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आयु सीमा और अवसर कम हुए तो होगा विरोध
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- फोटो : अमर उजाला
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पीसीएस परीक्षा में शामिल होने की आयु सीमा और अवसर कम करने पर होगा आंदोलन
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से पीसीएस परीक्षा में शामिल होने की आयु सीमा और अवसर कम करने का प्रतियोगियों ने विरोध शुरू कर दिया है। भ्रष्टाचार मुक्ति मोर्चा के बैनर तले आयोग के खिलाफ एकजुट हुए प्रतियोगी छात्रों का कहना है कि वर्तमान लोक सेवा आयोग अध्यक्ष भ्रष्टाचार के मुद्दे पर तो चुप्पी साधे हैं और परीक्षार्थियों के हितों पर हमला कर रहे हैं। भ्रष्टाचार मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष कौशल सिंह ने आरोप लगाया कि आयोग अध्यक्ष जिस प्रकार से परीक्षाओं में भीड़ करने का प्रयास कर हैं, उससे लगातार प्रतियोगी छात्रों का हित मारा जा रहा है।
प्रतियोगियों ने आरोप लगाया कि आयोग अध्यक्ष ने पहले 2019 की पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा में मुख्य परीक्षा के लिए सफल होने वाले अभ्यर्थियों की संख्या 18 गुना से कम करके 13 गुना कर दिया और मुख्य परीक्षा में साक्षात्कार के लिए सफल होने वालों की संख्या दो गुना कर दी। अब आयु सीमा और अवसर कम करने का निर्णय यह सिद्घ करता है कि आयोग के अध्यक्ष प्रतियोगी छात्रों के खिलाफ काम कर रहे हैं। प्रतियोगी छात्रों का कहना है कि देश के अधिकांश राज्यों में राज्य सरकार की भर्तियों सहित पीसीएस परीक्षा में शामिल होने की आयु सीमा 40 वर्ष है, किसी भी राज्य में पीसीएस परीक्षा में शामिल होने के लिए अवसर की बाध्यता नहीं है।
परीक्षार्थियों ने अपनी नाराजगी से प्रदेश के मुख्यमंत्री और प्रमुख सचिव को मेल और ट्विटर के जरिए अवगत करा दिया है। प्रतियोगी छात्रों ने चेतावनी दी है कि आयोग ने यदि अपना तुगलकी फरमान लागू किया तो इसका हर स्तर पर विरोध होगा। विरोध करने वालों में अनिल उपाध्याय, अभिषेक सिंह, मनोज सिंह, हर्षवर्द्घन पाठक, प्रवीण सिंह, मयंक पांडेय सहित बड़ी संख्या में प्रतियोगी शामिल रहे।
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फिलहाल नहीं होगा कोई बदलाव
प्रतियोगी छात्र एक ओर जहां पीसीएस परीक्षा में आयु सीमा और अवसर कम करने की सुगबुगाहट से नाराज हैं तो वहीं उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग इस विषय में पूरी तरह से अनजान है। आयोग के सूत्रों का कहना है कि फिलहाल पीसीएस परीक्षा की आयु सीमा और अवसर कम किए जाने का कोई भी प्रस्ताव उनकी ओर से शासन को नहीं भेजा गया है। आयोग फिलहाल किसी प्रकार के बदलाव से इनकार कर रहा है।
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प्रयागराज। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से पीसीएस परीक्षा में शामिल होने की आयु सीमा और अवसर कम करने का प्रतियोगियों ने विरोध शुरू कर दिया है। भ्रष्टाचार मुक्ति मोर्चा के बैनर तले आयोग के खिलाफ एकजुट हुए प्रतियोगी छात्रों का कहना है कि वर्तमान लोक सेवा आयोग अध्यक्ष भ्रष्टाचार के मुद्दे पर तो चुप्पी साधे हैं और परीक्षार्थियों के हितों पर हमला कर रहे हैं। भ्रष्टाचार मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष कौशल सिंह ने आरोप लगाया कि आयोग अध्यक्ष जिस प्रकार से परीक्षाओं में भीड़ करने का प्रयास कर हैं, उससे लगातार प्रतियोगी छात्रों का हित मारा जा रहा है।
प्रतियोगियों ने आरोप लगाया कि आयोग अध्यक्ष ने पहले 2019 की पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा में मुख्य परीक्षा के लिए सफल होने वाले अभ्यर्थियों की संख्या 18 गुना से कम करके 13 गुना कर दिया और मुख्य परीक्षा में साक्षात्कार के लिए सफल होने वालों की संख्या दो गुना कर दी। अब आयु सीमा और अवसर कम करने का निर्णय यह सिद्घ करता है कि आयोग के अध्यक्ष प्रतियोगी छात्रों के खिलाफ काम कर रहे हैं। प्रतियोगी छात्रों का कहना है कि देश के अधिकांश राज्यों में राज्य सरकार की भर्तियों सहित पीसीएस परीक्षा में शामिल होने की आयु सीमा 40 वर्ष है, किसी भी राज्य में पीसीएस परीक्षा में शामिल होने के लिए अवसर की बाध्यता नहीं है।
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परीक्षार्थियों ने अपनी नाराजगी से प्रदेश के मुख्यमंत्री और प्रमुख सचिव को मेल और ट्विटर के जरिए अवगत करा दिया है। प्रतियोगी छात्रों ने चेतावनी दी है कि आयोग ने यदि अपना तुगलकी फरमान लागू किया तो इसका हर स्तर पर विरोध होगा। विरोध करने वालों में अनिल उपाध्याय, अभिषेक सिंह, मनोज सिंह, हर्षवर्द्घन पाठक, प्रवीण सिंह, मयंक पांडेय सहित बड़ी संख्या में प्रतियोगी शामिल रहे।
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फिलहाल नहीं होगा कोई बदलाव
प्रतियोगी छात्र एक ओर जहां पीसीएस परीक्षा में आयु सीमा और अवसर कम करने की सुगबुगाहट से नाराज हैं तो वहीं उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग इस विषय में पूरी तरह से अनजान है। आयोग के सूत्रों का कहना है कि फिलहाल पीसीएस परीक्षा की आयु सीमा और अवसर कम किए जाने का कोई भी प्रस्ताव उनकी ओर से शासन को नहीं भेजा गया है। आयोग फिलहाल किसी प्रकार के बदलाव से इनकार कर रहा है।