जनवरी को एक बार फिर पूरा शहर, आयोग अध्यक्ष के खिलाफ शुरू आंदोलनों की आग में जला। इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ भवन पर चल रहे अनशन के समर्थन में दो जनवरी को भारी भीड़ जुटी। नोकझोंक के बाद पुलिस परिसर में घुसकर छात्रों और प्रतियोगियों की जमकर धुनाई की। विरोध में छात्रों और प्रतियोगियों ने पूरे शहर में तोड़फोड़, आगजनी की। छात्र नेताओं की गिरफ्तारी के विरोध में यह तांडव तीन और चार जनवरी को भी जारी रहा। समय-समय पर विरोध प्रदर्शन होता रहा। आयोग अध्यक्ष के खिलाफ छात्रों और प्रतियोगियों का आंदोलन चल ही रहा था कि पेपर लीक होने के बाद इसमें एक फिर तेजी आ गई और 15 अप्रैल को बड़ा आंदोलन हुआ।