यूपीपीएससी : पैटर्न बदलने से गिरा सफलता का ग्राफ, सिविल सेवा परीक्षा की तर्ज पर पेपर तैयार होने से बढ़ा संकट
राज्य कृषि सेवा के पदों पर पहले पीसीएस परीक्षा के तहत भर्ती की जाती थी। इस बार पदों की संख्या काफी अधिक होने के कारण सम्मिलित राज्य कृषि सेवा का गठन कर अलग से परीक्षा आयोजित कराई गई। परीक्षा के लिए 73792 अभ्यर्थियों ने आवेदन किए थे।
विस्तार
पहले सम्मिलित राज्य कृषि सेवा परीक्षा-2020 और अब पीसीएस-2021, दोनों ही प्रारंभिक परीक्षाओं के परिणाम अप्रत्याशित रहे। मानक के मुकाबले सफलता का ग्राफ काफी नीचे रह गया। राज्य कृषि सेवा की प्रारंभिक परीक्षा में मानक के अनुसार पदों की संख्या के मुकाबले 13 गुना अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए क्वालीफाई होना था, लेकिन ढाई गुना भी क्वालीफाई नहीं कर सके। वहीं, पीसीएस में यह मानक 15 गुना था, जबकि मुख्य परीक्षा के लिए पदों की संख्या के मुकाबले महज 11 गुना ही क्वालीफाई कर सके। विशेषज्ञों के अनुसार अचानक बदले पैटर्न के आधार पर छात्र अब तक खुद को ढाल नहीं सके हैं।
राज्य कृषि सेवा के पदों पर पहले पीसीएस परीक्षा के तहत भर्ती की जाती थी। इस बार पदों की संख्या काफी अधिक होने के कारण सम्मिलित राज्य कृषि सेवा का गठन कर अलग से परीक्षा आयोजित कराई गई। परीक्षा के लिए 73792 अभ्यर्थियों ने आवेदन किए थे। प्रारंभिक परीक्षा में 38039 परीक्षार्थी उपस्थित और 35753 अभ्यर्थी अनुपस्थित थे। राज्य कृषि सेवा के 564 पदों पर भर्ती के लिए मुख्य परीक्षा के लिए सिर्फ 1283 अभ्यर्थी ही क्वालीफाई कर सके, जो पदों की संख्या के मुकाबले ढाई गुना से भी कम है।
पीसीएस के 678 पदों पर होनी है भर्ती
पीसीएस-2021 की प्रारंभिक परीक्षा में पदों की संख्या के मुकाबले 15 गुना अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए क्वालीफाई कराया जाना था। पीसीएस के 678 पदों पर भर्ती होनी है, जबकि प्रारंभिक परीक्षा में केवल 7688 अभ्यर्थियों को ही मुख्य परीक्षा के लिए सफल घोषित किया गया। ऐसे में प्रदेश की दोनों ही सबसे बड़ी परीक्षाओं के परिणाम अप्रत्याशित रहे। जीएस वर्ल्ड के निदेशक नीरज सिंह का मानना है कि पैटर्न में बदलाव से पहले छात्रों को दो से तीन वर्ष का समय देना चाहिए, जैसा की केंद्र सरकार की भर्ती एजेंसियां करती हैं।
इससे अभ्यर्थी पैटर्न के अनुरूप खुद को ढाल लेते हैं। 2018 में अचानक बदलाव किया गया। पेपर सिविल सेवा परीक्षा की तर्ज पर बनने लगा और इसका असर परिणाम पर दिखा। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग को भविष्य में ध्यान रखना होगा कि बदलाव से दो-तीन वर्षों पहले छात्रों को सूचित किया जाए। प्रतियोगी परीक्षाओं की पुस्तकों से संबंधित लेखक सिद्धार्थ श्रीवास्तव का कहना है कि पैटर्न में बदलाव के बाद प्रतियोगी छात्रों को पुस्तकों के चयन में खास सावधानी बरतनी होगी। साथ ही इस बात पर ध्यान देना होगा कि सोशल मीडिया पर उपलब्ध सामग्री कितनी विश्वसनीय है।