{"_id":"60fad54e8ebc3e58344458bd","slug":"uppsc-selection-of-14-candidates-for-the-post-of-principal-canceled","type":"story","status":"publish","title_hn":"यूपीपीएससी : प्रधानाचार्य पद पर 14 अभ्यर्थियों का चयन निरस्त","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यूपीपीएससी : प्रधानाचार्य पद पर 14 अभ्यर्थियों का चयन निरस्त
Fri, 23 Jul 2021 08:12 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 23 Jul 2021 08:12 PM IST
सार
- सुप्रीम कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद यूपीपीएससी ने बदला परिणाम
- पीसीएस-2018 के तहत 83 पदों पर हुई थी भर्ती, चयन में धांधली के लगे थे आरोप
विज्ञापन
UPPSC
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अनुभव प्रमाणपत्र के विवाद में सुप्रीम कोर्ट से विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) खारिज होने के बाद उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) ने पीसीएस-2018 के तहत प्रधानाचार्य, राजकीय इंटर कॉलेज के पद पर चयनित 14 अभ्यर्थियों का चयन निरस्त कर दिया है। संशोधित परिणाम में श्रेष्ठताक्रम के अनुसार 14 अन्य अभ्यर्थियों को चयनित घोषित किया गया है। अभ्यर्थियों ने चयन में धांधली का आरोप लगाते हुए न्यायालय में याचिका दाखिल की थी।
आयोग ने पीसीएस-2018 का अंतिम चयन परिणाम 11 सितंबर 2020 को जारी किया था। इसमें प्रधानाचार्य, राजकीय इंटर कॉलेज के 83 पद भी शामिल थे।
प्रधानाचार्य के परिणाम में विभिन्न वांछित अभिलेख प्रस्तुत न कर पाने के कारण 33 अभ्यर्थी औपबंधिक रूप से चयनित घोषित किए गए थे। औपबंधिक रूप से सफल घोषित अभ्यर्थियों के प्रधानाचार्य पद पर निर्धारित अनिवार्य अर्हता धारित न करने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका (अशोक कुमार व छह अन्य एवं बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य) योजित की गई थी। आयोग के सचिव जगदीश के अनुसार इस याचिका पर हाईकोर्ट द्वारा सुनवाई के बाद 19 फरवरी 2021 को जारी अंतिम आदेश के अनुपालन में प्रधानाचार्य पद का परिणाम संशोधित किया गया है।
प्रधानाचार्य, राजकीय इंटर कॉलेज की 83 रिक्तियों के परिणाम में औपबंधिक रूप से सफल घोषित कुल 33 अभ्यर्थियों में से 14 अभ्यर्थियों का चयन परिणाम/अभ्यर्थन आयोग ने निरस्त कर दिया है, क्योंकि इन्होंने साक्षात्कार वाले दिन निर्धारित प्रारूप पर वांछित अनुभव प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं किए थे। इन 14 अभ्यर्थियों का चयन निरस्त किए जाने के कारण रिक्त हुए 14 पदों पर अवशेष श्रेष्ठता सूची में से उन 14 अन्य अभ्यर्थियों को श्रेष्ठताक्रम के अनुसार सफल घोषित किया गया है, जिन्होंने साक्षात्कार वाले दिन वांछित अनुभव प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए थे।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट तक लड़े अभ्यर्थी
अनुभव प्रमाणपत्र के मामले में अभ्यर्थी सुप्रीम कोर्ट तक लड़े। प्रतियोगी छात्रों ने भर्ती में धांधली का आरोप लगाते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की थी, जिसमें कोर्ट की सिंगल बेंच ने 19 फरवरी 2021 को परीक्षा परिणाम संशोधित करने का आदेश दिया था। इसके विरुद्ध उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने उच्च न्यायालय में विशेष अपील दायर की थी। उच्च न्यायालय की डबल बेंच ने पांच जुलाई को आयोग की अपील खारिज कर दी थी। अपील खारिज होने के बाद आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट ने आयोग की याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद आयोग को परिणाम संशोधित करना पड़ा।
विज्ञापन
आयोग ने पीसीएस-2018 का अंतिम चयन परिणाम 11 सितंबर 2020 को जारी किया था। इसमें प्रधानाचार्य, राजकीय इंटर कॉलेज के 83 पद भी शामिल थे।
प्रधानाचार्य के परिणाम में विभिन्न वांछित अभिलेख प्रस्तुत न कर पाने के कारण 33 अभ्यर्थी औपबंधिक रूप से चयनित घोषित किए गए थे। औपबंधिक रूप से सफल घोषित अभ्यर्थियों के प्रधानाचार्य पद पर निर्धारित अनिवार्य अर्हता धारित न करने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका (अशोक कुमार व छह अन्य एवं बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य) योजित की गई थी। आयोग के सचिव जगदीश के अनुसार इस याचिका पर हाईकोर्ट द्वारा सुनवाई के बाद 19 फरवरी 2021 को जारी अंतिम आदेश के अनुपालन में प्रधानाचार्य पद का परिणाम संशोधित किया गया है।
विज्ञापन
प्रधानाचार्य, राजकीय इंटर कॉलेज की 83 रिक्तियों के परिणाम में औपबंधिक रूप से सफल घोषित कुल 33 अभ्यर्थियों में से 14 अभ्यर्थियों का चयन परिणाम/अभ्यर्थन आयोग ने निरस्त कर दिया है, क्योंकि इन्होंने साक्षात्कार वाले दिन निर्धारित प्रारूप पर वांछित अनुभव प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं किए थे। इन 14 अभ्यर्थियों का चयन निरस्त किए जाने के कारण रिक्त हुए 14 पदों पर अवशेष श्रेष्ठता सूची में से उन 14 अन्य अभ्यर्थियों को श्रेष्ठताक्रम के अनुसार सफल घोषित किया गया है, जिन्होंने साक्षात्कार वाले दिन वांछित अनुभव प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए थे।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट तक लड़े अभ्यर्थी
अनुभव प्रमाणपत्र के मामले में अभ्यर्थी सुप्रीम कोर्ट तक लड़े। प्रतियोगी छात्रों ने भर्ती में धांधली का आरोप लगाते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की थी, जिसमें कोर्ट की सिंगल बेंच ने 19 फरवरी 2021 को परीक्षा परिणाम संशोधित करने का आदेश दिया था। इसके विरुद्ध उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने उच्च न्यायालय में विशेष अपील दायर की थी। उच्च न्यायालय की डबल बेंच ने पांच जुलाई को आयोग की अपील खारिज कर दी थी। अपील खारिज होने के बाद आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट ने आयोग की याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद आयोग को परिणाम संशोधित करना पड़ा।