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UPRTOU: 'जाति के लिए नहीं...छात्रों के कल्याण के लिए हैं विश्वविद्यालय', समारोह में बोलीं राज्यपाल आनंदीबेन
Thu, 12 Sep 2024 02:21 PM IST
निकिता गुप्ता
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: निकिता गुप्ता
Updated Thu, 12 Sep 2024 02:21 PM IST
सार
राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में कहा कि विश्वविद्यालय जाति के लिए नहीं, बल्कि सभी छात्रों के कल्याण के लिए होते हैं।।
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राज्यपाल आनंदी बेन पटेल
- फोटो : amar ujala
विस्तार
उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल और कुलाधिपति आनंदी बेन पटेल ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय किसी जाति विशेष के लिए नहीं होते, बल्कि लाखों-करोड़ों छात्रों के विकास और कल्याण के लिए होते हैं। समारोह में राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालयों का उद्देश्य सभी जातियों, पंथों और समुदायों के छात्रों को समान अवसर प्रदान करना है और शिक्षा को चहारदीवारी से बाहर निकालकर आंगनबाड़ी तक पहुंचाना चाहिए।
राज्यपाल ने समारोह में अपने संबोधन में जातिगत आधार पर विश्वविद्यालयों में आंतरिक समूहों की शिकायतों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, "हम सब भारत माता की संतान हैं, और यही हमारी जाति है। हमें एक भाव से काम करना चाहिए। केवल इस तरह से हम अच्छा काम कर पाएंगे।
उन्होंने शिक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह आवश्यक है कि शिक्षा को रोजगार और कौशल से जोड़ा जाए। राज्यपाल ने विद्यार्थियों को इंडस्ट्री के साथ इंटर्नशिप के माध्यम से जुड़ने का महत्व समझाया और भारत सरकार द्वारा तैयार की गई योजनाओं का उल्लेख किया।
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राज्यपाल ने विश्वविद्यालय में शिक्षार्थियों की संख्या पर असंतोष व्यक्त किया, विशेषकर कानपुर और लखनऊ क्षेत्रीय केंद्रों में जहां संख्या 100 से भी कम है। उन्होंने कहा कि यह संख्या बहुत कम है और इसे बढ़ाया जाना चाहिए। कुल 80 हजार नामांकित शिक्षार्थियों की संख्या को भी बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।
इसके अतिरिक्त, राज्यपाल ने समर्थ पोर्टल के महत्व पर प्रकाश डाला और बताया कि इसके लागू होने से विश्वविद्यालयों की प्रवेश प्रक्रिया पर होने वाले सालाना 200 करोड़ रुपये के खर्च में बचत होगी। उन्होंने कहा कि समर्थ पोर्टल पर अब तक हुए काम की समीक्षा 15-20 दिनों के भीतर ऑनलाइन की जाएगी।
राज्यपाल की टिप्पणियों और निर्देशों के माध्यम से स्पष्ट हो गया है कि वे शिक्षा के क्षेत्र में सुधार और विकास को लेकर गंभीर हैं, और इसका उद्देश्य सभी छात्रों को समान अवसर प्रदान करना है।
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राज्यपाल ने समारोह में अपने संबोधन में जातिगत आधार पर विश्वविद्यालयों में आंतरिक समूहों की शिकायतों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, "हम सब भारत माता की संतान हैं, और यही हमारी जाति है। हमें एक भाव से काम करना चाहिए। केवल इस तरह से हम अच्छा काम कर पाएंगे।
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उन्होंने शिक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह आवश्यक है कि शिक्षा को रोजगार और कौशल से जोड़ा जाए। राज्यपाल ने विद्यार्थियों को इंडस्ट्री के साथ इंटर्नशिप के माध्यम से जुड़ने का महत्व समझाया और भारत सरकार द्वारा तैयार की गई योजनाओं का उल्लेख किया।
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राज्यपाल ने विश्वविद्यालय में शिक्षार्थियों की संख्या पर असंतोष व्यक्त किया, विशेषकर कानपुर और लखनऊ क्षेत्रीय केंद्रों में जहां संख्या 100 से भी कम है। उन्होंने कहा कि यह संख्या बहुत कम है और इसे बढ़ाया जाना चाहिए। कुल 80 हजार नामांकित शिक्षार्थियों की संख्या को भी बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।
इसके अतिरिक्त, राज्यपाल ने समर्थ पोर्टल के महत्व पर प्रकाश डाला और बताया कि इसके लागू होने से विश्वविद्यालयों की प्रवेश प्रक्रिया पर होने वाले सालाना 200 करोड़ रुपये के खर्च में बचत होगी। उन्होंने कहा कि समर्थ पोर्टल पर अब तक हुए काम की समीक्षा 15-20 दिनों के भीतर ऑनलाइन की जाएगी।
राज्यपाल की टिप्पणियों और निर्देशों के माध्यम से स्पष्ट हो गया है कि वे शिक्षा के क्षेत्र में सुधार और विकास को लेकर गंभीर हैं, और इसका उद्देश्य सभी छात्रों को समान अवसर प्रदान करना है।