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एपीएस-2013 में भी धांधली!
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uppsc news
- फोटो : amar ujala
एपीएस-2013 में भी धांधली!
0 नियम विरुद्ध भर्ती पर शासन ने यूपीपीएससी को भेजा पत्र
0 शॉटहैंड, टाइप टेस्ट में अतिरिक्त छूट दिए जाने का मामला
0 अपर निजी सचिव के 176 पदों पर की जानी है भर्ती
प्रयागराज। अपर निजी सचिव (एपीएस)-2013 में भी धांधली का मामला सामने आया है। शॉर्टहैंड और टाइप टेस्ट में नियमों के खिलाफ जाकर अभ्यर्थियों को गलती पर तीन फीसदी की अतिरिक्त छूट दिए जाने के मामले में शासन की ओर से भी उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) को पत्र जारी किया गया है।
एपीएस-2010 में धांधली का मामला पहले ही सामने आ चुका है और इसकी सीबीआई जांच चल रही है। एपीएस-2013 में भी गड़बड़ी के आरोप लगे हैं और शासन की ओर से जारी पत्र में भी यह माना गया है कि चयन प्रक्रिया में गलती हुई है। एपीएस परीक्षा तीन चरणों में होती है। पहले चरण में हिंदी एवं सामान्य अध्ययन की परीक्षा, दूसरे चरण में शॉर्टहैंड एवं टाइप टेस्ट और तीसरे चरण में कंप्यूटर ज्ञान की परीक्षा होती है। 176 पदों पर भर्ती के लिए एपीएस-2013 द्वितीय चरण की परीक्षा 16 फरवरी 2016 से 25 फरवरी 2016 के बीच कराई गई थी। इसमें हिंदी शॉर्टहैंड और हिंदी टाइप टेस्ट शामिल था। कंप्यूटर ज्ञान की परीक्षा अभी नहीं हुई है।
शॉर्टहैंड और टाइप टेस्ट में अधिकतम पांच फीसदी गलती किए जाने तक की छूट है लेकिन, कई अभ्यर्थियों को तीन फीसदी की अतिरिक्त छूट देकर उन्हें शॉटहैंड एवं टाइप टेस्ट में पास कर दिया गया। आयोग ने ऐसा 13 जून 1987 को जारी अधिसूचना के तहत किया, जिसमें प्रावधान है कि योग्य अभ्यर्थी न मिलने पर आयोग गलती पर तीन फीसदी की अतिरिक्त छूट प्रदान कर सकता है लेकिन तमाम अभ्यर्थी इसके खिलाफ न्यायालय चले गए। अभ्यर्थियों का कहना था कि 13 जून 1987 की अधिसूचना को संशोधित करते हुए उत्तर प्रदेश सचिवालय वैयक्तिक सहायक सेवा नियमावली-2001 बनाई गई, जिसकी अधिसूचना 29 अगस्त 2001 को जारी की गई।
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इस अधिसूचना में शॉर्टहैंड और टाइप टेस्ट में गलती पर तीन फीसदी की अतिरिक्त छूट दिए जाने का कोई प्रावधान नहीं है। केवल पांच फीसदी तक की छूट दी जा सकती है। शासन की से जारी पत्र में भी कहा गया है कि 29 अगस्त 2001 की अधिसूचना में छूट की कोई व्यवस्था नहीं है। पत्र में यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि 13 जून 1987 की अधिसूचना भर्ती प्रक्रिया को रेगुलेट नहीं करती है।
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‘शासन से पत्र मिला है। आयोग इस पर विचार करेगा और जो उचित होगा उस पर निर्णय लिया जाएगा।’ जगदीश, सचिव यूपीपीएससी
एपीएस-2013 की भी सीबीआई जांच की मांग
- प्रतियोगी छात्रों ने एपीएस-2010 की तरह एपीएस-2013 की भी सीबीआई जांच की मांग की है। सूत्रों का कहना है कि आयोग ने एपीएस-2010 के मामले में भी यही गड़बड़ी की थी और सीबीआई से 29 अगस्त 2001 को शासनादेश छिपा था लेकिन, अभ्यर्थियों की ओर से सीबीआई को शासनादेश उपलब्ध कराया गया और जब सीबीआई ने आयोग के अफसरों से इस बारे में पूछताछ की तो उनके पास कोई जवाब नहीं था। प्रतियोगी छात्रसंघ समिति के मीडिया प्रभारी अवनीश पांडेय का कहना है कि एपीएस-2013 के शुरुआती चरणों का आयोजन भी उस कार्यकाल में किया गया, जिस कार्यकाल में हुई परीक्षाओं की सीबीआई जांच कर रही है। ऐसे में एपीएस-2013 की भी सीबीआई जांच होनी चाहिए।
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0 नियम विरुद्ध भर्ती पर शासन ने यूपीपीएससी को भेजा पत्र
0 शॉटहैंड, टाइप टेस्ट में अतिरिक्त छूट दिए जाने का मामला
0 अपर निजी सचिव के 176 पदों पर की जानी है भर्ती
प्रयागराज। अपर निजी सचिव (एपीएस)-2013 में भी धांधली का मामला सामने आया है। शॉर्टहैंड और टाइप टेस्ट में नियमों के खिलाफ जाकर अभ्यर्थियों को गलती पर तीन फीसदी की अतिरिक्त छूट दिए जाने के मामले में शासन की ओर से भी उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) को पत्र जारी किया गया है।
एपीएस-2010 में धांधली का मामला पहले ही सामने आ चुका है और इसकी सीबीआई जांच चल रही है। एपीएस-2013 में भी गड़बड़ी के आरोप लगे हैं और शासन की ओर से जारी पत्र में भी यह माना गया है कि चयन प्रक्रिया में गलती हुई है। एपीएस परीक्षा तीन चरणों में होती है। पहले चरण में हिंदी एवं सामान्य अध्ययन की परीक्षा, दूसरे चरण में शॉर्टहैंड एवं टाइप टेस्ट और तीसरे चरण में कंप्यूटर ज्ञान की परीक्षा होती है। 176 पदों पर भर्ती के लिए एपीएस-2013 द्वितीय चरण की परीक्षा 16 फरवरी 2016 से 25 फरवरी 2016 के बीच कराई गई थी। इसमें हिंदी शॉर्टहैंड और हिंदी टाइप टेस्ट शामिल था। कंप्यूटर ज्ञान की परीक्षा अभी नहीं हुई है।
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शॉर्टहैंड और टाइप टेस्ट में अधिकतम पांच फीसदी गलती किए जाने तक की छूट है लेकिन, कई अभ्यर्थियों को तीन फीसदी की अतिरिक्त छूट देकर उन्हें शॉटहैंड एवं टाइप टेस्ट में पास कर दिया गया। आयोग ने ऐसा 13 जून 1987 को जारी अधिसूचना के तहत किया, जिसमें प्रावधान है कि योग्य अभ्यर्थी न मिलने पर आयोग गलती पर तीन फीसदी की अतिरिक्त छूट प्रदान कर सकता है लेकिन तमाम अभ्यर्थी इसके खिलाफ न्यायालय चले गए। अभ्यर्थियों का कहना था कि 13 जून 1987 की अधिसूचना को संशोधित करते हुए उत्तर प्रदेश सचिवालय वैयक्तिक सहायक सेवा नियमावली-2001 बनाई गई, जिसकी अधिसूचना 29 अगस्त 2001 को जारी की गई।
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इस अधिसूचना में शॉर्टहैंड और टाइप टेस्ट में गलती पर तीन फीसदी की अतिरिक्त छूट दिए जाने का कोई प्रावधान नहीं है। केवल पांच फीसदी तक की छूट दी जा सकती है। शासन की से जारी पत्र में भी कहा गया है कि 29 अगस्त 2001 की अधिसूचना में छूट की कोई व्यवस्था नहीं है। पत्र में यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि 13 जून 1987 की अधिसूचना भर्ती प्रक्रिया को रेगुलेट नहीं करती है।
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‘शासन से पत्र मिला है। आयोग इस पर विचार करेगा और जो उचित होगा उस पर निर्णय लिया जाएगा।’ जगदीश, सचिव यूपीपीएससी
एपीएस-2013 की भी सीबीआई जांच की मांग
- प्रतियोगी छात्रों ने एपीएस-2010 की तरह एपीएस-2013 की भी सीबीआई जांच की मांग की है। सूत्रों का कहना है कि आयोग ने एपीएस-2010 के मामले में भी यही गड़बड़ी की थी और सीबीआई से 29 अगस्त 2001 को शासनादेश छिपा था लेकिन, अभ्यर्थियों की ओर से सीबीआई को शासनादेश उपलब्ध कराया गया और जब सीबीआई ने आयोग के अफसरों से इस बारे में पूछताछ की तो उनके पास कोई जवाब नहीं था। प्रतियोगी छात्रसंघ समिति के मीडिया प्रभारी अवनीश पांडेय का कहना है कि एपीएस-2013 के शुरुआती चरणों का आयोजन भी उस कार्यकाल में किया गया, जिस कार्यकाल में हुई परीक्षाओं की सीबीआई जांच कर रही है। ऐसे में एपीएस-2013 की भी सीबीआई जांच होनी चाहिए।